{"_id":"6309291e0bf98c71116869a6","slug":"life-imprisonment-for-three-in-murder-case-after-robbery-at-coaching-operator-s-house-haldwani-news-hld473643275","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोचिंग संचालक के घर डकैती के बाद हत्या मामले में तीन दोषियों को उम्रकैद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोचिंग संचालक के घर डकैती के बाद हत्या मामले में तीन दोषियों को उम्रकैद
विज्ञापन
मृतका राधा भट्ट की फाइल फोटो। अमर उजाला
हल्द्वानी। कोचिंग संचालक के घर में घुसकर लूट और हत्या की वारदात को अंजाम देने वाले तीन अभियुक्तों को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही तीनों पर एक-एक लाख रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया।
हल्द्वानी में रामपुर रोड स्थित बैड़ा पोखरा गांव निवासी भुवन चंद्र भट्ट के घर पर 7 जून 2018 की रात डकैतों ने धावा बोल दिया था। उस समय घर में भुवन और उनकी पत्नी राधा भट्ट सो रही थी। डकैतों ने हमलाकर उन्हें अचेत कर दिया। उसके बाद अलमारी में रखे जेवरात चोरी कर ले गए। घटना का खुलासा अगली सुबह किरायेदार के घर पहुंचने पर हुआ। तब तक राधा की मौत हो चुकी थी जबकि गंभीर रूप से घायल भुवन को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
हादसे के बाद छह महीने तक वह कोमा में रहे और आज भी एक हाथ से काम करने में असमर्थ हैं। मुकदमा दर्ज करने के कई दिन बाद तीन आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़े। कोर्ट में केस की सुनवाई शुरू हुई तो पीड़ित परिवार की ओर से न्याय के लिए लड़ रहे एडीजीसी गिरजा पांडे ने कोर्ट के सामने साक्ष्य प्रस्तुत किए। चार साल तक कोर्ट में मामला चलता रहा और तारीखें बढ़ती रहीं। शुक्रवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय नीलम रात्रा की कोर्ट ने आरोपी बचराम, खाबिद उर्फ लंबरदार और जैन हसन उर्फ इकराम को दोषी माना और सश्रम उम्रकैद और एक-एक लाख रुपये आर्थिक दंड की सजा सुनाई है।
विज्ञापन
उस रात नाना के घर थी बेटी
बातचीत के दौरान भुवन चंद्र भट्ट ने बताया कि उन दिनों पत्नी राधा की एमए योगा के अंतिम वर्ष की परीक्षाएं चल रही थीं। दो पेपर हो चुके थे। भुवन खुद भी महिला डिग्री कॉलेज के पास कोचिंग सेंटर चलाते थे। अक्सर खाना बाहर ही होता था। उस रात भी खाना खाकर घर पहुंचे थे। वहीं एक दिन पहले ही उनकी बेटी अनन्या की परीक्षाएं खत्म हुई थीं तो वह नाना के साथ उनके घर चली गई थी। उसकी किस्मत अच्छी थी अगर उस रात बेटी वहां होती तो शायद दुनिया ही खत्म हो जाती और मैं चाहकर भी नहीं जी पाता। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि पत्नी राधा की परीक्षा खत्म होने के बाद उन्होंने पिथौरागढ़ घूमने जाने का प्लान भी बनाया था।
नाना-नानी के दुलार में पल रही पिता की लाडली
जब राधा की हत्या की गई तब अनन्या की उम्र करीब सात साल थी। हादसे के बाद से नाना-नानी के लाड़-प्यार में पल रही अनन्या पिता से मिलने हर हफ्ते जाती है और पिता भी उसके पास जाते रहते हैं। अनन्या के नाना जगदीश चंद्र चौबे बताते हैं कि बेटी के जाने के बाद उन्होंने अनन्या को खुद से ज्यादा प्यार दिया ताकि उसे मां की कमी महसूस न हो। इकलौती बेटी की मौत के बाद अनन्या ही उनकी दुनिया बन गई है।
कोर्ट में 13 गवाह पेश किए और 28 बार हुए प्रदर्श
