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Nainital News: कहीं ख्वाब ही न बन जाए सुर्खाब का आना...

Thu, 30 Oct 2025 02:36 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Updated Thu, 30 Oct 2025 02:36 AM IST
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I hope Surkhab's arrival doesn't turn out to be a dream...
फोटो 29 अक्तूबर 01- कोसी बैराज में मौजूद सुर्खाब। संवाद।
रामनगर। सुर्खाब के स्वच्छंद जोड़े इस बार कोसी बैराज से करीब-करीब नदराद हैं। जहां इस वक्त तक सैकड़ों मेहमान जोड़े नमूदार होकर इस जगह की खूबसूरती में चार चांद लगाते थे, वहीं अब बमुश्किल ढूंढने से इन जोड़ों के दीदार हो रहे हैं। वजह है प्रवासी पक्षियों को स्वच्छंद विचरण नहीं मिल पाना। सुर्खाब के साथ ही बैराज में विगत वर्षों की तुलना में इस बार अन्य पक्षी 70 फीसदी कम पहुंचे हैं। जानकारों को आशंका है कि कोसी बैराज पर वाहनों के शोर के साथ यहां स्थित कैंटीन में तेज ध्वनि व लाइटों के चलते प्रवासी पक्षी कहीं और ठौर तलाश चुके हों।
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उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी होने पर हर साल प्रवासी पक्षी हजारों किलोमीटर का सफर तय कर कोसी बैराज समेत अन्य जलाशयों में पहुंचते हैं। पक्षी सर्दियों में यहां के जलाशयों में स्वच्छंद विचरण करते हैं। गर्मियों की शुरुआत में पक्षी वापस उच्च हिमालयी क्षेत्रों की ओर लौट जाते हैं। पक्षी प्रेमियों का कहना है कि प्रवासी पक्षी शर्मीले मिजाज के होते हैं जो रात शांत वातारण में स्वच्छंद विचरण करते हैं। लेकिन कोसी बैराज पर वाहनों का शोर, तेज लाइट व कैंटीन में तेज ध्वनि से चलने वाले संगीत के चलते पक्षी बैराज में रहना पसंद नही कर रहे हैं। इससे पक्षी अन्य जलाशयों की ओर जा रहे हैं। इससे पक्षी प्रेमी काफी चिंतित हैं।
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ये आते हैं पक्षी-
पेंटेड स्टॉर्क, कॉमन मेर्गेंसर, नॉर्दर्न पिंटेल, गेड्वाल डक, सेंडपाइपर, ब्लैक बिंग्ड स्टिल्ट, सुर्खाब आदि।

कोसी बैराज बनने के बाद शुरू हुआ पक्षियों का आना
पक्षी प्रमियों के अनुसार साल 1972 में रामनगर में कोसी नदी पर बैराज बनकर तैयार हुआ था। इसके बाद से ही यहां प्रवासी पक्षियों का आना शुरू हुआ। एक सुरक्षित स्थान होने के चलते यहां साल दर साल प्रवासी पक्षियों की संख्या बढ़ी है। लेकिन इस साल कम हुई पक्षियों की संख्या ने पक्षी प्रेमियों को हैरत में डाल दिया है।
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