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कालाढूंगी में वर्षों से मंडी की मांग आज तक नहीं बन सकी मुद्दा
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No Mandi Samiti in Haldwani
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कालाढूंगी (नैनीताल)। कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र का कोटाबाग और कालाढूंगी का इलाका फल, सब्जी और फसलों का प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है। क्षेत्रवासियों की आजीविका का प्रमुख साधन कृषि और बागवानी है। मांग के बाद भी मंडी नहीं होने से किसानों को उत्पादों का वाजिब मूल्य नहीं मिल पाता है।
कालाढूंगी के मूसाबंगर, पतलिया, राकड़, बजूनियाहल्दू, पवलगढ़, कमोला, धमोला, छोटी हल्द्वानी के अलावा कोटाबाग का पर्वतीय इलाकों के नैनीताल विधानसभा से सटे गांव बाघनी, बांसी, सोनझाला, पंगूट, पांडे गांव के किसानों का मुख्य व्यवसाय कृषि है।
इन इलाकों में सोयाबीन, धान, गेहूं, मटर, चना, अदरक, मक्का, प्याज, टमाटर, लाही, सरसों, गोभी, आलू, मूली, केला, सेब, संतरा, लीची आदि फसलों की अच्छी पैदावार होती है।
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यहां अच्छी किस्म की बासमती का भी उत्पादन होने लगा है। किसान गरीब का गरीब ही रह गया है जबकि बिचौलिये मालामाल हो रहे हैं। किसानों को मलाल है कि उनकी समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
लंबे समय से मंडी की मांग की जाती रही है लेकिन किसी भी सरकार ने उनकी समस्या का समाधान नहीं किया है। मंडी नहीं होने से उन्हें मुकासन उठाना पड़ता है। - विपिन बुधलाकोटी कमोला
क्षेत्र में मंडी नहीं होने के कारण किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए हल्द्वानी या अन्य बड़े शहरों में जाना पड़ता है। जिसमें समय के साथ-साथ धन की भी बर्बादी होती है। - संजय बुधलाकोटी नयागांव
कालाढूंगी क्षेत्र में मंडी की प्रमुख मांग है। इस ओर किसी ने भी ध्यान नहीं दिया है। मंडी नहीं होने कारण बिचौलिए किसानों की फसल को औने पौने दामों में घर से ही खरीद ले जाते हैं। - खुशहाल गंगोला कमोला
फसल के साथ-साथ इन क्षेत्रों में किसान फूलों का भी अच्छा उत्पादन करते हैं। बाजार नहीं मिलने के कारण फूलों का भी उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। - नवीन पंत बजुनिया हल्दू
विकासखंड कोटाबाग में टमाटर का प्रचुर उत्पादन होता है। यह यहां की प्रमुख फसल है। मंडी नहीं होने से आधा टमाटर सड़ गल जाता है। सरकार को जल्द से जल्द यहां मंडी की स्थापना करनी चाहिए। - आनंद बल्लभ भगत मूसाबंगर
ग्रामसभा नोदा में आंवले की खेती प्रचुर मात्रा में की जाती है। मंडी के अभाव में आंवला खेतों में ही सड़ जाता है। किसान को उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। - हरीश ढौडियाल नोदा
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कालाढूंगी के मूसाबंगर, पतलिया, राकड़, बजूनियाहल्दू, पवलगढ़, कमोला, धमोला, छोटी हल्द्वानी के अलावा कोटाबाग का पर्वतीय इलाकों के नैनीताल विधानसभा से सटे गांव बाघनी, बांसी, सोनझाला, पंगूट, पांडे गांव के किसानों का मुख्य व्यवसाय कृषि है।
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इन इलाकों में सोयाबीन, धान, गेहूं, मटर, चना, अदरक, मक्का, प्याज, टमाटर, लाही, सरसों, गोभी, आलू, मूली, केला, सेब, संतरा, लीची आदि फसलों की अच्छी पैदावार होती है।
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यहां अच्छी किस्म की बासमती का भी उत्पादन होने लगा है। किसान गरीब का गरीब ही रह गया है जबकि बिचौलिये मालामाल हो रहे हैं। किसानों को मलाल है कि उनकी समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
लंबे समय से मंडी की मांग की जाती रही है लेकिन किसी भी सरकार ने उनकी समस्या का समाधान नहीं किया है। मंडी नहीं होने से उन्हें मुकासन उठाना पड़ता है। - विपिन बुधलाकोटी कमोला
क्षेत्र में मंडी नहीं होने के कारण किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए हल्द्वानी या अन्य बड़े शहरों में जाना पड़ता है। जिसमें समय के साथ-साथ धन की भी बर्बादी होती है। - संजय बुधलाकोटी नयागांव
कालाढूंगी क्षेत्र में मंडी की प्रमुख मांग है। इस ओर किसी ने भी ध्यान नहीं दिया है। मंडी नहीं होने कारण बिचौलिए किसानों की फसल को औने पौने दामों में घर से ही खरीद ले जाते हैं। - खुशहाल गंगोला कमोला
फसल के साथ-साथ इन क्षेत्रों में किसान फूलों का भी अच्छा उत्पादन करते हैं। बाजार नहीं मिलने के कारण फूलों का भी उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। - नवीन पंत बजुनिया हल्दू
विकासखंड कोटाबाग में टमाटर का प्रचुर उत्पादन होता है। यह यहां की प्रमुख फसल है। मंडी नहीं होने से आधा टमाटर सड़ गल जाता है। सरकार को जल्द से जल्द यहां मंडी की स्थापना करनी चाहिए। - आनंद बल्लभ भगत मूसाबंगर
ग्रामसभा नोदा में आंवले की खेती प्रचुर मात्रा में की जाती है। मंडी के अभाव में आंवला खेतों में ही सड़ जाता है। किसान को उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। - हरीश ढौडियाल नोदा