एडीजीसी गिरजा पांडे ने बताया कि मामले में सुनवाई शुरू होने के बाद से फैसला आने तक 13 लोगों की गवाही कराई गई थी। इसमें मामले के विवेचक, पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक, पंचनामा भरने वाले पुलिसकर्मी समेत अन्य लोग शामिल रहे। वहीं कोर्ट में दी गई सभी गवाहियों को 28 बार एग्जिक्यूट (प्रदर्श) कराया गया था।
चार थे शामिल, एक का आज भी कोई सुराग नहीं
एडीजीसी के मुताबिक वारादत में चार लोग शामिल थे। वारदात के कई दिनों बात पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ चार्जशीट फाइल की थी। साथ ही हत्या में इस्तेमाल हुआ हथियार भी बरामद कर लिया था। और उन्हीं तीनों को कोर्ट ने सजा भी सुना दी। हालांकि वारदात के चौथे आरोपी को पुलिस ढूंढ नहीं सकी और आज तक उसका कुछ पता नहीं है।
इनपुट के बदले थाना प्रभारी का दिया गया था ऑफर
वारदात के बाद शहर में दहशत का माहौल था। इधर पुलिस अपराधियों को पकड़ने में नाकाम साबित हो रही थी। रामपुर, बरेली समेत हल्द्वानी शहर छान मारा था। वारदात की रात ग्यारह बजे से एक बजकर चालीस मिनट के बीच पंचायत घर और उसके आसपास एक्टिव हजारों मोबाइल नंबर भी खंगाले गए लेकिन कोई सुराग हाथ नहीं लगे थे। सीसीटीवी से लेकर शहर का चप्पा छान मारा था लेकिन अपराधी पकड़ से कहीं बहुत दूर ही थे। आलम यह था कि जन्मेजय खंडूरी ने चौकी प्रभारियों से यह तक कह दिया कि जो चौकी प्रभारी ज्यादा और पक्का इनपुट देगा उसे थानाध्यक्ष की कुर्सी सौंप दी जाएगी।
रिश्तेदार की शादी के लिए लॉकर से निकाले थे जेवरात
भुवन चंद्र भट्ट ने बताया कि वारदात से करीब सात-आठ माह पहले उनकी साली की शादी थी। उसके लिए उन्होंने बैंक के लॉकर में रखे पत्नी के जेवरात निकाले थे लेकिन शादी के बाद उन्हें वापस बैंक में नहीं रखा था। उनका अंदेशा है कि कहीं भूलवश उनके या फिर उनकी पत्नी के जरिये घर में जेवरात होने की बात बाहर निकली और उसी की वजह से यह वारदात हुई। उनका कहना है कि घर में से केवल जेवरात ही चोरी हुए थे। हालांकि घटना के कुछ दिन बाद पुलिस ने कुछ जेवरात बरामद भी कर लिए थे। संवाद
विज्ञापन
हल्द्वानी में रामपुर रोड स्थित बैड़ा पोखरा गांव निवासी भुवन चंद्र भट्ट के घर पर 7 जून 2018 की रात डकैतों ने धावा बोल दिया था। उस समय घर में भुवन और उनकी पत्नी राधा भट्ट सो रही थी। डकैतों ने हमलाकर उन्हें अचेत कर दिया। उसके बाद अलमारी में रखे जेवरात चोरी कर ले गए। घटना का खुलासा अगली सुबह किरायेदार के घर पहुंचने पर हुआ। तब तक राधा की मौत हो चुकी थी जबकि गंभीर रूप से घायल भुवन को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
विज्ञापन
हादसे के बाद छह महीने तक वह कोमा में रहे और आज भी एक हाथ से काम करने में असमर्थ हैं। मुकदमा दर्ज करने के कई दिन बाद तीन आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़े। कोर्ट में केस की सुनवाई शुरू हुई तो पीड़ित परिवार की ओर से न्याय के लिए लड़ रहे एडीजीसी गिरजा पांडे ने कोर्ट के सामने साक्ष्य प्रस्तुत किए। चार साल तक कोर्ट में मामला चलता रहा और तारीखें बढ़ती रहीं। शुक्रवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय नीलम रात्रा की कोर्ट ने आरोपी बचराम, खाबिद उर्फ लंबरदार और जैन हसन उर्फ इकराम को दोषी माना और सश्रम उम्रकैद और एक-एक लाख रुपये आर्थिक दंड की सजा सुनाई है।
विज्ञापन
उस रात नाना के घर थी बेटी
