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पत्नी और बेटे की हत्या में पति को उम्रकैद, 2015 में पतलिया गांव में हुई थी वारदात

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 24 Jul 2021 11:03 PM IST
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Life imprisonment for husband for killing wife and son, incident happened in Patalia village in 2015
नैनीताल। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश प्रीतू शर्मा की अदालत ने पत्नी और बेटे की हत्या का आरोप सिद्ध होने पर शनिवार को नैनीताल जिले के पतलिया गांव निवासी आरोपी केशवदत्त को आजीवन कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर केशवदत्त को एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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बता दें कि 20 जुलाई को न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से बताया गया था कि 11 जून 2021 को डालकन्या (ओखलकांडा) निवासी हरीश चंद्र पुत्र हरिदत्त ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें कहा था कि चार साल पहले उन्होंने अपनी बेटी भावना की शादी केशव दत्त मेलकानी निवासी ग्राम पतलिया नैनीताल से की थी। आरोप था कि शादी के बाद से ही केशव दत्त भावना को दहेज के लिए प्रताड़ित करता रहा। दहेज न देने की स्थिति में दूसरे विवाह की भी धमकी देता था। एक बार दोनों पक्षों के बीच राजीनामा भी हुआ लेकिन बात नहीं बनी। 19 दिसंबर 2015 को दहेज के लिए केशव दत्त ने अपनी पत्नी और दुधमुंहे बेटे को खाने में जहर देकर उनकी हत्या कर दी।
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इस मामले में केशव दत्त के अलावा सास लीलावती, ननद पुष्पा देवी पत्नी राजू सनवाल को भी नामजद किया गया था। 20 जुलाई को अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने अपने तर्कों को
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साबित करने के लिए नौ गवाह अदालत में पेश किए थे। इसके बाद प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ने केशवदत्त को पत्नी भावना और डेढ़ वर्षीय पुत्र खिलेश कुमार की हत्या का दोषी पाते हुए सजा के लिए शनिवार का दिन तय किया था।

जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि शनिवार को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश प्रीतू शर्मा ने पत्नी व बेटे की हत्या के मामले में केशवदत्त को धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर एक साल के अतिरिक्त कारावास होगा। धारा 498 ए में तीन साल का साधारण कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा चार दहेज प्रतिषेध अधिनियम में दो वर्ष के साधारण कारावास और दो हजार रुपये अर्थदंड व अर्थदंड न देने पर एक माह के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई।
न्यायालय ने अपने आदेश में साफ किया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी और दोष सिद्ध के द्वारा कारागार में व्यतीत अवधि उक्त सजा में समायोजित की जाएगी।
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