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राज्य सरकार को हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश
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प्रतीकात्मक फोटो।
नैनीताल। 2012 में पारित सरकारी और पट्टे की भूमि पर मालिकाना हक के शासनादेश को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए है। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
मामले के अनुसार देहरादून निवासी सुरभि सक्सेना ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार ने 2012 के बाद कई सारे शासनादेश जारी किए। इसमेेें एक शासनादेश के तहत सरकारी भूमि पर कब्जाधारियों सहित किराएदारों को काबिज पट्टे की भूमि को मालिकाना हक के तहत खेती करने और रहने के लिए दिया था।
बाद में सरकार ने न्यूनतम मूल्य पर भूमि उन्हें हस्तांतरित कर दी। याचिका में कहा गया कि मालिकाना हक के तहत मिली भूमि को भूमिधरियों द्वारा कई गुना ऊचे दामों में बेचा जा रहा है। याचिकाकर्ता ने राज्य में सभी तरह की भूमि हस्तांतरण पर रोक लगाने की मांग की थी। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
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मामले के अनुसार देहरादून निवासी सुरभि सक्सेना ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार ने 2012 के बाद कई सारे शासनादेश जारी किए। इसमेेें एक शासनादेश के तहत सरकारी भूमि पर कब्जाधारियों सहित किराएदारों को काबिज पट्टे की भूमि को मालिकाना हक के तहत खेती करने और रहने के लिए दिया था।
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बाद में सरकार ने न्यूनतम मूल्य पर भूमि उन्हें हस्तांतरित कर दी। याचिका में कहा गया कि मालिकाना हक के तहत मिली भूमि को भूमिधरियों द्वारा कई गुना ऊचे दामों में बेचा जा रहा है। याचिकाकर्ता ने राज्य में सभी तरह की भूमि हस्तांतरण पर रोक लगाने की मांग की थी। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
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