बातचीत के दौरान भुवन चंद्र भट्ट ने बताया कि उन दिनों पत्नी राधा की एमए योगा के अंतिम वर्ष की परीक्षाएं चल रही थीं। दो पेपर हो चुके थे। भुवन खुद भी महिला डिग्री कॉलेज के पास कोचिंग सेंटर चलाते थे। अक्सर खाना बाहर ही होता था। उस रात भी खाना खाकर घर पहुंचे थे। वहीं एक दिन पहले ही उनकी बेटी अनन्या की परीक्षाएं खत्म हुई थीं तो वह नाना के साथ उनके घर चली गई थी। उसकी किस्मत अच्छी थी अगर उस रात बेटी वहां होती तो शायद दुनिया ही खत्म हो जाती और मैं चाहकर भी नहीं जी पाता। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि पत्नी राधा की परीक्षा खत्म होने के बाद उन्होंने पिथौरागढ़ घूमने जाने का प्लान भी बनाया था।
नाना-नानी के दुलार में पल रही पिता की लाडली
जब राधा की हत्या की गई तब अनन्या की उम्र करीब सात साल थी। हादसे के बाद से नाना-नानी के लाड़-प्यार में पल रही अनन्या पिता से मिलने हर हफ्ते जाती है और पिता भी उसके पास जाते रहते हैं। अनन्या के नाना जगदीश चंद्र चौबे बताते हैं कि बेटी के जाने के बाद उन्होंने अनन्या को खुद से ज्यादा प्यार दिया ताकि उसे मां की कमी महसूस न हो। इकलौती बेटी की मौत के बाद अनन्या ही उनकी दुनिया बन गई है।
कोर्ट में 13 गवाह पेश किए और 28 बार हुए प्रदर्श
एडीजीसी गिरजा पांडे ने बताया कि मामले में सुनवाई शुरू होने के बाद से फैसला आने तक 13 लोगों की गवाही कराई गई थी। इसमें मामले के विवेचक, पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक, पंचनामा भरने वाले पुलिसकर्मी समेत अन्य लोग शामिल रहे। वहीं कोर्ट में दी गई सभी गवाहियों को 28 बार एग्जिक्यूट (प्रदर्श) कराया गया था।
चार थे शामिल, एक का आज भी कोई सुराग नहीं
एडीजीसी के मुताबिक वारादत में चार लोग शामिल थे। वारदात के कई दिनों बात पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ चार्जशीट फाइल की थी। साथ ही हत्या में इस्तेमाल हुआ हथियार भी बरामद कर लिया था। और उन्हीं तीनों को कोर्ट ने सजा भी सुना दी। हालांकि वारदात के चौथे आरोपी को पुलिस ढूंढ नहीं सकी और आज तक उसका कुछ पता नहीं है।
इनपुट के बदले थाना प्रभारी का दिया गया था ऑफर
वारदात के बाद शहर में दहशत का माहौल था। इधर पुलिस अपराधियों को पकड़ने में नाकाम साबित हो रही थी। रामपुर, बरेली समेत हल्द्वानी शहर छान मारा था। वारदात की रात ग्यारह बजे से एक बजकर चालीस मिनट के बीच पंचायत घर और उसके आसपास एक्टिव हजारों मोबाइल नंबर भी खंगाले गए लेकिन कोई सुराग हाथ नहीं लगे थे। सीसीटीवी से लेकर शहर का चप्पा छान मारा था लेकिन अपराधी पकड़ से कहीं बहुत दूर ही थे। आलम यह था कि जन्मेजय खंडूरी ने चौकी प्रभारियों से यह तक कह दिया कि जो चौकी प्रभारी ज्यादा और पक्का इनपुट देगा उसे थानाध्यक्ष की कुर्सी सौंप दी जाएगी।
रिश्तेदार की शादी के लिए लॉकर से निकाले थे जेवरात
भुवन चंद्र भट्ट ने बताया कि वारदात से करीब सात-आठ माह पहले उनकी साली की शादी थी। उसके लिए उन्होंने बैंक के लॉकर में रखे पत्नी के जेवरात निकाले थे लेकिन शादी के बाद उन्हें वापस बैंक में नहीं रखा था। उनका अंदेशा है कि कहीं भूलवश उनके या फिर उनकी पत्नी के जरिये घर में जेवरात होने की बात बाहर निकली और उसी की वजह से यह वारदात हुई। उनका कहना है कि घर में से केवल जेवरात ही चोरी हुए थे। हालांकि घटना के कुछ दिन बाद पुलिस ने कुछ जेवरात बरामद भी कर लिए थे। संवाद

मृतका राधा भट्ट के पति भुवन चंद्र भट्ट। अमर उजाला