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Nainital News: मॉलरोड की मॉनीटरिंग करेंगे इनक्लाइनोमीटर

Sat, 24 Jan 2026 01:26 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Updated Sat, 24 Jan 2026 01:26 AM IST
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Inclinometers will be used to monitor Mall Road.
नैनीताल। पर्यटन विभाग दफ्तर के ठीक नीचे 2018 में क्षतिग्रस्त लोअर मॉल रोड के आसपास इनक्लाइनोमीटर लगाने की कवायद की जा रही है। मॉल रोड के ऊपर, नीचे दोनों तरफ इस यंत्र से झुकाव का आंकलन कर भविष्य में सुरक्षा उपाय किए जा सकेंगे।
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बता दें कि मॉल रोड का पर्यटन विभाग के नीचे तथा इससे ऊपर का क्षेत्र पूर्व से ही संवेदनशील रहा है। भू-वैज्ञानिकों की ओर से पूर्व में भी बलियानाला के साथ ही इसकी संवेदनशीलता को लेकर चेताया गया था। यहां लोअर मालरोड के संबंधित क्षेत्र में टेढ़े हो चुके स्ट्रीट लाइट के पुराने पोल, आंशिक झुके पिलर इसके प्रमाण हैं। लोअर मॉलरोड में पूर्व से ही प्रभावित क्षेत्र में दरारें आती रहीं और लोनिवि की ओर से उन्हें भरा जाता रहा। वर्ष 2018 में 25 मीटर का बड़ा हिस्सा झील में गिर गया। अस्थाई सुरक्षा इंतजाम के बाद एक माह बाद मार्ग यातायात के लिए खोला गया। 2025 में इसके समीप लगभग उतना ही बड़ा हिस्सा झील की ओर झुक गया। इधर लोनिवि की ओर से 3.5 करोेड़ रुपये की लागत से ड्रिलिंग व सीसी भरान के साथ सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं।
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इधर सिंचाई विभाग की ओर से यहां हो रहे झुकाव के नियमित आंकलन के लिए इनक्लाइनोमीटर लगाए जाने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्र में पांच से छह स्थानों पर रॉक आदि का आंकलन करते हुए लगभग 20 मीटर तक ड्रिलिंग कर इनक्लाइनोमीटर लगाया जाना है।
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लोअर मॉलरोड का प्रभावित क्षेत्र तथा उसके ऊपर का क्षेत्र सॉलिड रॉक न होकर पूर्व में आए भू-स्खलन से जमा हुआ मलबा आदि है। ब्रिटिशर्स भी इसे जानते थे तथा भू-वैज्ञानिकों की रिपोर्ट्स में भी इसका हवाला है। इनक्लाइनोमीटर के लिए पूर्व में मैंने भी सुझाया था। लोअर मॉल में हो रहे सुरक्षा उपाय सराहनीय पहल हैं, लेकिन ऊपरी क्षेत्र के ड्रेनेज सिस्टम को ठीक करने के साथ ही अनावश्यक भार पर रोक लगानी होगी। - प्रो. चारू चंद्र पंत, भू वैज्ञानिक।


विभाग की ओर से बलियानाले की तर्ज पर लोेअर मॉलरोड के प्रभावित क्षेत्र में इनक्लाइनोमीटर लगाने की दिशा में कवायद की जा रही है। यहां पांच से छह स्थानों पर इन्हें लगाया जाएगा जिससे भविष्य में झुकाव आदि पर सुरक्षा इंतजाम किए जा सकें। - डीके सिंह, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग।
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