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मासूम की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Tue, 16 Feb 2016 01:43 AM IST
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सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती आठ वर्षीय मासूम की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि कीड़े की दवा खाने के बाद मासूम की तबियत बिगड़ी और इलाज के दौरान मौत हुई है। जबकि एसटीएच के डाक्टरों का कहना है कि मासूम में निमोनिया और दिमागी बुखार के लक्षण थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ड्रग रिएक्शन के संकेत नहीं मिले हैं।
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रमेशरपुर किच्छा निवासी रामपाल रिक्शा चलाता है और उसकी चार बेटियां हैं। छोटी बेटी सलोनी प्राइमरी पाठशाला में कक्षा दो की छात्रा थी। रामपाल का कहना था कि 10 फरवरी को स्कूल में दवा मिली थी। एक दवा (टैबलेट) स्कूल में खा ली थी और घर पर कितनी खाई इसकी जानकारी नहीं है।
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बेटी ने बताया था कि दवा मीठी है। सलोनी की तबियत 13 फरवरी को शाम सात बजे बिगड़नी शुरू हुई। उल्टी होने के बाद लालपुर के अस्पताल ले गए जहां से जिला अस्पताल ऊधमसिंह नगर भेज दिया गया।
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जिला अस्पताल में सलोनी को दो इंजेक्शन देकर सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर कर दिया। सुशीला तिवारी अस्पताल में शनिवार की देर रात सलोनी को भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान सोमवार की सुबह सलोनी की मौत हो गई। परिजनों का आरोप था कि कीड़े की दवा अधिक खिलाने के कारण ही उसकी मौत हुई है।
जबकि बाल रोग विभाग के एचओडी डा. अजय आर्या ने बताया कि बच्ची में दिमागी बुखार के लक्षण थे। उसे दौरे आने के कारण जिला अस्पताल से दो इंजेक्शन देकर भेजा गया था। हालत अधिक नाजुक होने के कारण रीढ़ की हड्डी के पानी की जांच नहीं हो सकी।
एसटीएच के एमएस डा. एके पांडेय ने बताया कि बच्ची में निमोनिया के लक्षण भी थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दवा के रिएक्शन की बात सामने नहीं आई है। दौरे आने के कारण फेफड़ों में पानी भर गया होगा और पलमोनरी सिस्टम फेल होने के कारण मौत हुई होगी। उन्होंने बताया कि बिसरा केमिकल जांच के लिए देहरादून भेजा गया है।