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हर तरफ सरकारी सिस्टम की मार
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स्वास्थ्य सुविधाएं ‘कोमा’ में, इलाज के लिए ‘डॉक्टर’ चाहिए
या
स्वास्थ्य सुविधाओं को आईसीयू से निकालने वाले डॉक्टर की तलाश
सब हेड
कहीं तीन मंजिला भवन धूल फांक रहा, कहीं हस्तांतरण की प्रक्रिया अधूरी, कहीं उपकरण चलाने के लिए टेक्नीशियन का अभाव तो कहीं अस्पताल के शुरू होने का ही इंतजार
इंफो
10 करोड़ की लागत से तैयार आयुष अस्पताल के भवन को हस्तांतरण का इंतजार
कैच वर्ड: पड़ताल
स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल
माई सिटी रिपोर्टर
हल्द्वानी। स्वास्थ्य महकमे के पास बेहतर इलाज और मरीजों की संतुष्टि की न सिर्फ जिम्मेदारी होती है बल्कि जवाबदेही भी होती है। यह ऐसा विभाग है जिसके साथ भरोसा और विश्वास शब्द जुड़े रहते हैं लेकिन अपने जिले की स्वास्थ्य सुविधाएं ही बीमार हैं। बीमारी भी ऐसी जो लाइलाज नहीं है लेकिन इलाज हो नहीं हो पा रहा है। इलाज कराने वाले सिर्फ आश्वासनों की घुट्टी के सहारे हैं। ‘बीमारियां’ सरकारी सिस्टम के करंट कराह रही हैं। भारी भरकम बजट खर्च करने के बावजूद कहीं तीन मंजिला भवन धूल फांक रहा है तो कहीं अस्पताल की हस्तांतरण की प्रक्रिया अधूरी है। किसी अस्पतातल में उपकरण हैं लेकिन उन्हें चलाने के लिए टेक्नीशियन ही नहीं है। कहीं अस्पताल के शुरू होने के इंतजार में दर्द बढ़ता जा रहा है।
फोटो
आयुष अस्पताल का भवन हस्तांतरित ही नहीं हो पा रहा
हल्द्वानी। केंद्र सरकार के सहयोग से बदरीपुरा में 50 बेड का आयुष का अस्पताल तैयार करने की योजना 2017-2018 में बनी। काम शुरू तो हुआ मगर पूरा हुआ दो साल की देरी से। करीब दस करोड़ की लागत से भवन तैयार हो चुका है पर आयुर्वेद विभाग को भवन हस्तांतरित नहीं हो सका है। अभी भवन की जांच प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। आयुर्वेद विभाग ने तीन सदस्यीय विभागीय टीम का गठन किया गया था। टीम ने भवन की जांच कर रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें कुछ छिटपुट खामियों का उल्लेख किया गया था, अब इस टीम के बाद एक और तकनीकी समिति की टीम का गठन किया जाना है। अस्पताल को चलाने के लिए करीब 70 स्टाफ की नियुक्ति भी नहीं हो पाई है। बहुमंजिला इमारत में पहुंचने के लिए लिफ्ट और जेनरेटर के लिए करीब सवा दो करोड़ और फर्नीचर, उपकरण आदि के लिए करीब सवा दो करोड़ का प्रस्ताव भी फाइलों में कैद है।
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तीन मंजिला इमारत में वन्यजीव जमाते हैं डेरा
हल्द्वानी। हरिपुरपांडे नवाड़ स्थित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में करीब एक दशक पहले करोड़ों की लागत से तीन मंजिला इमारत का निर्माण किया गया। इस इमारत में करीब 40 कमरे हैं। इसका उपयोग एएनएम ट्रेनिंग सेंटर के लिए किया जाना था लेकिन इसका उपयोग नहीं हो सका है। बीते दिनों इस एएनएम ट्रेनिंग सेंटर में तेंदुआ घुस गया था जिसे निकालने के लिए वन विभाग की टीम ने ऑपरेशन भी चलाया था। यह बिल्डिंग धीरे-धीरे खंडहर होने की स्थिति में है। इस बिल्डिंग के आसपास अन्य भवन भी बदहाल हैं।
लैब का समान जुटाया, लैब टेक्नीशियन का पता नहीं
