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इस मानसून में गौला पुल का सुरक्षात्मक कार्य होना मुश्किल
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हल्द्वानी, गौलापुल अमर उजाला
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हल्द्वानी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से गौला पुल बचाने के लिए अभी तक 23 करोड़ रुपये नहीं मिल पाए हैं। इस कारण मानसून से पहले गौला पुल का सुरक्षा कार्य नहीं हो पाएगा। मानसून के बाद ही गौला पुल को बचाने के सुरक्षात्मक कार्य होने की उम्मीद है। उधर एनएचएआई के अधिकारी दो माह में बजट मिलने की उम्मीद जता रहे हैं।
पिछले साल आई बाढ़ के कारण गौलापुल की एप्रोच रोड बह गई थी। साथ ही पुल को भी खतरा पैदा हो गया था। पुल की एप्रोच रोड बहने के कारण गौलापार जाने वाले लोगों को काठगोदाम से होकर आना-जाना पड़ रहा था। एनएचएआई ने इसके बाद एप्रोच रोड को सही कर किसी तरह सड़क को सुचारु किया। इसके बाद एनएचएआई ने गौला पुल, एप्रोच रोड को बचाने के लिए आईआईटी रुड़की की टीम को बुलाया था। आईआईटी रुड़की ने पुल और एप्रोच रोड को बचाने के लिए गौला नदी में खनन पूर्ण बंद करने को कहा था। एनएचएआई ने यह प्रस्ताव जिलाधिकारी को भिजवाया लेकिन वहां से कोई उत्तर नहीं मिला।
इसके बाद एनएचएआई ने आईआईटी रुड़की से पुल बचाने के लिए दूसरा प्लान मांगा। उस प्लान में अब एनएचएआई काम कर रहा है और लोनिवि को कार्यदायी संस्था बनाया गया। लोनिवि ने इसके लिए 23 करोड़ रुपये की विस्तृत डीपीआर एनएचएआई को भेजी। एनएचएआई ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को डीपीआर भेज बजट मांगा था। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर योगेंद्र शर्मा ने बताया कि अभी बजट नहीं मिला है। एक-दो माह में बजट मिल सकता है। उधर लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अशोक चौधरी ने बताया कि बजट मिल भी गया तो इस मानसून सीजन में काम होना मुश्किल है। पिछले साल की तरह इस बार भी गौला में पानी आया तो गौलापुल को खतरा हो सकता है।
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पिछले साल आई बाढ़ के कारण गौलापुल की एप्रोच रोड बह गई थी। साथ ही पुल को भी खतरा पैदा हो गया था। पुल की एप्रोच रोड बहने के कारण गौलापार जाने वाले लोगों को काठगोदाम से होकर आना-जाना पड़ रहा था। एनएचएआई ने इसके बाद एप्रोच रोड को सही कर किसी तरह सड़क को सुचारु किया। इसके बाद एनएचएआई ने गौला पुल, एप्रोच रोड को बचाने के लिए आईआईटी रुड़की की टीम को बुलाया था। आईआईटी रुड़की ने पुल और एप्रोच रोड को बचाने के लिए गौला नदी में खनन पूर्ण बंद करने को कहा था। एनएचएआई ने यह प्रस्ताव जिलाधिकारी को भिजवाया लेकिन वहां से कोई उत्तर नहीं मिला।
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इसके बाद एनएचएआई ने आईआईटी रुड़की से पुल बचाने के लिए दूसरा प्लान मांगा। उस प्लान में अब एनएचएआई काम कर रहा है और लोनिवि को कार्यदायी संस्था बनाया गया। लोनिवि ने इसके लिए 23 करोड़ रुपये की विस्तृत डीपीआर एनएचएआई को भेजी। एनएचएआई ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को डीपीआर भेज बजट मांगा था। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर योगेंद्र शर्मा ने बताया कि अभी बजट नहीं मिला है। एक-दो माह में बजट मिल सकता है। उधर लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अशोक चौधरी ने बताया कि बजट मिल भी गया तो इस मानसून सीजन में काम होना मुश्किल है। पिछले साल की तरह इस बार भी गौला में पानी आया तो गौलापुल को खतरा हो सकता है।
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