{"_id":"5d39a66f8ebc3e6c9a25ce6b","slug":"kargil-war-can-be-end-10-days-before-haldwani-news-hld350254735","type":"story","status":"publish","title_hn":"पाकिस्तान ने वादा खिलाफी नहीं की होती तो कारगिल युद्ध दस दिन पहले ही खत्म हो जाता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पाकिस्तान ने वादा खिलाफी नहीं की होती तो कारगिल युद्ध दस दिन पहले ही खत्म हो जाता
विज्ञापन
फोटो-रिटायर्ड ले.ज.एमसी भंडारी।
- फोटो : ALMORA
चौखुटिया। (अल्मोड़ा)। पाकिस्तान के साथ हुए कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन विजय को लीड करने वाली टीम के मुख्य सदस्य सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल एमसी भंडारी ने कहा कि यदि पाकिस्तान ने वादा खिलाफी नहीं की होती तो कारगिल युद्ध दस दिन पहले ही खत्म हो जाता। उन्होंने कहा कि विश्व के इतिहास में भारतीय सेना ही एकमात्र ऐसी सेना है जिसने अपनी बहादुरी से 18 हजार फुट की ऊंचाई में डेरा जमाए दुश्मन को देश की सेना ने करारा जवाब देकर भागने को मजबूर कर दिया।
कारगिल युद्ध के बीस साल पूरे होने के मौके पर अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि 3 मई 1999 को हमारे चरवाहों के माध्यम से हमें पाकिस्तान के मंसूबों का पता चला था। चरवाहों से मिली सूचना के बाद ही पता चला कि पाकिस्तानी सेना 5 से 7 किलोमीटर तक अंदर घुस आई है। असल में प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी मैत्री बस में बैठकर पाक पीएम नवाज शरीफ से मिलने लाहौर गए थे।
उनके लौटने के बाद वहां के सेना प्रमुख मुशर्रफ ने नई चाल चलते हुए बॉर्डर रेखा से लगे द्रास, मस्को कारगिल और बाटालिक में अपनी हलचल बढ़ा दी थी। संबंधित क्षेत्रों में पाक सेना की संख्या पांच सौ से भी अधिक पहुंच गई पहले मुशर्रफ ने उन्हें अपनी सेना मानने से इंकार कर दिया था। बाद में सब कुछ सामने आ गया।
विज्ञापन
भंडारी ने बताया कि भारतीय सेना ने 13 जून 1999 को टोलोलिंग और चार जुलाई को टाइगर हिल पर कब्जा कर लिया था। हमारी तरफ से युद्ध विराम की एकतरफा घोषणा की गई। फिर पीएम बाजपेयी के निर्देश पर वह 11 जुलाई 1999 को भारत के तत्कालीन डीजीएमओ जनरल निर्मल विज के साथ हेलीकॉप्टर से अटारी बोर्डर पर गए, जहां पाकिस्तान के डीजीएमओ तौरिक जिया से बातचीत हुई।
हमने उनसे पाक सेना को 72 घंटे में बॉर्डर लाइन से हटाने के लिए कहा। परंतु धोखेबाज पाक ने वादा खिलाफी करते हुए सैनिकों को नहीं हटाया जिसके चलते आपरेशन विजय में और पंद्रह दिन लग गए। पाक को पूरी तरह से खदेड़ने के बाद 25 को युद्ध विराम की घोषणा हुई। उसके अगले दिन 26 जुलाई को विजयी दिवस मनाया गया।
विज्ञापन
कारगिल युद्ध के बीस साल पूरे होने के मौके पर अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि 3 मई 1999 को हमारे चरवाहों के माध्यम से हमें पाकिस्तान के मंसूबों का पता चला था। चरवाहों से मिली सूचना के बाद ही पता चला कि पाकिस्तानी सेना 5 से 7 किलोमीटर तक अंदर घुस आई है। असल में प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी मैत्री बस में बैठकर पाक पीएम नवाज शरीफ से मिलने लाहौर गए थे।
विज्ञापन
उनके लौटने के बाद वहां के सेना प्रमुख मुशर्रफ ने नई चाल चलते हुए बॉर्डर रेखा से लगे द्रास, मस्को कारगिल और बाटालिक में अपनी हलचल बढ़ा दी थी। संबंधित क्षेत्रों में पाक सेना की संख्या पांच सौ से भी अधिक पहुंच गई पहले मुशर्रफ ने उन्हें अपनी सेना मानने से इंकार कर दिया था। बाद में सब कुछ सामने आ गया।
विज्ञापन
भंडारी ने बताया कि भारतीय सेना ने 13 जून 1999 को टोलोलिंग और चार जुलाई को टाइगर हिल पर कब्जा कर लिया था। हमारी तरफ से युद्ध विराम की एकतरफा घोषणा की गई। फिर पीएम बाजपेयी के निर्देश पर वह 11 जुलाई 1999 को भारत के तत्कालीन डीजीएमओ जनरल निर्मल विज के साथ हेलीकॉप्टर से अटारी बोर्डर पर गए, जहां पाकिस्तान के डीजीएमओ तौरिक जिया से बातचीत हुई।
हमने उनसे पाक सेना को 72 घंटे में बॉर्डर लाइन से हटाने के लिए कहा। परंतु धोखेबाज पाक ने वादा खिलाफी करते हुए सैनिकों को नहीं हटाया जिसके चलते आपरेशन विजय में और पंद्रह दिन लग गए। पाक को पूरी तरह से खदेड़ने के बाद 25 को युद्ध विराम की घोषणा हुई। उसके अगले दिन 26 जुलाई को विजयी दिवस मनाया गया।