Litchi Farming: बारिश ना होने से लीची का आकार हुआ छोटा, भीषण गर्मी में खट्टा हुआ स्वाद...बागवानों को नुकसान
भीषण गर्मी के चलते इन दिनों लीची की फसल को खासा नुकसान हो रहा है। मौसम में नमी नहीं होने से लीची के फलों में मिठास नहीं है। इस वजह से बागवानों की माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।
विस्तार
रामनगर की लीची देश में काफी पसंद की जाती है। यहां की लीची को लेने के लिए खरीददार पहले ही डेरा डाल लेते है। भीषण गर्मी और बारिश ना होने की वजह से इस बार लीची का आकार छोटा रह गया, जिससे लीची के उत्पादन में असर देखने को मिल रहा है। ऐसे में लीची कारोबारी को इस बार लीची का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है।
इन शहरों को जाती है रामनगर से लीची
रामनगर की लीची की मिठास को देखते हुए इसकी मांग काफी रहती है। चडीगढ़, दिल्ली, लखनऊ, मुरादाबाद, सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, बिजनौर, बरेली सहित आदि शहरों में लीची की सप्लाई की जाती है। लीची लेने के लिए आढ़ती रामनगर पहुंच चुके है, लेकिन लीची की फसल देखकर उचित दाम नहीं दे रहे है।
दस दिन लेट बाजार में आयी लीची
उद्यान प्रभारी अर्जुन सिंह परवाल ने बताया कि मौसम में आए बदलाव के चलते इस बार दस लेट लीची बाजार में आयी है। भीषण गर्मी और बारिश न होने लीची की फसल पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पाया है। इस कारण लीची का गुदा (पल्प) नहीं बना और आकार में छोटी हो गई है।
इन दामों पर मिल रही लीची
लीची के दामों की बात करें तो बगीचों से अच्छी लीची 150 रुपये किलो तक बिक रही है, जबकि औसत लीची 100 से 120 किलो बिक रही है। वहीं बाजारों की बात करें तो बाजार में अच्छी लीची 180 रुपये किलो मिल रही है। औसत लीची 140 से 150 किलो बिक रही है।
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