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नौ विदेशी महिलाओं समेत 22 का सामूहिक उपनयन संस्कार
ब्यूूराे, अमर उजाला, भीमताल (नैनीताल)।
Updated Thu, 17 Sep 2015 12:54 AM IST
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सनातन संस्कृति और वैदिक रीतियों के अनुसार उपनयन संस्कार केवल पुरुषों का ही होता है। इस संस्कार में उन्हें जनेऊ धारण कराई जाती है। ऐसी लोकधारणा सदियों से चली आ रही है।
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पर 21वीं सदी में नौ विदेशी महिलाओं ने इस मिथक को तोड़ते हुए न केवल भारतीय संस्कृति को आत्मसात किया, बल्कि जनेऊ धारण करने के साथ ही गायत्री मंत्र की सामूहिक दीक्षा लेकर एक नई परंपरा को जन्म दिया।
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इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान विभिन्न प्रांतों से आए 13 अन्य पुरुषों ने भी जनेऊ धारण कर गायत्री मंत्र की दीक्षा ली। महिलाओं के मुंडन को छोड़कर बाकी रीतियां समान रूप से संपन्न कराई गई।
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लगभग चार घंटे से अधिक समय तक वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आयोजित यह अहम धार्मिक अनुष्ठान मंदिर मार्ग में स्थित और एक होटल में बुधवार को गायत्री शक्तिपीठ हल्दूचौड़ की ओर से कराया गया।
ग्रेटर भीमताल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद गुणवंत ने बताया कि देशी विदेशी सैलानियों का यह दल उनके होटल में पिछले कुछ दिन से रुका है।
दल में शामिल सभी लोग भारतीय संस्कृति और संस्कारों से प्रभावित हैं। कई दिनों से वे ऋषि संस्कृति का अध्ययन कर रहे हैं। भारतीय ग्रंथों को समझने के लिए विदेशी सैलानी संस्कृत भी सीख रहे हैं।
बुधवार को शुरू हुए धार्मिक अनुष्ठान के दौरान गायत्री शक्तिपीठ के हरिदत्त सती और रघुवंश दुबे ने मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना और हवन के बाद सभी 22 लोगों (9 विदेशी महिलाओं समेत) को जनेऊ धारण कराया।
इनमें स्लोवाकिया निवासी जैन जैवोरिक, यूक्रेन निवासी ओलेक्जेंड्रा सैलीरोन, न्यूजीलैंड की रोजी गुल्हनतामन, कनाडा निवासी जेस्टीन जैगोस, यूएस निवासी जितेंद्र चौवान, यूएसए निवासी कैंडी एल्टमन, रूस निवासी स्वेथानी मोरोजोवा, नाटालियो फेडरोवा और यूएसए निवासी जियालिसा क्रहान समेत पंजाब के वरुण वेदी, राजस्थान के विकास सास्वत, हैदराबाद की रानी संवेला, निरम एल्याकर, दिल्ली के गौरव भाल, एविथ गैंट्रा, श्रीकुमार, दीपक कलकोटी, बंगलूरू के अर्नब नंदी, इलाहाबाद के अक्षत पांडे, कर्नाटक की नवेदिता संदीप और दिल्ली की नताशा शामिल थे।
इससे पहले पुरुषों कर्णभेद और मुंडन भी कराया गया। महिलाओं का मुंडन नहीं किया गया। तत्पश्चात सभी बटुकों को सामूहिक रूप से गायत्री मंत्र की दीक्षा दी गई। उन्हें नित्य जप करना और यज्ञ करना भी सिखाया गया।
उन्हें बताया गया कि भारतीय संस्कृति में किस तरह से भोजन बनाने के बाद भोजन का एक-एक टुकड़ा गाय, कुत्ते, चींटी और कौआ को दिया जाता है। इसके बाद ही भोजन किया जाता है।
बटुकों को कन्या पूजन के बारे में भी जानकारी दी गई। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान अशोक फर्सवान ने संस्कृत मंत्रों का अंग्रेजी में व्याख्यान किया। कार्यक्रम के दौरान गायत्री शक्तिपीठ के व्यवस्थापक शंकर पांडे, विनोद गुणवंत, नीलेश गुणवंत आदि मौजूद थे।