{"_id":"62bcade2232aff14337ff813","slug":"jade-murder-convict-who-came-out-on-parole-from-aravati-jail-escaped-from-haldwani-haldwani-news-hld4674952116","type":"story","status":"publish","title_hn":"अरावती जेल से पैरोल पर बाहर आया जेडे हत्याकांड का सजायाफ्ता कैदी हल्द्वानी से हुआ फरार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अरावती जेल से पैरोल पर बाहर आया जेडे हत्याकांड का सजायाफ्ता कैदी हल्द्वानी से हुआ फरार
विज्ञापन
हल्द्वानी। मुंबई के चर्चित जेडे हत्याकांड में रिवाल्वर मुहैया कराने वाला दीपक सिसोदिया एक जनवरी को अमरावती जेल से पैरोल पर छूटा था। उसके बाद वह फरार हो गया। तय तारीख पर जेल में आमद न कराने पर महाराष्ट्र पुलिस ने निकटतम थाने में एफआईआर दर्ज करा दी थी। पैरोल में हल्द्वानी का जिक्र होने के चलते घटनास्थल यहां का माना जा रहा है। इसकी वजह से मुंबई पुलिस ने हल्द्वानी में दीपक सिसोदिया के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
11 जून 2011 को मुंबई में एक समाचार पत्र के पत्रकार जेडे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। क्राइम ब्रांच ने जब मामले से जुड़े आरोपियों की गिरफ्तारी की तो उनमें एक नाम हल्द्वानी के जीतपुर नेगी निवासी दीपक सिसोदिया का भी सामने आया था। छोटा राजन ने हत्या की जिम्मेदारी ली थी। दीपक सिसोदिया ने हत्याकांड के शूटर सतीश कालिया उर्फ लंबू उर्फ मोहम्मद आरिफ शेख को रिवाल्वर और कारतूस मुहैया कराए थे। मामले में मुंबई कोर्ट ने मकोका समेत धारा 3(2), 3(4), 120 बी, 302, 149, 34, 143, 147, 148 के तहत दीपक सिसोदिया को उम्रकैद की सजा और 10 लाख के आर्थिक जुर्माने की सजा सुनाई थी। महाराष्ट्र की अरावती जेल में दीपक सजा काट रहा था। एक जनवरी 2022 को दीपक ने 45 दिन की पैरोल ली थी जिसके बाद उसे 8 मार्च 2022 को वापस अरावती जेल में आमद करानी थी लेकिन वह नहीं पहुंचा। इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस ने निकटम थाने में जीरो एफाईआर दर्ज कराई थी। चूंकि पैरोल लेने के लिए कैदी को बताना पड़ता है कि वह इस दौरान कहां और किस काम से रहेगा। इस वजह से मुंबई पुलिस ने पीएचक्यू के आदेश से हल्द्वानी में घटना स्थल मानते हुए कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
शराब तस्करी से लेकर अंडर्वल्ड तक दीपक रहा शामिल
दीपक सिसोदिया पहले शराब तस्करी के मामलों में संलिप्त रहा लेकिन वर्चस्व की लड़ाई हारने के बाद अंडरवर्ल्ड डॉल छोटा राजन के सहयोगी रहे प्रकाश पांडे उर्फ पीपी के संपर्क में आ गया। हालांकि साल 2000 में पीपी ने जब खुद का गैंग खड़ा किया तो दीपक सिसोदिया ने पीपी से दूरी बनाते हुए छोटा राजन गैंग में पैंठ बनानी शुरू कर दी थी। इसके बाद छोटा राजन गैंग को हथियार भी मुहैया कराता था।
विज्ञापन
20 जुलाई को गिरफ्तारी, 21 को ट्रांजिट रिमांड
