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Nainital News: हिंदूवादी नेता विपिन पांडे को कोर्ट से मिली जमानत
Sun, 23 Nov 2025 02:14 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Sun, 23 Nov 2025 02:14 AM IST
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हल्द्वानी। उजाला नगर के उजालेश्वर महादेव मंदिर के सामने गोवंश का अवशेष मिलने के बाद 16 नवंबर की रात हुए बवाल के बाद फेसबुक के जरिये विवादित टिप्पणी पर हिंदूवादी नेता विपिन पांडेय को शुक्रवार को कोर्ट से न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया था। शनिवार को कोर्ट ने पांडे की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पुलिस ने बिना नोटिस दिए ही गिरफ्तारी की थी।
16 नवंबर की शाम गोवंश के अवशेष मिलने पर उजाला नगर का माहौल बिगड़ गया था। इसी बीच फेसबुक पर कई मैसेज चले और इससे शहर का माहौल तनावपूर्ण हो गया था। भीड़ ने कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की थी। इस प्रकरण में पुलिस ने 40 से 50 अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद पुलिस ने कोतवाली के एसआई की तहरीर पर विपिन पांडे, यतिन पांडे और अतुल गुप्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। शनिवार को एसीजेएम कोर्ट में उनकी जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई। विपिन पांडे की तरफ से अधिवक्ताओं ने तर्क रखा कि धारा पांच साल से कम सजा वाली है। गिरफ्तारी से पहले पुलिस ने धारा 35 (3) का नोटिस भी नहीं दिया। पुलिस ने भारी फोर्स के साथ बड़े अपराधी की तरह गिरफ्तारी की। मुकदमा भी पुलिस की तरफ से ही दर्ज हुआ है। दूसरे पक्ष ने कहा कि आरोपी पर पूर्व में ऐसे ही प्रकरण में थानों में प्राथमिकी दर्ज है। बचाव पक्ष ने कहा कि वह मामले प्रमाणित नहीं हैं। दोनों पक्ष के तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने जमानत मंजूर कर ली।
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16 नवंबर की शाम गोवंश के अवशेष मिलने पर उजाला नगर का माहौल बिगड़ गया था। इसी बीच फेसबुक पर कई मैसेज चले और इससे शहर का माहौल तनावपूर्ण हो गया था। भीड़ ने कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की थी। इस प्रकरण में पुलिस ने 40 से 50 अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद पुलिस ने कोतवाली के एसआई की तहरीर पर विपिन पांडे, यतिन पांडे और अतुल गुप्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। शनिवार को एसीजेएम कोर्ट में उनकी जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई। विपिन पांडे की तरफ से अधिवक्ताओं ने तर्क रखा कि धारा पांच साल से कम सजा वाली है। गिरफ्तारी से पहले पुलिस ने धारा 35 (3) का नोटिस भी नहीं दिया। पुलिस ने भारी फोर्स के साथ बड़े अपराधी की तरह गिरफ्तारी की। मुकदमा भी पुलिस की तरफ से ही दर्ज हुआ है। दूसरे पक्ष ने कहा कि आरोपी पर पूर्व में ऐसे ही प्रकरण में थानों में प्राथमिकी दर्ज है। बचाव पक्ष ने कहा कि वह मामले प्रमाणित नहीं हैं। दोनों पक्ष के तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने जमानत मंजूर कर ली।
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