चुनाव 2024: उत्तराखंड में साल 2014 में 48,043 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया, 51 हजार को नहीं भाए थे प्रत्याशी
उत्तराखंड में पांच लोकसभा सीट पर 8321207 मतदाता हैं। 17वीं लोकसभा की बात करें तो प्रदेश के 50946 मतदाताओं को कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं आया था और इन लोगों ने नोटा का विकल्प चुना था।
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प्रदेश में पांच लोकसभा सीट पर 8321207 मतदाता हैं। इस चुनाव में ये सभी अपनी-अपनी रुचि, पसंद-नापसंदगी के आधार पर मतदान करेंगे। 17वीं लोकसभा की बात करें तो प्रदेश के 50946 मतदाताओं को कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं आया था और इन लोगों ने नोटा (इनमें से कोई नहीं) का विकल्प चुना था।
नोटा का सबसे अधिक इस्तेमाल अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ संसदीय सीट पर जबकि हरिद्वार सीट पर सबसे कम हुआ। चुनाव दर चुनाव नोटा का इस्तेमाल करने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है। वर्ष-2014 के लोकसभा चुनाव में अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ संसदीय सीट पर 15245 लोगों ने नोटा का इस्तेमाल किया था। इसी लोकसभा चुनाव में गढ़वाल संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से 8659, नैनीताल- ऊधम सिंह नगर सीट पर 10328, हरिद्वार संसदीय सीट पर 3049 और टिहरी- गढ़वाल संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में 10762 लोगों ने नोटा का इस्तेमाल किया। इस चुनाव में पांचों लोकसभा सीट पर 48,043 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना था।
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2019 में नोटा विकल्प चुनने वालों की संख्या और बढ़ी
वर्ष-2019 लोकसभा चुनाव में अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ संसदीय सीट पर नोटा इस्तेमाल करने वालों की संख्या बढ़ी। इस वर्ष चुनाव में 15505 लोगों ने नोटा का इस्तेमाल किया। इसी क्रम में गढ़वाल संसदीय सीट पर 12276 लोगों ने नोटा का विकल्प चुना। नैनीताल- ऊधम सिंह नगर संसदीय सीट पर 10608, हरिद्वार संसदीय सीट 6281, टिहरी- गढ़वाल संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में 6276 मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया। इस चुनाव में कुल 50,946 लोगों ने नोटा का इस्तेमाल किया। इस तरह पिछले चुनाव तुलना में 2903 अधिक मतदाताओं नोटा का इस्तेमाल किया है।
16वीं लोकसभा में मेघालय में 2.98% लोगों ने नोटा को चुना था
2014 लोकसभा चुनाव में उत्तर-पूर्व के राज्य मेघालय में करीब 30,145 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया था। ये राज्य में हुए कुल पोल का 2.98% था। दूसरे पायदान पर छत्तीसगढ़ जहां 1.94%, तीसरे नंबर पर गुजरात 1.94% फीसदी वोट नोटा को पड़े। बिहार में 1.63% (5,80,964 वोट), झारखंड में 1.56% (1,90,927), ओडिशा 1.55% (3,32,766), तमिलनाडु 1.44% (4,33), मिजोरम 1.49% (6,495), सिक्किम 1.40% (4,332), मध्य प्रदेश ,1.31% (3,91,837) वोट नोटा के तहत पड़े थे।
बिहार की जनता ने सबसे ज्यादा चुना था नोटा का विकल्प
2019 के लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा नोटा का विकल्प बिहार के लोगों ने चुनकर अपने उम्मीदवारों पर भरोसा नहीं जताया था। बिहार के 8.17 लाख मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया था। राजस्थान में नोटा में डाले गए मत भाकपा, माकपा और बसपा के उम्मीदवारों को मिले वोटों से ज्यादा रहे। 2019 में राजस्थान में 3,27,559 लोगों ने नोटा का बटन दबाया था। दिल्ली में नोटा का विकल्प चुनने वालों की संख्या 45000 रही।