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नववर्ष के स्वागत में प्रकृति की दीवाली
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नैनीताल। नये वर्ष का स्वागत प्रकृति अपने अंदाज में करने जा रही है। दो और तीन जनवरी की रात्रि आकाश में वर्ष का सर्वाधिक चमकीला उल्कापात नजर आएगा। खास बात यह है कि इसमें प्रति घंटे सर्वाधिक अर्थात 120 उल्कापात नजर आएंगे। यानी प्रति सेकंड दो उल्काएं आकाश में नजर आएंगी। दो जनवरी की रात्रि आकाश में चांद नहीं होगा जबकि तीन को भी चंद मिनटों के लिए नव चंद नजर आएगा। जिससे स्याह रात में उल्काएं और भी अधिक चमकदार दिखाई देंगी।
आकाश के इन दिनों साफ रहने के कारण भी यह अधिक स्पष्ट नजर आएगा। क्वाड्रेन्टिस आमतौर पर दिसंबर के अंत और जनवरी के दूसरे सप्ताह के बीच सक्रिय होते हैं, और 3-4 जनवरी के आसपास चरम पर होते हैं। अन्य उल्का वर्षा के विपरीत, जो लगभग दो दिनों तक अपने चरम पर रहती है, क्वाड्रेन्टिस की चरम अवधि केवल कुछ घंटों तक ही रहती है। क्षुद्रग्रह 2003 ईएच 1आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान एरीज के वैज्ञानिक डॉ. एसबी पांडे ने बताया कि इस उल्कापात का नाम पूर्व में निष्क्रिय हो चुके नक्षत्र क्वाड्रान मुरलीस के नाम पर रखा गया जब क्योंकि ये उसी दिशा से आते हुए प्रतीत होती है। 1922 में अंतर्राष्ट्रीय एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन की ओर से तैयार किए गए नक्षत्रों की सूची से इसे हटा दिया गया था, लेकिन क्योंकि उल्कापात का नाम पहले ही क्वाड्रंस मुरली के नाम पर रखा जा चुका था इसलिए यही नाम प्रचलन में है। क्वाड्रंटिड्स को कभी-कभी एक अन्य आधुनिक नक्षत्र, बूट्स के नाम पर बूटिड्स भी कहा जाता है।इस क्षुद्रग्रह को सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करने में लगभग 5.5 वर्ष लगते हैं।
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आकाश के इन दिनों साफ रहने के कारण भी यह अधिक स्पष्ट नजर आएगा। क्वाड्रेन्टिस आमतौर पर दिसंबर के अंत और जनवरी के दूसरे सप्ताह के बीच सक्रिय होते हैं, और 3-4 जनवरी के आसपास चरम पर होते हैं। अन्य उल्का वर्षा के विपरीत, जो लगभग दो दिनों तक अपने चरम पर रहती है, क्वाड्रेन्टिस की चरम अवधि केवल कुछ घंटों तक ही रहती है। क्षुद्रग्रह 2003 ईएच 1आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान एरीज के वैज्ञानिक डॉ. एसबी पांडे ने बताया कि इस उल्कापात का नाम पूर्व में निष्क्रिय हो चुके नक्षत्र क्वाड्रान मुरलीस के नाम पर रखा गया जब क्योंकि ये उसी दिशा से आते हुए प्रतीत होती है। 1922 में अंतर्राष्ट्रीय एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन की ओर से तैयार किए गए नक्षत्रों की सूची से इसे हटा दिया गया था, लेकिन क्योंकि उल्कापात का नाम पहले ही क्वाड्रंस मुरली के नाम पर रखा जा चुका था इसलिए यही नाम प्रचलन में है। क्वाड्रंटिड्स को कभी-कभी एक अन्य आधुनिक नक्षत्र, बूट्स के नाम पर बूटिड्स भी कहा जाता है।इस क्षुद्रग्रह को सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करने में लगभग 5.5 वर्ष लगते हैं।
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