20 जुलाई 2011 को मुंबई क्राइम ब्रांच, एसओजी और एसटीएफ की टीम ने दीपक सिसोदिया को गौला बाईपास से गिरफ्तार किया था। उस समय दीपक एक स्कॉर्पियो गाड़ी में था। गिरफ्तारी के अगले दिन 21 जुलाई 2011 को हल्द्वानी कोर्ट से मुंबई क्राइम ब्रांच ने दीपक को ट्रांजिट रिमांड पर लिया था और लेकर मुंबई चली गई थी।
--वर्जन--
अमरावती जेल से पैरोल पर छूटकर फरार हुए दीपक सिसोदिया के खिलाफ धारा 224 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच और कैदी की गिरफ्तारी के लिए एक टीम का गठन भी कर दिया है। वहीं टीम गंभीरता से तलाश में जुट गई है।
-हरबंस सिंह, एसपी सिटी, हल्द्वानी
विज्ञापन
11 जून 2011 को मुंबई में एक समाचार पत्र के पत्रकार जेडे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। क्राइम ब्रांच ने जब मामले से जुड़े आरोपियों की गिरफ्तारी की तो उनमें एक नाम हल्द्वानी के जीतपुर नेगी निवासी दीपक सिसोदिया का भी सामने आया था। छोटा राजन ने हत्या की जिम्मेदारी ली थी। दीपक सिसोदिया ने हत्याकांड के शूटर सतीश कालिया उर्फ लंबू उर्फ मोहम्मद आरिफ शेख को रिवाल्वर और कारतूस मुहैया कराए थे। मामले में मुंबई कोर्ट ने मकोका समेत धारा 3(2), 3(4), 120 बी, 302, 149, 34, 143, 147, 148 के तहत दीपक सिसोदिया को उम्रकैद की सजा और 10 लाख के आर्थिक जुर्माने की सजा सुनाई थी। महाराष्ट्र की अरावती जेल में दीपक सजा काट रहा था। एक जनवरी 2022 को दीपक ने 45 दिन की पैरोल ली थी जिसके बाद उसे 8 मार्च 2022 को वापस अरावती जेल में आमद करानी थी लेकिन वह नहीं पहुंचा। इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस ने निकटम थाने में जीरो एफाईआर दर्ज कराई थी। चूंकि पैरोल लेने के लिए कैदी को बताना पड़ता है कि वह इस दौरान कहां और किस काम से रहेगा। इस वजह से मुंबई पुलिस ने पीएचक्यू के आदेश से हल्द्वानी में घटना स्थल मानते हुए कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
विज्ञापन
शराब तस्करी से लेकर अंडर्वल्ड तक दीपक रहा शामिल
दीपक सिसोदिया पहले शराब तस्करी के मामलों में संलिप्त रहा लेकिन वर्चस्व की लड़ाई हारने के बाद अंडरवर्ल्ड डॉल छोटा राजन के सहयोगी रहे प्रकाश पांडे उर्फ पीपी के संपर्क में आ गया। हालांकि साल 2000 में पीपी ने जब खुद का गैंग खड़ा किया तो दीपक सिसोदिया ने पीपी से दूरी बनाते हुए छोटा राजन गैंग में पैंठ बनानी शुरू कर दी थी। इसके बाद छोटा राजन गैंग को हथियार भी मुहैया कराता था।
विज्ञापन
20 जुलाई को गिरफ्तारी, 21 को ट्रांजिट रिमांड
20 जुलाई 2011 को मुंबई क्राइम ब्रांच, एसओजी और एसटीएफ की टीम ने दीपक सिसोदिया को गौला बाईपास से गिरफ्तार किया था। उस समय दीपक एक स्कॉर्पियो गाड़ी में था। गिरफ्तारी के अगले दिन 21 जुलाई 2011 को हल्द्वानी कोर्ट से मुंबई क्राइम ब्रांच ने दीपक को ट्रांजिट रिमांड पर लिया था और लेकर मुंबई चली गई थी।
--वर्जन--
अमरावती जेल से पैरोल पर छूटकर फरार हुए दीपक सिसोदिया के खिलाफ धारा 224 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच और कैदी की गिरफ्तारी के लिए एक टीम का गठन भी कर दिया है। वहीं टीम गंभीरता से तलाश में जुट गई है।
-हरबंस सिंह, एसपी सिटी, हल्द्वानी