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मनरेगा के 85 मानदेय कर्मियों की सेवाएं समाप्त
ब्यूरो/अमर उजाला, भ्ाीमताल
Updated Sat, 25 Apr 2015 02:13 AM IST
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शासन ने महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में बीते कई वर्षों से मानदेय पर कार्य कर रहे उप कार्यक्रम प्रबंधक से लेकर ग्राम रोजगार सहायक तक सभी की सेवाएं समाप्त कर दी है। दो दिन पहले जारी हुए इस आदेश के बाद जिले में विभिन्न पदों पर कार्यरत 85 कर्मचारी एक झटके में बेरोजगार हो गए हैं, जिसके चलते उनके सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।
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देश में मनरेगा के शुरू होने के बाद ब्लाक स्तर पर कार्यों को गति देने के उद्देश्य से कंप्यूटर प्रोग्रामर, उप कार्यक्रम अधिकारी, कनिष्ठ अभियंता, कंप्यूटर आपरेटर और ग्राम रोजगार सेवकों की तैनाती मानदेय के आधार पर की गई थी। विभागीय सूत्रों के मुताबिक नैनीताल जिले के आठ विकास खंडों में वर्तमान में मनरेगा के तहत 85 कर्मचारी मानदेय पर कार्यरत थे, जिनके मानदेय का भुगतान जिला स्तर से योजनांतर्गत व्यय राशि के छह फीसदी प्रशासनिक मद से किया जाता था।
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22 अप्रैल को मनरेगा के जिला कार्यक्रम समन्वयक/जिलाधिकारी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि चूंकि दिनांक 1 अप्रैल 2015 से योजनांतर्गत ई-एफएमएस प्रक्रिया लागू होने से तैनात कर्मियों के मानदेय आदि का व्यय विकास खंडों द्वारा इस हेतु मात्राकृत राशि से किया जाना होगा। आदेश के मुताबिक अब 2 फीसदी ग्राम पंचायत स्तर पर, 0.5 फीसदी ग्राम पंचायत स्तर पर सामाजिक संप्रेक्षण संबंधी बैठकों के लिए तथा अधिकतम 2 प्रतिशत विकास खंड स्तर पर व्यय की सीमा को बनाए रखना होगा।
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जिला कार्यक्रम समन्वय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सचिव ग्राम्य विकास विभाग उत्तराखंड शासन के पत्रांक 743/148/एमजीएनआरई जीएस/2014-15 दिनांक 17 मार्च 2015 द्वारा दी गई व्यवस्था के परिपालन में महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत विकास खंड स्तर पर दैनिक मानदेय में कार्यरत उप कार्यक्रम अधिकारी, कनिष्ठ अभियंता, कंप्यूटर आपरेटर और ग्राम रोजगार सेवक की तैनाती 23 अप्रैल से समाप्त की जाती है। शासन के इस आदेश के बाद जिले के आठ विकास खंडों में तैनात 8 उप कार्यक्रम अधिकारी, 19 कनिष्ठ अभियंता, 8 कंप्यूटर आपरेटर और 50 ग्राम रोजगार सहायक बेरोजगार हो गए हैं।
...ताकि कामकाज प्रभावित न हो
नरेगा में मानदेय कर्मियों की सेवा समाप्त होने का असर विभागीय कामकाज पर पड़ना स्वाभाविक है लिहाजा आदेश में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2015-16 से कार्मिकों की तैनाती खंड विकास अधिकारी/कार्यक्रम अधिकारी करेंगे और वर्तमान में तैनात कर्मियों से ही जरूरत के मुताबिक कर्मचारी रखे जाएंगे। नया कर्मचारी नहीं रखा जाएगा। यह भी कहा गया है कि योजना मद में होने वाले व्यय के सापेक्ष अर्जित प्रशासनिक व्यय के आधार पर ही कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। कहा गया है कि यदि कोई खंड विकास अधिकारी शासन से निर्धारित मानदेय व्यय की सीमा से अधिक कार्मिकों की तैनाती करता है तो उन कर्मियों के मानदेय का भुगतान वह स्वयं व्यक्तिगत रूप से करेगा।
शासन ने 1 अप्रैल 2015 से ई-एफएमएस प्रक्रिया लागू की है, यानि कि अब मनरेगा में मिलने वाली राशि शासन से सीधे विकास खंडों को मिलेगी, न कि जिले को। बीडीओ ब्लाक को मानदेय मद में मिलने वाली राशि के आधार पर अनुभवी कर्मचारियों को फिर से मानदेय पर रख सकते हैं।
-दीपक रावत, जिलाधिकारी नैनीताल।