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टमाटर दो रुपए किलो भी खरीदने को कोई तैयार नहीं
नवीन सक्सेना
Updated Sat, 25 Feb 2017 12:58 AM IST
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टमाटर के दामों में वृद्धि
- फोटो : ANI
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थोक मंडी में बाहर से व्यापारियों के न आने से टमाटर दो रुपये किलो भी नहीं बिक पा रहा है। आढ़तियों के टमाटर की क्रेटों के ढेर लगे हुए हैं, मगर कोई खरीदने वाला ही नहीं है। इस कारण टमाटर सड़ने लगा है। वहीं, उपज के दाम मिलना तो दूर काश्तकारों को टमाटर मंडी तक लाने का वाहन किराया तक नहीं निकल पा रहा है, इससे काश्तकार काफी परेशान हैं।
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कुमाऊं की सबसे बड़ी थोक मंडी हल्द्वानी में है। मंडी में पर्वतीय क्षेत्रों के अलावा गौलापार, लामाचौड़, कोटाबाग, रामपुर रोड समेत आसपास के स्थानों का टमाटर बड़ी मात्रा में आ रहा है।
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यहां के टमाटर की मैदानी जिलों में अच्छी खासी डिमांड होने के कारण दिल्ली एवं यूपी के मेरठ आदि स्थानों से बड़ी संख्या में व्यवसायी आते थे, लेकिन इस बार मैदानी इलाकों में भी टमाटर की उपज अच्छी हुई है और वहां की डिमांड वहीं से पूरी हो जा रही है। इस कारण बाहर से व्यवसायी हल्द्वानी मंडी में टमाटर की खरीददारी करने के लिए बहुत कम आ रहे हैं।
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इसलिए टमाटर का भाव तेजी नहीं पकड़ पाया है। प्रेमशंकर अरविंद कुमार आढ़त के संचालक अरविंद कुमार बताते हैं कि एक क्रेट जिसमें 20 से 22 किलो टमाटर होता है, उसके भाव 40 रुपए भी नहीं मिल पा रहे। कई काश्तकारों की टमाटर की क्रेटें आढ़त में रखीं हैं।
टमाटर की क्रेटें रखने पर सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि दो तीन दिन बाद खराब टमाटर की छंटनी करनी पड़ती है। यह स्थिति एक आढ़त पर नहीं बल्कि कई आढ़तों पर देखने को मिली।
बड़े काश्तकारों ने खेत में ही जोत दिया टमाटर
गौलापार में टमाटर की सबसे अधिक खेती होती है। काश्तकार राजेंद्र सिंह बोरा एवं भावेश पाठक बताते हैं कि टमाटर लगाने में जितनी लागत आई, उतनी कीमत तक इस बार नहीं मिल पाई है। इससे टमाटर काश्तकारों को काफी नुकसान हुआ है।
काश्तकार बताते हैं कि स्थिति यह है कि टमाटर की मंडी तक ढुलाई का पैसा तक नहीं निकल पा रहा है। टमाटर 40-50 रुपए क्रेट बेचने से तो अच्छा है कि उसे खेत में ही छोड़ दिया। कई बड़े काश्तकारों ने तो टमाटर की फसल पर जुताई करवाकर जानवरों के लिए चारा लगा दिया है।
इस वर्ष टमाटर की उपज बंपर होने के कारण मैदानी इलाकों से टमाटर की डिमांड न आने के कारण यह स्थिति आई है। काश्तकारों को फसल की कीमत तो मिल सके, इसके लिए मंडी समिति प्रयास कर रही है।
- आरपी शर्मा, सचिव मंडी समिति।