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Nainital News: हल्द्वानी में बनेगा कुमाऊं का वन्यजीव रेस्क्यू का कमांड कंट्रोल सेंटर
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तराई केंद्रीय वन प्रभाग के तिकोनिया स्थित परिसर में तैयार होता कुमाऊँ का वन्य जीव रेस्क्यू का क
विजेंद्र श्रीवास्तव
हल्द्वानी। मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए तराई केंद्रीय वन प्रभाग के हल्द्वानी परिसर में रेस्क्यू का कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाया जाएगा। यह सेंटर मंडल स्तर का होगा जिसमें कुमाऊं में होने वाली मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं का डेटा संग्रहित होगा। इसमें पशु चिकित्सकों की टीम तैनात करने के साथ रेस्क्यू के संसाधन भी रखे जाएंगे।
कुमाऊं में वर्ष 2018-19 से अब तक पांच साल में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में 206 लोगों की मौत हुई और 458 लोग घायल हुए थे। मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए कई कोशिश की गई है। अभी तक कुमाऊं में वन विभाग के पास मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर कोई एकीकृत्र इकाई नहीं है, सामान्य तौर पर जिस डिवीजन में घटना होती है, उसी डिवीजन में कार्रवाई होती है। अब कुमाऊं में इसके अलावा एक एकीकृत इकाई बनाने का फैसला किया गया है, इसके तहत तराई केंद्रीय वन प्रभाग के तिकोनिया स्थित परिसर में वाइल्ड लाइफ का रेस्क्यू कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाया जाएगा।
अलग से तैनात होगा स्टाफ
हल्द्वानी। मुख्य वन संरक्षक प्रसन्न पात्रो कहते हैं कि इस सेंटर में कुमाऊं मंडल में घटनाओं का डेटा बैंक होगा। इसके अलावा जो भी घटनाएं होंगी, उसका विवरण दर्ज किया जाएगा। एक अक्तूबर से यहां रेस्क्यू के सभी उपकरण, ड्रोन रखने के साथ एक खास प्रशिक्षित टीम होगी जिसमें पशु चिकित्सक, वन्यजीव विशेषज्ञ शामिल होंगे जो संबंधित डिवीजन में आवश्यकतानुसार भेजे जाएंगे। इस सेंटर में घटनाओं के कारण जानने के लिए अध्ययन भी किया जाएगा। अलग से स्टाफ तैनात किया जाएगा। इस सेंटर को गौला कार्पस से तैयार करने का काम शुरू किया गया है, अक्तूबर तक सेंटर तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
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हल्द्वानी। मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए तराई केंद्रीय वन प्रभाग के हल्द्वानी परिसर में रेस्क्यू का कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाया जाएगा। यह सेंटर मंडल स्तर का होगा जिसमें कुमाऊं में होने वाली मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं का डेटा संग्रहित होगा। इसमें पशु चिकित्सकों की टीम तैनात करने के साथ रेस्क्यू के संसाधन भी रखे जाएंगे।
कुमाऊं में वर्ष 2018-19 से अब तक पांच साल में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में 206 लोगों की मौत हुई और 458 लोग घायल हुए थे। मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए कई कोशिश की गई है। अभी तक कुमाऊं में वन विभाग के पास मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर कोई एकीकृत्र इकाई नहीं है, सामान्य तौर पर जिस डिवीजन में घटना होती है, उसी डिवीजन में कार्रवाई होती है। अब कुमाऊं में इसके अलावा एक एकीकृत इकाई बनाने का फैसला किया गया है, इसके तहत तराई केंद्रीय वन प्रभाग के तिकोनिया स्थित परिसर में वाइल्ड लाइफ का रेस्क्यू कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाया जाएगा।
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अलग से तैनात होगा स्टाफ
हल्द्वानी। मुख्य वन संरक्षक प्रसन्न पात्रो कहते हैं कि इस सेंटर में कुमाऊं मंडल में घटनाओं का डेटा बैंक होगा। इसके अलावा जो भी घटनाएं होंगी, उसका विवरण दर्ज किया जाएगा। एक अक्तूबर से यहां रेस्क्यू के सभी उपकरण, ड्रोन रखने के साथ एक खास प्रशिक्षित टीम होगी जिसमें पशु चिकित्सक, वन्यजीव विशेषज्ञ शामिल होंगे जो संबंधित डिवीजन में आवश्यकतानुसार भेजे जाएंगे। इस सेंटर में घटनाओं के कारण जानने के लिए अध्ययन भी किया जाएगा। अलग से स्टाफ तैनात किया जाएगा। इस सेंटर को गौला कार्पस से तैयार करने का काम शुरू किया गया है, अक्तूबर तक सेंटर तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
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