फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Mother, I have failed, four hours of chemistry ratio still did not come to ashes

Nainital News: मैया मैं तो फेल हो आयो, चार प्रहर कैमस्ट्री रटयो फिर भी खाक न आयो

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 27 Nov 2022 05:30 AM IST
विज्ञापन
Mother, I have failed, four hours of chemistry ratio still did not come to ashes
वरिष्ठ रंगकर्मी जुगल किशोर पेठशाली। अमर उजाला
हल्द्वानी। ‘मैया मैं तो फेल हो आयो, चार प्रहर कैमस्ट्री रटयो फिर भी खाक न आयो, तू भोली समझेगी मैंने समय बेकार गंवायो। दोष है मैया सभी पिता को नहीं टयूशन लगवायो’। संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार के लिए चयनित कुमाऊं के वरिष्ठ रंगकर्मी और कुमाऊंनी साहित्यकार जुगल किशोर पेटशाली ने यह पहली कविता हाईस्कूल में असफल होने पर लिखी और तब जीआईसी अल्मोड़ा की पत्रिका में उनकी यह कविता प्रकाशित हुई भी थी। उसके बाद उन्होंने निरंतर लिखना शुरू किया। नतीजा यह हुआ कि उत्तराखंड से जयशंकर प्रसाद पुरस्कार लेने वाले एकलौते साहित्यकार और रंगकर्मी हैं। पेटशाली को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार राष्ट्रपति की ओर से विशेष अलंकरण समारोह में दिया जाएगा।
विज्ञापन

गुरु रामानंद के सानिध्य में रहे पेटशाल (अल्मोड़ा) निवासी 78 वर्षीय पेटशाली ने नौ-दस साल की उम्र से ही लिखना शुरू कर दिया था। वह हिंदी और कुमाऊंनी में अब तक 18 पुस्तकें लिख चुके हैं। पेटशाली की सबसे प्रसिद्ध किताब प्रेम गाथा पर आधारित राजुला मालूशाही और चितई ग्वल देवता पर आधारित ‘जय बाला गोरिया’‘ महाकाव्य रही जिसके लिए उन्हें जयशंकर पुरस्कार भी मिला। बाद में राजुला मालूशाही पर उन्होंने फिल्म भी बनाई। इसके अलावा उन्होंने उत्तराखंड के लोकगीत, संस्कार गीत, लोक गाथाओं पर कई किताबें लिखीं। ‘उत्तरांचल के लोकवाद्य’ किताब में उन्होंने राज्य के 35 लोकवाद्यों पर लिखा है।
विज्ञापन

तिकोनिया स्थित आवास पर अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि उनके जीवन में लेखन और चिंतन के अलावा कोई काम नहीं बचा। उनकी किताबों पर कई शोधार्थी शोध भी कर चुके हैं। बीती 21 नवंबर को उनकी पांच किताबें विभूति योग, मेरे नाटक, जी रया जाग रया, हे राम और गंगनाथ गीतावली का देहरादून में विमोचन हुआ है। आजकल वह लोक देवता पर किताब लिख रहे हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति से पुरस्कार मिलना बड़ी खुशी है। वह इसे माता पिता और गुरु का आशीर्वाद मानते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

.......
कोविड काल में लिखा ‘हे राम’ काव्य
जुगल किशोर पेटशाली ने कोविड काल में भगवान राम पर आधारित काव्य ‘हे राम’ लिखा, लेकिन यह पुस्तक आखिर में रुक गई और एक साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी। अचानक एक दिन उन्हें एहसाह हुआ कि जैसे हनुमान कह रहे हों कि प्रभु राम पर लिख रहे हो और हनुमान का जिक्र तक नहीं। उसके बाद उन्होंने अंत में हनुमान वंदना लिखी और पुस्तक पूरी हुई।

............
कद्र नहीं की तो संग्रहालय दे दिया दान में
रंगकर्मी पेटशाली ने 2003-04 में पेटशाल में ऐतिहासिक संग्रहालय बनाया था जिसमें वाद्ययंत्रों के अलावा पूर्वजों के दस्तावेज, पुराने बर्तन, 1800 सदी की पुस्तकें रखी गई थीं। तत्कालीन सीएम हरीश रावत, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक और भगत सिंह कोश्यारी ने भी संग्रहालय का निरीक्षण किया था लेकिन उन्हें इस बात की टीस है कि सरकारों ने उनके संग्रहालय की कद्र नहीं की। रखरखाव के अभाव में कई दस्तावेज चोरी हो गए जिसके बाद उन्होंने पिछले दिनों संग्रहालय को दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र को भेंट स्वरूप दान में दे दिया। दून स्थित संग्रहालय में उनके संग्रह को उनके नाम से रखा जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed