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गंगोलीहाट में मिली अब तक की सबसे बड़ी आठ मंजिला गुफा
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गंगोलीहाट में मिली आठ मंजिला गुफा में उभरी आकृतियां। संवाद
- फोटो : PITHORAGARH
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गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। गुफाओं की घाटी के रूप में विख्यात गंगावली क्षेत्र में आठ मंजिला गुफा मिली है। यह गुफा ऐतिहासिक महाकाली मंदिर से लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर है। गंगोलीहाट क्षेत्र में स्थित लगभग एक दर्जन गुफाओं में यह अब तक की सबसे बड़ी गुफा बताई जा रही है। स्थानीय लोगों ने इसे महाकालेश्वर नाम दिया है। इससे पहले वर्ष 2014 में सात मंजिला गुफा मिली थी।
गंगोलीहाट निवासी दीपक और ऋषभ रावल एक साल पूर्व लॉकडाउन के दौरान अपने कुछ साथियों के साथ जंगल घूमने आए थे। तब वे इस गुफा के मुहाने पर पहुंचे थे लेकिन संसाधन नहीं होने के कारण गुफा के भीतर नहीं जा सके। इसके बाद उन्होंने साथियों के साथ इस बात को साझा किया और गुफा में जाने की योजना बनाई। रविवार को सुरेंद्र बिष्ट, भूपेश पंत, ऋषभ रावल, पप्पू रावल और दीपक रावल (दीपू) इस स्थान पर पहुंचे। यहां पड़े कुछ पत्थरों को हटाया तो गुफा का मुहाना खुल गया। हिम्मत जुटाकर मोबाइल की लाइट के सहारे उन्होंने गुफा में प्रवेश किया। इसके बाद सभी युवा इस गुफा में आठ मंजिल तक चढ़े।
गुुफा को खोजने वाले सुरेंद्र बिष्ट ने बताया कि गुफा में ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में है। भीतर का तापमान काफी कम है। गुफा की दीवारों से टपकने वाला पानी काफी ठंडा है। उनकी इस संबंध में कुमाऊं विश्वविद्यालय के नैनीताल कैंपस के भूगर्भ विभाग के प्रोफेसर बहादुर सिंह कोटलिया से बात हुई है। कोटलिया ने जल्द गंगोलीहाट आने की बात कही है। सुरेंद्र का कहना है कि मास्टर प्लान के तहत गंगावली की एक दर्जन बड़ी और छोटी गुफाओं को पर्यटन स्थलों के रूप में व्यवस्थित किया जाए तो युवाओं को रोजगार मिल सकता है।
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स्कंद पुराण में भी है गुफाओं का उल्लेख
गंगोलीहाट। गुफाओं की घाटी के नाम से विख्यात गंगोलीहाट क्षेत्र की गुफाओं का स्कंद पुराण में भी उल्लेख है। स्कंद पुराण के मानस खंड में गंगावली क्षेत्र में अलग-अलग कालखंड में गुफाओं के प्रकाश में आने का उल्लेख मिलता है। यह गुफा अब तक यहां पर पाताल भुवनेश्वर, कोटेश्वर, भोलेश्वर, महेश्वर, लटेश्वर, मुक्तेश्वर, सप्तेश्वर, डाणेश्वर, भृगतुंग और हाल ही में मिली एक गुफा में सबसे बड़ी गुफा है।
2014 में मिली थी सात मंजिला गुफा
गंगोलीहाट। गंगोलीहाट के सुतारगांव के डानाकोट में इससे पूर्व सबसे बड़ी सात मंजिला गुफा वर्ष 2014 में मिली थी। पिछले साल फरवरी में लाली गांव में 100 मीटर लंबी गुफा मिली थी। इस गुफा का नाम लटेश्वर गुफा रखा गया है।
गंगोलीहाट क्षेत्र में कई प्राकृतिक गुफाएं हैं। इन गुफाओं के भीतर लगातार पानी का रिसाव होने से गुफाओं में तमाम तरह की आकृतियां भी उभरी रहती हैं। अब जो गुफा मिली है शीघ्र ही इसका निरीक्षण किया जाएगा।
- चंद्र सिंह, पुरातत्वविद् अल्मोड़ा
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गंगोलीहाट निवासी दीपक और ऋषभ रावल एक साल पूर्व लॉकडाउन के दौरान अपने कुछ साथियों के साथ जंगल घूमने आए थे। तब वे इस गुफा के मुहाने पर पहुंचे थे लेकिन संसाधन नहीं होने के कारण गुफा के भीतर नहीं जा सके। इसके बाद उन्होंने साथियों के साथ इस बात को साझा किया और गुफा में जाने की योजना बनाई। रविवार को सुरेंद्र बिष्ट, भूपेश पंत, ऋषभ रावल, पप्पू रावल और दीपक रावल (दीपू) इस स्थान पर पहुंचे। यहां पड़े कुछ पत्थरों को हटाया तो गुफा का मुहाना खुल गया। हिम्मत जुटाकर मोबाइल की लाइट के सहारे उन्होंने गुफा में प्रवेश किया। इसके बाद सभी युवा इस गुफा में आठ मंजिल तक चढ़े।
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गुुफा को खोजने वाले सुरेंद्र बिष्ट ने बताया कि गुफा में ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में है। भीतर का तापमान काफी कम है। गुफा की दीवारों से टपकने वाला पानी काफी ठंडा है। उनकी इस संबंध में कुमाऊं विश्वविद्यालय के नैनीताल कैंपस के भूगर्भ विभाग के प्रोफेसर बहादुर सिंह कोटलिया से बात हुई है। कोटलिया ने जल्द गंगोलीहाट आने की बात कही है। सुरेंद्र का कहना है कि मास्टर प्लान के तहत गंगावली की एक दर्जन बड़ी और छोटी गुफाओं को पर्यटन स्थलों के रूप में व्यवस्थित किया जाए तो युवाओं को रोजगार मिल सकता है।
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स्कंद पुराण में भी है गुफाओं का उल्लेख
गंगोलीहाट। गुफाओं की घाटी के नाम से विख्यात गंगोलीहाट क्षेत्र की गुफाओं का स्कंद पुराण में भी उल्लेख है। स्कंद पुराण के मानस खंड में गंगावली क्षेत्र में अलग-अलग कालखंड में गुफाओं के प्रकाश में आने का उल्लेख मिलता है। यह गुफा अब तक यहां पर पाताल भुवनेश्वर, कोटेश्वर, भोलेश्वर, महेश्वर, लटेश्वर, मुक्तेश्वर, सप्तेश्वर, डाणेश्वर, भृगतुंग और हाल ही में मिली एक गुफा में सबसे बड़ी गुफा है।
2014 में मिली थी सात मंजिला गुफा
गंगोलीहाट। गंगोलीहाट के सुतारगांव के डानाकोट में इससे पूर्व सबसे बड़ी सात मंजिला गुफा वर्ष 2014 में मिली थी। पिछले साल फरवरी में लाली गांव में 100 मीटर लंबी गुफा मिली थी। इस गुफा का नाम लटेश्वर गुफा रखा गया है।
गंगोलीहाट क्षेत्र में कई प्राकृतिक गुफाएं हैं। इन गुफाओं के भीतर लगातार पानी का रिसाव होने से गुफाओं में तमाम तरह की आकृतियां भी उभरी रहती हैं। अब जो गुफा मिली है शीघ्र ही इसका निरीक्षण किया जाएगा।
- चंद्र सिंह, पुरातत्वविद् अल्मोड़ा