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महंगाई बढ़ गई पर नहीं बढ़ी एमडीएम की राशि

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 25 May 2022 12:15 AM IST
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Inflation increased but the amount of MDM did not increase
हल्द्वानी। सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) का नाम बदलकर प्रधानमंत्री पोषण योजना कर दिया गया, लेकिन लगातार बढ़ती महंगाई में बच्चों को पोषण युक्त भोजन कराना विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। प्राइमरी स्तर पर प्रति छात्र महज 4.97 रुपये और जूनियर में 7.45 रुपये मिलते हैं। इसमें प्रतिवर्ष 7.5 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान है, लेकिन वर्ष 2020 के बाद इसमें कोई इजाफा नहीं किया गया है।
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स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को मध्याह्न भोजन दिया जाता है। स्कूलों को निर्धारित मानकों के अनुरूप एमडीएम के तहत राशि खर्च करनी होती है। यदि स्कूूलों के पास एमडीएम की अतिरिक्त जमा पूंजी है तो भी वह इसका इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। बच्चों को मिलने वाली राशि के आधार पर उन्हें मासिक खर्च करना होता है, जिसमें उन्हें दिन के भोजन के लिए चावल, दाल, सब्जी, तेल, ईधन आदि की व्यवस्था करनी पड़ती है। इतनी कम राशि में बच्चों के लिए सभी चीजें उपलब्ध कराना स्कूलों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। नतीजन बच्चों को एमडीएम में वे पोषक आहार नहीं मिल पा रहे हैं, जिस उद्देश्य को लेकर योजना की शुरूआत की गई थी। बताया जा रहा है कि स्कूलों में मध्याह्न भोजन के लिए कोई मेन्यू निर्धारित नहीं है। स्कूल अपनी सुविधानुसार हर दिन का भोजन तैयार कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए जो राशि दी जाती है, उसमें हर दिन का मेन्यू एक जैसा ही रहता है। दाल, चावल के बाद कम ही मौकों पर बच्चों की थाली में कोई तीसरी चीज मिलती है।
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इनसेट
एमडीएम का नहीं आया बजट
नए वित्तीय वर्ष में एमडीएम का बजट अब तक नहीं आ पाया है। स्कूलों के पास बचे बजट से मध्याह्न भोजन की व्यवस्था की जा रही है। पिछले वर्ष एमडीएम के लिए 19 करोड़ का बजट मिला था। इस वर्ष का बजट अभी नहीं आया है।
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इनसेट
जिले में 58 हजार 673 विद्यार्थियों को मिलता है एमडीएम का लाभ
जिले में कक्षा एक से आठ तक के 58 हजार 673 छात्र-छात्राओं को मध्यान्ह भोजन का लाभ मिलता है। प्राइमरी मेें 33105 और जूनियर के 25568 बच्चों को एमडीएम दिया जाता है। मध्यान्ह भोजन के लिए मिलने वाली राशि कम होने से इन बच्चों के भोजन में पोषक आहार की कमी रह जा रही है। थाली में दाल, चावल के अलावा कोई तीसरी चीज नहीं मिल रही हैं। सब्जी, सलाद, अंडे जैसे पोषक आहार भी थाली से गायब हैं, लेकिन सरकार का इस ओर ध्यान नहीं है।
इनसेट
पांच रुपये में पौषक आहार ढूंढना बना चुनौती
एमडीएम या पीएम पोषण योजना के तहत छात्र-छात्राओं को पोषक आहार के लिए प्रति सप्ताह अलग से पांच रुपये दिए जाते हैं। हालांकि बढ़ती महंगाई के बीच पांच रुपये का पोषक आहार खोजना स्कूलों के लिए चुनौती बना हुआ है। सर्दियों में एक अंडे की कीमत आठ से दस रुपये तक पहुंच जाती है। यहां सरकार इन बच्चों को पोषक आहार के लिए एक सप्ताह में पांच रुपये दे रही है। ऐसे में एमडीएम के तहत पांच रुपये का पोषक आहार कैसे संभव हो सकता है।

कोट
वर्ष 2020 के बाद एमडीएम के तहत मिलने वाली राशि में बढ़ोतरी नहीं हुई है। इस वर्ष का बजट अभी मिला नहीं है। एमडीएम में प्राइमरी के बच्चों को 4.97 रुपये और जूनियर में 7.45 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भोजन के लिए दिए जाते हैं। पोषक आहार के लिए अलग से सप्ताह में एक बार पांच रुपये दिए जाते हैं। बजट के अनुरूप स्कूल एमडीएम की व्यवस्था करते हैं।
-बंशीधर कांडपाल, जिला प्रभारी एमडीएम।
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