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ऐसा अपराध: लक्ष्मी पर सौतेली बेटी की गला घोंटकर हत्या का आरोप, अब जेल में दिया बच्ची को जन्म; जानें पूरा मामला

Thu, 14 Aug 2025 04:16 PM IST
हीरा मेहरा दीप बेलवाल, अमर उजाला
दीप बेलवाल, अमर उजाला Published by: हीरा मेहरा Updated Thu, 14 Aug 2025 04:16 PM IST
सार

18 अप्रैल 2024 को मोनू प्रजापति ने थाने में अपनी बेटी सोनी की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। जांच के बाद पुलिस ने मासूम की हत्या के आरोप में उसकी सौतेली मां लक्ष्मी को गिरफ्तार कर जेल भेजा। गिरफ्तारी के समय लक्ष्मी गर्भवती थी। उसने जेल में बेटी को जन्म दिया।

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Lakshmi is accused of strangling her stepdaughter to death in kashipur
जेल में बंद (सांकेतिक तस्वीर)

विस्तार

बच्चे का जन्म हर घर की चौखट पर उत्सव की दस्तक देता है। चारों ओर खुशियां और बधाइयों का तांता लगता है लेकिन 10 माह की जाह्नवी को ये सब नसीब नहीं हुआ। जेल की गिनती, पहरेदारों की सीटी और कैदियों की आहट ही उसकी लोरी बन गई है। सौतेली बेटी की हत्या के आरोप में जेल पहुंची लक्ष्मी के अपराध की परछाई उसके अपने कलेजे के टुकड़े पर इस कदर पड़ी कि उसका बचपन अंधकार में चला गया है।

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बीते साल 18 अप्रैल को खड़कपुर देवीपुरा निवासी मोनू प्रजापति ने काशीपुर के आईटीआई थाने में अपनी बेटी सोनी की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। जांच के बाद पुलिस ने सोनी की हत्या के आरोप में उसकी सौतेली मां लक्ष्मी को गिरफ्तार किया। कोर्ट के आदेश पर उसे हल्द्वानी जेल भेजा गया। गिरफ्तारी के समय लक्ष्मी गर्भवती थी। बीती छह दिसंबर को उसने जेल में बेटी जाह्नवी को जन्म दिया।
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तब से वह सलाखों के पीछे ही है। मां की करनी की सजा अब अबोध बच्ची को भी भुगतनी पड़ रही है। जेल के अंदर बच्ची के हक की खुशियां भी कैद हो गई हैं। उसे पिता का दुलार भी नसीब नहीं हो पाया है। बेटी के जन्म को 10 माह से अधिक समय हो गया है लेकिन आज तक लक्ष्मी को पैरोल तक नहीं मिल पाई है।
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पिता-पुत्री का प्यार गुजरा नागवारा
पुलिस पूछताछ में लक्ष्मी ने बताया था कि उसके पति मोनू का अपनी बेटी सोनी से बेहद लगाव था जो उसे बर्दाश्त नहीं हुआ। उसने सोनी को रास्ते से हटाने के लिए उसकी हत्या कर दी। जांच में पता चला कि उसने क्रूरता की हदें पार कर बेटी के हाथ-पैरों को रस्सी से बांधा और फिर ऊपर से खौलता हुआ गर्म पानी डाल दिया। इसके बाद गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी।

प्रसव के दौरान परिजन नहीं आए
लक्ष्मी को प्रसव पीड़ा होने पर जेल प्रशासन उसे सुशीला तिवारी अस्पताल ले गया। उन्होंने उसके घर वालों को भी सूचना दी। इसके बावजूद कोई भी परिजन नहीं आया। लक्ष्मी की बिगड़ती हालत को देख जेल प्रशासन ही उसका परिवार बनकर खड़ा हुआ और ऑपरेशन के लिए जरूरी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। लक्ष्मी की बेटी के साथ जेल में दो अन्य बच्चे कृष्णा और अमान भी हैं। तीनों मिलकर खेलते हैं।


लक्ष्मी जेल में विचाराधीन बंदी है। जेल प्रशासन उसकी बच्ची का पूरा ख्याल रखता है। उसे रोजाना तीन समय दूध और पौष्टिक आहार दिया जाता है। समय-समय पर बच्ची को टीके भी लगवाए जाते हैं। मां और बच्ची को कोई परेशानी नहीं है। - प्रमोद पांडेय, जेल अधीक्षक

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