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10 सालों में जमीरा गांव नहीं पहुंचा कोई विधायक

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 02 Feb 2022 11:36 PM IST
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MLA Not Went to Jamira Village Nainital
जमीरा गांव की फोटो। - फोटो : NAINITAL
संदीप कुमार
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नैनीताल। ग्रामीणों के सुख-दुख की खोज खबर कौन ले हमारे जनप्रतिनिधि तो ऐसे हैं जो नैनीताल से 14 किलोमीटर दूर जमीरा गांव में वोट मांगने के लिए भी नहीं जाते हैं। जमीरा गांव से वोट नहीं मिल रहा है तो उनकी मूलभूत समस्याओं को भी दूर नहीं कराया। गांव के लोग सड़क के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन और दूरसंचार जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं।
जमीरा गांव में 36 परिवार रहते हैं और खेती पर निर्भर हैं। चुनाव से पहले नेता और उनके समर्थक गांव-गांव जाकर वोट मांगते हैं मगर जमीरा गांव कोई नेता नहीं जाता है। गांव के लोग वर्ष 2003 से लगातार क्षेत्र में सड़क की मांग कर रहे हैं। आज तक गांव में सड़क नहीं पहुंची है। ग्रामीण बताते हैं कि वर्ष 2002 में जीत के बाद डॉ. नारायण सिंह जंतवाल जमीरा पहुंचे थे। उसके बाद वर्ष 2007 में जीत के बाद खड़क सिंह बोरा भी क्षेत्र में पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनी थीं। उसके बाद से कोई नेता जमीरा में गांव न तो वोट मांगने पहुंचा और न ही ग्रामीणों की सुध ली। बीते दस साल में सरिता आर्या और संजीव आर्य दोनों एक-एक बार विधायक रहे लेकिन दोनों न तो वोट मांगने आए और न ही कभी समस्या सुनने।
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सड़क न होने के कारण कर रहे पलायन
नैनीताल। देवीधूरा ग्राम पंचायत के जमीरा तोक में लगभग 36 परिवार रहते हैं। जो पूर्ण रूप से सब्जी का कारोबार करते हैं। उनको पीठ या घोड़े पर सब्जी लादकर चार किलोमीटर की दूर तय कर हल्द्वानी नैनीताल राष्ट्रीय राजमार्ग तक लानी पड़ती है। कई वर्षों से लोग क्षेत्र में मोटर मार्ग की मांग कर रहे हैं। लेकिन अब तक सड़क नहीं बन पाई है। सड़क न होने के कारण दर्जनों लोग शहरों में बस चुके हैं। ग्रामीणों ने गांव से पलायन के लिए जन प्रतिनिधियों को जिम्मेदार ठहराया।
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बीमारों को डोली का सहारा
नैनीताल। जमीरा गांव का रास्ता ठीक नहीं है साथ ही चढ़ाई होने के कारण बीमारों को अस्पताल तक ले जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मरीज को चार किमी डोली से ले जाना पड़ता है। वहीं बरसात के दिनों में दिक्कत और बढ़ जाती है।
- गांव में खेती का रोजगार होने के बावजूद भी सड़क न होने से हल्द्वानी में रहकर प्राइवेट नौकरी करनी पड़ रही है। क्योंकि खेतों में पैदा सब्जी कंधों पर लादकर चार किमी पैदल चलकर अब नहीं ले जाई जाती। नेता वादे करते रह गए हैं लेकिन अब तक सड़क नहीं बन पाई। विपिन बिष्ट, स्थानीय निवासी
2003 से लगातार विधायकों और जिला प्रशासन से सड़क की मांग की है। अब उम्र ज्यादा होने के कारण गांव में आवाजाही नहीं कर सकता। इसलिए अब हल्द्वानी रहकर सड़क बनने की उम्मीद कर रह हैं। बीते दस सालों में कोई विधायक गांव तक नहीं पहुंच पाया। केशर सिंह रावत, स्थानीय निवासी
सड़क न होने की वजह से बरसात के समय ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है। गांव में पैदा की गई सब्जियां बाजार तक ले जाना मुश्किल हो जाता है। नेताओं को इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता। पंकज बिष्ट, स्थानीय निवासी

चुनाव आते ही नेताओं के समर्थक गांव तक पहुंचते हैं। उसके बाद कभी झांकने नहीं आते। नेता गांव तक पहुंचे तो उनको ग्रामीणों की समस्याओं का पता चले। नेताओं को वोट से मतलब है ग्रामीणों की समस्याओं से नहीं। चंद्रेश मेहता, स्थानीय निवासी
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