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पहले तेंदुए से और फिर सिस्टम से जूझे वन कर्मी
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हल्द्वानी। धनपुरी में चले रेस्क्यू ऑपरेशन में वन दरोगा विपिन पलड़िया और वन आरक्षी हरेंद्र कुमार घायल हो गए थे। घायल होने के बाद उपचार के लिए दोनों वन कर्मी सुशीला तिवारी अस्पताल में पहुंचे।
उनका आरोप है कि पहले उपचार करने में आनाकानी की गई। बाद में जब उन्होंने नाराजगी दिखाई तो दर्द निवारक दवा, टिटनेस के इंजेक्शन आदि लगाए गए। बाद में स्वास्थ्य कर्मियों ने रेबीज के इंजेक्शन को बाहर की दवा की दुकान से लाने के लिए कहा। उपचार मिलने में आ रही दिक्कत का मामला मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी के पास पहुंचा। उन्होंने तत्काल वन कर्मियों के इलाज से जुड़ी सारी व्यवस्था कराने के निर्देश दिए, इसके बाद उनका उपचार शुरू हो सका।
वन कर्मियों की आपबीती : मुश्किल से बची जान
हल्द्वानी। वन दरोगा विपिन पलड़िया बताते हैं कि पांडेनवाड़ स्थित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के एक भवन में तेंदुए के घुसने के सूचना के बाद दो अप्रैल की शाम से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया था। तब से वह वही पर ड्यूटी पर हैं।
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सोमवार सुबह तेंदुए के धनपुरी इलाके में होने की जानकारी मिली। इसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। वह हाका लगा रहे थे, तभी अचानक तेंदुए ने उन पर हमला कर दिया। तेंदुआ करीब चार साल का रहा होगा। वह गर्दन को अपनी चपेट में लेना चाहता था, मैंने उसे डंडे से हटाने की कोशिश की थी, तो उसने पैर समेत शरीर में कई जगह दांत गड़ा दिए। बड़ी मुश्किल से उसने छोड़ा था।
वन आरक्षी हरेंद्र कुमार तेंदुए का जाल से पकड़ने वाले अभियान में शामिल थे। तभी अचानक तेंदुए ने हमला कर दिया। उनके सीने पर पंजा मारा और हाथ पर दांत गड़ा दिए, जिससे गहरा जख्म हो गया। बाद में दोनों वन कर्मियों को इलाज के लिए एसटीएच लाया गया। वन कर्मियों ने बताया कि तेंदुए के हमले में एक अन्य ग्रामीण भी घायल हो गया था।
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उनका आरोप है कि पहले उपचार करने में आनाकानी की गई। बाद में जब उन्होंने नाराजगी दिखाई तो दर्द निवारक दवा, टिटनेस के इंजेक्शन आदि लगाए गए। बाद में स्वास्थ्य कर्मियों ने रेबीज के इंजेक्शन को बाहर की दवा की दुकान से लाने के लिए कहा। उपचार मिलने में आ रही दिक्कत का मामला मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी के पास पहुंचा। उन्होंने तत्काल वन कर्मियों के इलाज से जुड़ी सारी व्यवस्था कराने के निर्देश दिए, इसके बाद उनका उपचार शुरू हो सका।
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वन कर्मियों की आपबीती : मुश्किल से बची जान
हल्द्वानी। वन दरोगा विपिन पलड़िया बताते हैं कि पांडेनवाड़ स्थित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के एक भवन में तेंदुए के घुसने के सूचना के बाद दो अप्रैल की शाम से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया था। तब से वह वही पर ड्यूटी पर हैं।
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सोमवार सुबह तेंदुए के धनपुरी इलाके में होने की जानकारी मिली। इसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। वह हाका लगा रहे थे, तभी अचानक तेंदुए ने उन पर हमला कर दिया। तेंदुआ करीब चार साल का रहा होगा। वह गर्दन को अपनी चपेट में लेना चाहता था, मैंने उसे डंडे से हटाने की कोशिश की थी, तो उसने पैर समेत शरीर में कई जगह दांत गड़ा दिए। बड़ी मुश्किल से उसने छोड़ा था।
वन आरक्षी हरेंद्र कुमार तेंदुए का जाल से पकड़ने वाले अभियान में शामिल थे। तभी अचानक तेंदुए ने हमला कर दिया। उनके सीने पर पंजा मारा और हाथ पर दांत गड़ा दिए, जिससे गहरा जख्म हो गया। बाद में दोनों वन कर्मियों को इलाज के लिए एसटीएच लाया गया। वन कर्मियों ने बताया कि तेंदुए के हमले में एक अन्य ग्रामीण भी घायल हो गया था।