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एमबीपीजी के विद्यार्थी स्किल कोर्स में उत्तराखंड का इतिहास, वित्तीय साक्षरता और विश्लेषी रसायन पढेंगे
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हल्द्वानी। नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद शिक्षाप्रणाली में बदलाव आया है। इस बार तीन नई स्ट्रीम जोड़ी गई हैं। इनमें भाषा, कौशल विकास, सहगामी पाठ्यक्रम शामिल हैं। कुमाऊं विश्वविद्यालय की अकादमिक काउंसिल ने कौशल कोर्स में जिन पाठ्यक्रमों को स्वीकृति प्रदान की है उन्हें एमबीपीजी कॉलेज के सभी विभागाध्यक्षों और प्रवेश समिति ने लागू कर दिया है।
नई शिक्षा नीति प्रदेश के महाविद्यालयों में भी लागू हो गई है। कुमाऊं विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी महाविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को नए शिक्षा सत्र से लागू कर दिया गया है। एमबीपीजी कॉलेज के विद्यार्थी कौशल कोर्स के रूप में उत्तराखंड का इतिहास, वित्तीय साक्षरता और विश्लेषणात्मक रसायन पाठ्यक्रम पढ़ेंगे। प्रवेश के समय कौशल विकास कोर्सों के चुनाव का विकल्प नहीं था। अब बीए, बीएससी, बीकॉम प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थी अपने हिसाब से इन कोर्सों का चुनाव कर सकते हैं। ये कोर्स प्रथम सेमेस्टर में ही रहेंगे। दूसरे सेमेस्टर में विद्यार्थी नए कोर्सों का चुनाव करेंगे। इन कोर्सों के हर सेमेस्टर में क्रेडिट मिलेंगे।
कॉलेज प्रशासन ने स्ट्रीम को ध्यान में रखते हुए बीए में कौशल कोर्स के लिए उत्तराखंड का इतिहास, बीकॉम में वित्तीय साक्षरता और बीएससी के लिए एनालेटिकल केमिस्ट्री (विश्लेषणात्मक रसायन) के सिलेबस का चुनाव किया है। इसमें बाध्यता नहीं है। कला, विज्ञान, वाणिज्य संकाय के विद्यार्थी अपने हिसाब से कोर्स का चुनाव कर सकते हैं।
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इनसेट
कौशल विकास में ये हैं शामिल
वित्तीय साक्षरता (फाइनेंशियल लिट्रेसी) : वित्तीय साक्षरता व्यक्तिगत वित्तीय प्रबंधन, बजट और निवेश सहित विभिन्न वित्तीय कौशल को समझने और प्रभावी ढंग से उपयोग करने की क्षमता है। इसका अध्ययन कर विद्यार्थी वित्तीय प्रबंधन को समझेंगे।
विश्लेषी रसायन (एनालेटिकल केमिस्ट्री) : इसमें प्राकृतिक और कृत्रिम पदार्थों में विद्यमान रसायनिक घटकों का परिष्करण, पहचान, प्रमाणीकरण किया जाता है। ये दो तरह का होता है। इसमें गुणात्मक और मात्रात्मक विश्लेषण होता है।
उत्तराखंड का इतिहास : इसमें विद्यार्थी उत्तराखंड का इतिहास पढे़ंगे। आगे चलकर इससे वे पर्यटन आदि क्षेत्रों में रोजगार पा सकते हैं।
कोट
एनईपी के तहत महाविद्यालय में स्नातक प्रथम सेमेस्टर में तीन कौशल कोर्स शामिल किए गए हैं। इनमें उत्तराखंड का इतिहास, फाइनेंशियल लिट्रेसी और एनालेटिकल केमिस्ट्री शामिल हैं। छात्र-छात्राएं इन कौशल कोर्स का चुनाव अपने हिसाब से कर सकते हैं।
-डॉ. एनएस बनकोटी, प्राचार्य, एमबीपीजी कॉलेज, हल्द्वानी।
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नई शिक्षा नीति प्रदेश के महाविद्यालयों में भी लागू हो गई है। कुमाऊं विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी महाविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को नए शिक्षा सत्र से लागू कर दिया गया है। एमबीपीजी कॉलेज के विद्यार्थी कौशल कोर्स के रूप में उत्तराखंड का इतिहास, वित्तीय साक्षरता और विश्लेषणात्मक रसायन पाठ्यक्रम पढ़ेंगे। प्रवेश के समय कौशल विकास कोर्सों के चुनाव का विकल्प नहीं था। अब बीए, बीएससी, बीकॉम प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थी अपने हिसाब से इन कोर्सों का चुनाव कर सकते हैं। ये कोर्स प्रथम सेमेस्टर में ही रहेंगे। दूसरे सेमेस्टर में विद्यार्थी नए कोर्सों का चुनाव करेंगे। इन कोर्सों के हर सेमेस्टर में क्रेडिट मिलेंगे।
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कॉलेज प्रशासन ने स्ट्रीम को ध्यान में रखते हुए बीए में कौशल कोर्स के लिए उत्तराखंड का इतिहास, बीकॉम में वित्तीय साक्षरता और बीएससी के लिए एनालेटिकल केमिस्ट्री (विश्लेषणात्मक रसायन) के सिलेबस का चुनाव किया है। इसमें बाध्यता नहीं है। कला, विज्ञान, वाणिज्य संकाय के विद्यार्थी अपने हिसाब से कोर्स का चुनाव कर सकते हैं।
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कौशल विकास में ये हैं शामिल
वित्तीय साक्षरता (फाइनेंशियल लिट्रेसी) : वित्तीय साक्षरता व्यक्तिगत वित्तीय प्रबंधन, बजट और निवेश सहित विभिन्न वित्तीय कौशल को समझने और प्रभावी ढंग से उपयोग करने की क्षमता है। इसका अध्ययन कर विद्यार्थी वित्तीय प्रबंधन को समझेंगे।
विश्लेषी रसायन (एनालेटिकल केमिस्ट्री) : इसमें प्राकृतिक और कृत्रिम पदार्थों में विद्यमान रसायनिक घटकों का परिष्करण, पहचान, प्रमाणीकरण किया जाता है। ये दो तरह का होता है। इसमें गुणात्मक और मात्रात्मक विश्लेषण होता है।
उत्तराखंड का इतिहास : इसमें विद्यार्थी उत्तराखंड का इतिहास पढे़ंगे। आगे चलकर इससे वे पर्यटन आदि क्षेत्रों में रोजगार पा सकते हैं।
कोट
एनईपी के तहत महाविद्यालय में स्नातक प्रथम सेमेस्टर में तीन कौशल कोर्स शामिल किए गए हैं। इनमें उत्तराखंड का इतिहास, फाइनेंशियल लिट्रेसी और एनालेटिकल केमिस्ट्री शामिल हैं। छात्र-छात्राएं इन कौशल कोर्स का चुनाव अपने हिसाब से कर सकते हैं।
-डॉ. एनएस बनकोटी, प्राचार्य, एमबीपीजी कॉलेज, हल्द्वानी।