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पांच जिलों के लिए रवाना हुई सचल न्यायालय वैन
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नैनीताल के हाईकोर्ट में सचल न्यायालय वैन को हरी झंड़ी दिखाकर रवाना करते मुख्य न्यायधीश आरएस चौह?
- फोटो : NAINITAL
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नैनीताल। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हाईकोर्ट परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राघवेंद्र सिंह चौहान, न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी, न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा, न्यायमूर्ति एनएस धानिक, न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे, न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा ने सचल न्यायालय वैनों को हरी झंडी दिखाकर अलग अलग जिलों के लिए रवाना किया। सचल न्यायालय वैन के चलने के बाद अब दूरदराज में रह रहे बीमार और बुजुर्ग गवाहों को गवाही के लिए न्यायालय परिसर में नहीं आना पड़ेगा।
इस मौके पर रजिस्ट्रार जनरल धनंजय चतुर्वेदी ने बताया कि सचल न्यायालय वैन इंटरनेट, कंप्यूटर, वेब कैमरा व सीसीटीवी समेत सभी जरूरी सुविधाओं से लैस है। उन्होंने बताया कि जो कोई गवाह बीमारी अथवा बुजुर्ग होने के कारण न्यायालय तक नहीं आ सकते हैं, वह इस वाहन के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने के बाद जिला जज के निर्देश पर उक्त वाहन संबंधित गवाह के पास भेजे जाएंगे, जहां से गवाह वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में गवाही दे सकेंगे।
उन्होंने बताया कि सचल न्यायालय वैन चलाने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य है। इससे पहले मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति चौहान ने तेलंगाना में ‘वर्चुअल मोबाइल न्यायालय’ की सुविधा शुरू की थी।
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कहा कि पहले चरण में सचल न्यायालय वैन सुविधा का लाभ चंपावत, पिथौरागढ़, टिहरी, चमोली और उत्तरकाशी के लोगों को मिलेगा। योजना के प्रभारी उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार-कंप्यूटर अंबिका पंत ने भी इसे महत्वपूर्ण पहल बताया। इस अवसर पर महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अवतार सिंह रावत आदि मौजूद थे। संचालन रजिस्ट्रार प्रोटोकॉल अनिल भट्ट ने किया।
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इस मौके पर रजिस्ट्रार जनरल धनंजय चतुर्वेदी ने बताया कि सचल न्यायालय वैन इंटरनेट, कंप्यूटर, वेब कैमरा व सीसीटीवी समेत सभी जरूरी सुविधाओं से लैस है। उन्होंने बताया कि जो कोई गवाह बीमारी अथवा बुजुर्ग होने के कारण न्यायालय तक नहीं आ सकते हैं, वह इस वाहन के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने के बाद जिला जज के निर्देश पर उक्त वाहन संबंधित गवाह के पास भेजे जाएंगे, जहां से गवाह वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में गवाही दे सकेंगे।
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उन्होंने बताया कि सचल न्यायालय वैन चलाने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य है। इससे पहले मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति चौहान ने तेलंगाना में ‘वर्चुअल मोबाइल न्यायालय’ की सुविधा शुरू की थी।
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कहा कि पहले चरण में सचल न्यायालय वैन सुविधा का लाभ चंपावत, पिथौरागढ़, टिहरी, चमोली और उत्तरकाशी के लोगों को मिलेगा। योजना के प्रभारी उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार-कंप्यूटर अंबिका पंत ने भी इसे महत्वपूर्ण पहल बताया। इस अवसर पर महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अवतार सिंह रावत आदि मौजूद थे। संचालन रजिस्ट्रार प्रोटोकॉल अनिल भट्ट ने किया।