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नैनीताल पहुंचा हिमालयन भालू
अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल
Updated Mon, 11 Jul 2016 01:08 AM IST
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हिमालयन भालू
- फोटो : अमर उजाला
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रविवार को नैनीताल में भालू आया, भालू आया का शोर गूंजा। यूं तो विजिट नैनीताल का स्लोगन प्रशासन सर-माथे पर रखता है। फिर पर्यटन का सीजन हो तो पलक पावड़े बिछाने में कोई कसर भी नहीं छोड़ी जाती। पर, रविवार को शहर में भालू को घूमता देखकर प्रशासन के होश फाख्ता हो गए।
जंगल से निकल कर शहर में आये इस भालू ने शायद रास्ता खोजने की कोशिश में एक होटल में तोड फोड़ की। यहां रह रहे पर्यटक के जरिये बात फैली। भालू तो खैर आबादी वाले क्षेत्र में रास्ता खोजते-खोजते, नैनी झील में डूबते-उतराते जंगल में गायब हो गया, पर वन विभाग की टीम छह घंटे तक मशक्कत करती रही।
हुआ कुछ यूं कि रविवार सुबह साढ़े चार बजे भालू एक भालू प्रशांत होटल की बाउंड्री के पास दिखाई दिया। बताया गया कि यह भालू जू मोटर मार्ग से आर्मी के ब्लाक 35 से होता हुआ आलोक साह के वृंदावन गेस्ट हाउस के अंतिम ब्लाक में पहुंचा था। वहां पर उसने पहले एक कमरे का शीशा तोड़ा उसके बाद वह गेस्ट हाउस की चहारदीवारी में लगी लोहे की रेलिंग को तोड़ते हुए अतुल साह के प्रशांत होटल की बाउंड्री में घुस गया। यहां उसने कमरा नंबर चार की खिड़की के शीशे को तोड़ दिया।
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जिससे उसका पैर जख्मी हो गया और उससे खून बहने लगा। इस दौरान शीशे का एक टुकड़ा कमरे में सोये दिल्ली के पर्यटक पंकज खन्ना के सिर में गिरा। बाद में भालू कमरे के पीछे वाली गैलरी में चला गया। गैलरी में दो शौचालय थे भालू ने इन शौचालयों से बाहर निकलने का प्रयास करते वक्त वहां भी तोड़ फोड़ की। पंकज खन्ना को स्थिति का अंदाजा हुआ तो उन्होंने तुरंत होटल के नौकर जनक बहादुर को आवाज लगाई। फिर उसने मालिक अतुल साह को जानकारी दी। साह जैसे ही गैलरी में पहुंचे तो उनका सामना भालू से हो गया। घबराहट में खुद को बचाने के चक्कर में वह पीछे मुड़े तो उनके पांव और हाथ में भी चोट लग गयी।
भालू के आबादी में पहुंचने की सूचना के तुरंत बाद वन विभाग भी हरकत में आ गया। कहा गया कि भालू जू से भागकर आया है। वन विभाग वालों ने तुरंत गिनती की और कहा कि जू के सभी भालू अपनी जगह ही मौजूद हैं। जंगली भालू जितनी देर भी आबादी वाले क्षेत्र में रहा, उसने किसी मनुष्य को निशाना नहीं बनाया। बाद में डीएफओ डॉ. तेजस्विनी अरविंद पाटिल सहित वन विभाग और अन्य कई अधिकारियों ने भालू को आयरापाटा के जंगलों में करीब 10.30 बजे तक खोजा लेकिन वह कहीं नजर नहीं आया। पाटिल ने बताया कि यह जू का भालू नहीं था। यह हिमालयन भालू है।
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जंगल से निकल कर शहर में आये इस भालू ने शायद रास्ता खोजने की कोशिश में एक होटल में तोड फोड़ की। यहां रह रहे पर्यटक के जरिये बात फैली। भालू तो खैर आबादी वाले क्षेत्र में रास्ता खोजते-खोजते, नैनी झील में डूबते-उतराते जंगल में गायब हो गया, पर वन विभाग की टीम छह घंटे तक मशक्कत करती रही।
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हुआ कुछ यूं कि रविवार सुबह साढ़े चार बजे भालू एक भालू प्रशांत होटल की बाउंड्री के पास दिखाई दिया। बताया गया कि यह भालू जू मोटर मार्ग से आर्मी के ब्लाक 35 से होता हुआ आलोक साह के वृंदावन गेस्ट हाउस के अंतिम ब्लाक में पहुंचा था। वहां पर उसने पहले एक कमरे का शीशा तोड़ा उसके बाद वह गेस्ट हाउस की चहारदीवारी में लगी लोहे की रेलिंग को तोड़ते हुए अतुल साह के प्रशांत होटल की बाउंड्री में घुस गया। यहां उसने कमरा नंबर चार की खिड़की के शीशे को तोड़ दिया।
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जिससे उसका पैर जख्मी हो गया और उससे खून बहने लगा। इस दौरान शीशे का एक टुकड़ा कमरे में सोये दिल्ली के पर्यटक पंकज खन्ना के सिर में गिरा। बाद में भालू कमरे के पीछे वाली गैलरी में चला गया। गैलरी में दो शौचालय थे भालू ने इन शौचालयों से बाहर निकलने का प्रयास करते वक्त वहां भी तोड़ फोड़ की। पंकज खन्ना को स्थिति का अंदाजा हुआ तो उन्होंने तुरंत होटल के नौकर जनक बहादुर को आवाज लगाई। फिर उसने मालिक अतुल साह को जानकारी दी। साह जैसे ही गैलरी में पहुंचे तो उनका सामना भालू से हो गया। घबराहट में खुद को बचाने के चक्कर में वह पीछे मुड़े तो उनके पांव और हाथ में भी चोट लग गयी।
भालू के आबादी में पहुंचने की सूचना के तुरंत बाद वन विभाग भी हरकत में आ गया। कहा गया कि भालू जू से भागकर आया है। वन विभाग वालों ने तुरंत गिनती की और कहा कि जू के सभी भालू अपनी जगह ही मौजूद हैं। जंगली भालू जितनी देर भी आबादी वाले क्षेत्र में रहा, उसने किसी मनुष्य को निशाना नहीं बनाया। बाद में डीएफओ डॉ. तेजस्विनी अरविंद पाटिल सहित वन विभाग और अन्य कई अधिकारियों ने भालू को आयरापाटा के जंगलों में करीब 10.30 बजे तक खोजा लेकिन वह कहीं नजर नहीं आया। पाटिल ने बताया कि यह जू का भालू नहीं था। यह हिमालयन भालू है।