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जिले में सीएचसी और पीएचसी स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 06 Apr 2022 11:18 PM IST
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Less medical Facility in Rural Nainital
नैनीताल। कोरोना काल के बाद हल्द्वानी और नैनीताल में भले ही स्वास्थ्य सेवाओं में थोड़ा बहुत सुधार हुआ है लेकिन जिले के दूरदराज के क्षेत्रों में सीएचसी और पीएचसी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं अब भी बदहाल हैं। कहीं विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है तो कहीं एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसे संसाधन नहीं हैं। मरीजों की सामान्य जांचें भी नहीं होती हैं। पर्वतीय इलाकों के मरीजों को आज भी इलाज के लिए हल्द्वानी, नैनीताल, बरेली अथवा दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
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नैनीताल जिले में 15 पीएचसी और 8 सीएचसी हैं। इनमें मरीजों के लिए कुल 1949 बेड उपलब्ध हैं। कोरोना काल के बाद नैनीताल के बीडी पांडे अस्पताल में न केवल संसाधन बढ़े हैं लेकिन आज तक सीटी स्कैन मशीन नहीं लगाई गई है। ओखलकांडा, भीमताल और भवाली के सीएचसी में अल्ट्रासाउंड और एंबुलेंस की सुविधा नहीं हैं। ओखलकांडा सीएचसी में पीएचसी की भी सुविधाएं नहीं हैं। ज्योलीकोट में पीएचसी है लेकिन डाक्टर और संसाधन नहीं हैं।
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भीमताल स्थित सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ, सर्जन, फिजिशियन, नेत्र रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट और पैथोलॉजिस्ट नहीं हैं। भवाली स्थित सीएचसी में स्टाफ नर्सों के दस पद सृजित हैं जिसमें से सात पद वर्षों से रिक्त हैं। चिकित्सकों के स्वीकृत दस में से स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, पैथोलॉजिस्ट व फिजिशियन तैनात नहीं हैं। डॉक्टरों और सुविधाओं के अभाव में ओखलकांडा, बेतालघाट, गरमपानी, धारी आदि क्षेत्रों से मरीज इलाज के लिए नैनीताल, हल्द्वानी, बरेली अथवा दिल्ली तक जाते हैं। 9 लाख 54 हजार 605 आबादी वाले नैनीताल जिले में रह रहे लोगों की सेहत का पूरा दारोमदार हल्द्वानी, बरेली व दिल्ली के अस्पतालों पर ही निर्भर है।
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सीएचसी और पीएचसी स्तर पर मरीजों के बेहतर इलाज के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने के लिए शासन और स्वास्थ्य निदेशालय से पत्राचार किया गया है। चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों को प्रत्येक मरीज का इलाज करने और दवाएं अस्पताल से ही देने के निर्देश दिए गए हैं। संसाधनों के लिए बजट मिलते ही अस्पतालों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
- धीराज सिंह गर्ब्याल जिलाधिकारी नैनीताल।
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