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यूपी के तीन जिले उत्तराखंड में मिलें तो राज्य होगा आत्मनिर्भर
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vikas
नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केएस राना का मानना है कि यदि उत्तर प्रदेश के तीन जिलों को उत्तराखंड में शामिल कर दिया जाए तो इससे उत्तराखंड राज्य न केवल उत्पादकता के क्षेत्र में अव्वल होगा बल्कि राज्य आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में भी आगे बढ़ेगा। इस संबंध में कुलपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भी भेजा है।
प्रधानमंत्री मोदी को भेजे पत्र में कुलपति राना ने कहा कि वर्ष 2000 में उत्तराखंड अलग राज्य बना था, लेकिन तब से लेकर आज तक यह राज्य अपने आप में अपूर्ण है। यहां रोजगार और कृषि क्षेत्र के अभाव में पलायन लगातार बढ़ रहा है।
राना ने सुझाव दिया कि यदि पीलीभीत, सहारनपुर और बिजनौर को यूपी से अलग कर उत्तराखंड में शामिल कर दिया जाए तो इससे उत्तराखंड में उत्पादकता बढ़ेगी और आत्मनिर्भरता आएगी। पीएम मोदी को भेजे पत्र में दिल्ली प्रदेश के पुनर्गठन के संबंध में भी सुझाव दिया है। कहा कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग काफी पुरानी है। सुझाव दिया है कि नई दिल्ली को केंद्र शासित रख कर पश्चिम यूपी के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को दिल्ली में मिला दिया जाए। बुंदेलखंड एवं पूर्वांचल को अलग राज्य बनाते हुए एक की राजधानी ग्वालियर और दूसरे की वाराणसी बनाई जाए।
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प्रधानमंत्री मोदी को भेजे पत्र में कुलपति राना ने कहा कि वर्ष 2000 में उत्तराखंड अलग राज्य बना था, लेकिन तब से लेकर आज तक यह राज्य अपने आप में अपूर्ण है। यहां रोजगार और कृषि क्षेत्र के अभाव में पलायन लगातार बढ़ रहा है।
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राना ने सुझाव दिया कि यदि पीलीभीत, सहारनपुर और बिजनौर को यूपी से अलग कर उत्तराखंड में शामिल कर दिया जाए तो इससे उत्तराखंड में उत्पादकता बढ़ेगी और आत्मनिर्भरता आएगी। पीएम मोदी को भेजे पत्र में दिल्ली प्रदेश के पुनर्गठन के संबंध में भी सुझाव दिया है। कहा कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग काफी पुरानी है। सुझाव दिया है कि नई दिल्ली को केंद्र शासित रख कर पश्चिम यूपी के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को दिल्ली में मिला दिया जाए। बुंदेलखंड एवं पूर्वांचल को अलग राज्य बनाते हुए एक की राजधानी ग्वालियर और दूसरे की वाराणसी बनाई जाए।
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