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Uttarakhand: हाईकोर्ट का सख्त रुख, नियमों का उल्लंघन करने वाले दो रिसॉटर्स पर कार्रवाई के निर्देश

Sat, 09 May 2026 12:53 PM IST
गायत्री जोशी संवाद न्यूज एजेंसी
संवाद न्यूज एजेंसी Published by: गायत्री जोशी Updated Sat, 09 May 2026 12:53 PM IST
सार

खुर्पाताल में नियमों का उल्लंघन कर संचालित हो रहे दो रिसॉर्ट्स के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। 

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High Court directed action against two resorts for violating the rules
नैनीताल हाईकोर्ट।

विस्तार

हाईकोर्ट ने खुर्पाताल में स्थित दो रिसॉटर्स की ओर से बिना नियमों का पालन किए संचालित किए जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए तीन जून की तिथि नियत करते हुए पक्षकारों को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार हरिद्वार निवासी ललित मिगलानी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड पर्यावरण कंट्रोल बोर्ड की ओर से दो होटल यानी मैसर्स हॉलिडे होम और मैसर्स डायनेस्टी रिसॉर्ट नियमों का पालन न करने वाले पाए गए और मैसर्स डायनेस्टी रिसॉर्ट के खिलाफ 20 अप्रैल, 2026 को बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया था।

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बोर्ड का कहना था कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड होटल को बंद करने के लिए तत्काल कार्रवाई करेगा, जब तक कि सभी वैधानिक अनुपालनों को पूरा नहीं कर लिया जाता। याचिकाकर्ता का कहना था कि मैसर्स डॉयनेस्टी रिसॉर्ट जिसके खिलाफ बंद करने का आदेश पारित किया गया है वह अभी भी चल रहा है। बोर्ड के अधिवक्ता की ओर से कहा गया कि 48 घंटों के भीतर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उक्त होटल को तब तक बंद रखा जाए जब तक कि सभी नियमों का पालन नहीं हो जाता। कोर्ट ने नए जोड़े गए प्रतिवादियों को स्पीड पोस्ट से नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
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कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 जून की तिथि नियत की है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को नैनीताल के जिला मजिस्ट्रेट और नैनीताल के उप-विभागीय मजिस्ट्रेट को भी प्रतिवादी के रूप में पक्षकार बनाने की अनुमति देते हुए कहा है कि वह ये यह सुनिश्चित करेंगे कि वे अस्थायी स्टॉल, जिन्हें कथित तौर पर जलग्रहण क्षेत्र से हटाया गया था, उस क्षेत्र पर दोबारा कब्जा न करें। इस संबंध में संबंधित एसडीएम को अगली तारीख तक अनुपालन रिपोर्ट पेश करने को कहा है। कोर्ट ने जिला प्रशासन द्वारा नियमित निगरानी करने को कहा है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उस क्षेत्र पर किसी भी व्यक्ति द्वारा दोबारा कब्जा न किया जाए।

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