पंचायत चुनाव: लक्ष्य से महज कुछ वोटों की दूरी दे गई पांच साल का लंबा फासला, 13-18 वोट से हारने का भी गम उजागर
पंचायत चुनाव की मतगणना में प्रधान पद पर रोचक आंकड़े सामने आ रहे हैं। सीटें ऐसी भी हैं जहां जीत के अंतर से ज्यादा निरस्त मत हैं। कहीं 13 वोट से हार हुई तो कहीं 18 से।
विस्तार
पंचायत चुनाव की मतगणना में प्रधान पद पर रोचक आंकड़े सामने आ रहे हैं। सीटें ऐसी भी हैं जहां जीत के अंतर से ज्यादा निरस्त मत हैं। इतना नहीं कुछ सीटें ऐसी भी हैं, जिसने रोचक मुकाबला दिखा दिया। कहीं 13 वोट से हार हुई तो कहीं 18 से। इन सीटों से हारने वालों को अगले पांच साल तक मलाल रहेगा कि ..काश थाेड़ा जोर और लगा देते...।
प्रधान पद की मतगणना में कमलुआगांजा ग्राम के मतों की गणना हुई तो विजेता प्रत्याशी की जीत का अंतर 393 रहा और यहां 120 मत खारिज हो गए थे। चौसला ग्राम पंचायत में जीत का अंतर 18 मत था तो 13 यहां निरस्त हुए थे। रामड़ी आनसिंह में जीत का अंतर 78 मत रहा और निरस्त हुए थे 151 मत। यहां हारने वाले प्रत्याशी को निरस्त मतों का मलाल कई साल तक रहने वाला है।
देवला मल्ला ग्राम पंचायत में जीत का अंतर 26 रहा तो यहां इससे तीन गुना से अधिक 97 मत निरस्त हो गए। कुछ सीटें ऐसी भी हैं जहां जीत का अंतर 50 से कम है। इसमें गुजरौड़ा में 43, जयपुर पाडली में 21 जबकि करायल चतुर सिंह में हार का अंतर 30 मत का रहा। कुछ सीटें ऐसी भी रहीं जहां प्रत्याशियों ने बड़े मार्जिन से जीत दर्ज की। इसमें पनियाली सीट पर जीते प्रत्याशी ने 742 मतों के विशाल अंतर से जीत दर्ज की। देवला तल्ला में जीते प्रत्याशी ने 533 मत, बच्ची नगर में अंतर 577 मत का रहा। घूनी नंबर एक से 594, रामपुर लामाचौड़ में 726 और देवलचौड़ बंदोबस्ती में जीत का अंतर 406 मतों का रहा।
जीत हार की समीक्षा में बीती पूरी रात
ग्राम पंचायतों में जीत-हार की समीक्षा में सबकी रात बीत गई। जीत का जश्न कहीं मना तो कहीं हार के गम के बीच हार का मूल्यांकन भी होने लगा। सबसे ज्यादा चर्चा उन सीटों पर हुई जहां जीत के अंदर से ज्यादा निरस्त मत थे। लोगों का कहना है कि यहां के हारे प्रत्याशी के पास सुकून के दो शब्द होंगे ये खारिज मत मेरे हैं....हाल फिलहाल जो जीता उसके सिर अगले पांच साल तक गांव के विकास का भार, वहीं जो हारा उसके पास अगले पांच साल तक अगली चुनावी परीक्षा की तैयारी का समय।