हल्द्वानी। स्वास्थ्य महकमे ने बनभूलपुरा स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जांच की सुविधा जुटाने की योजना बनाई थी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने जांच की सुविधा शुरू करने की योजना बनाई। जांच उपकरण आदि भी खरीद लिए थे लेकिन आज तक जांच शुरू नहीं हो सकी। लैब टेक्नीशियन की कमी के चलते मामला फंसा हुआ है। स्वास्थ्य अधिकारियों का दावा है कि यहां से निजी पैथोलॉजी के माध्यम से जांच का काम किया जाता है।
कोट
- एएनएम ट्रेनिंग सेंटर के भवन के उपयोग के लिए पहले मेडिकल कॉलेज को देने की योजना थी। इस भवन का कैसे उपयोग किया जा सकता था, उसे देखा जाएगा। बद्रीपुरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जांच सुविधा शुरू करने के लिए लैब टेक्निशियन तैनाती की मांग की गई है। लैब टेक्निशियन आने के बाद जांच सुविधा शुरू कर दी जाएगी।
-डॉ. भागीरथी जोशी, सीएमओ नैनीताल
कोट
अभी भवन का थर्ड पार्टी निरीक्षण होना है। प्रयास है कि जल्द ही सभी औपचारिकता को पूरी करने के बाद आयुष अस्पताल को शुरू कर दिया जाए।
-डॉ. एमएस गुंज्याल, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी, नैनीताल
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स्वास्थ्य सुविधाओं को आईसीयू से निकालने वाले डॉक्टर की तलाश
सब हेड
कहीं तीन मंजिला भवन धूल फांक रहा, कहीं हस्तांतरण की प्रक्रिया अधूरी, कहीं उपकरण चलाने के लिए टेक्नीशियन का अभाव तो कहीं अस्पताल के शुरू होने का ही इंतजार
इंफो
10 करोड़ की लागत से तैयार आयुष अस्पताल के भवन को हस्तांतरण का इंतजार
कैच वर्ड: पड़ताल
स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल
माई सिटी रिपोर्टर
हल्द्वानी। स्वास्थ्य महकमे के पास बेहतर इलाज और मरीजों की संतुष्टि की न सिर्फ जिम्मेदारी होती है बल्कि जवाबदेही भी होती है। यह ऐसा विभाग है जिसके साथ भरोसा और विश्वास शब्द जुड़े रहते हैं लेकिन अपने जिले की स्वास्थ्य सुविधाएं ही बीमार हैं। बीमारी भी ऐसी जो लाइलाज नहीं है लेकिन इलाज हो नहीं हो पा रहा है। इलाज कराने वाले सिर्फ आश्वासनों की घुट्टी के सहारे हैं। ‘बीमारियां’ सरकारी सिस्टम के करंट कराह रही हैं। भारी भरकम बजट खर्च करने के बावजूद कहीं तीन मंजिला भवन धूल फांक रहा है तो कहीं अस्पताल की हस्तांतरण की प्रक्रिया अधूरी है। किसी अस्पतातल में उपकरण हैं लेकिन उन्हें चलाने के लिए टेक्नीशियन ही नहीं है। कहीं अस्पताल के शुरू होने के इंतजार में दर्द बढ़ता जा रहा है।
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आयुष अस्पताल का भवन हस्तांतरित ही नहीं हो पा रहा
हल्द्वानी। केंद्र सरकार के सहयोग से बदरीपुरा में 50 बेड का आयुष का अस्पताल तैयार करने की योजना 2017-2018 में बनी। काम शुरू तो हुआ मगर पूरा हुआ दो साल की देरी से। करीब दस करोड़ की लागत से भवन तैयार हो चुका है पर आयुर्वेद विभाग को भवन हस्तांतरित नहीं हो सका है। अभी भवन की जांच प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। आयुर्वेद विभाग ने तीन सदस्यीय विभागीय टीम का गठन किया गया था। टीम ने भवन की जांच कर रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें कुछ छिटपुट खामियों का उल्लेख किया गया था, अब इस टीम के बाद एक और तकनीकी समिति की टीम का गठन किया जाना है। अस्पताल को चलाने के लिए करीब 70 स्टाफ की नियुक्ति भी नहीं हो पाई है। बहुमंजिला इमारत में पहुंचने के लिए लिफ्ट और जेनरेटर के लिए करीब सवा दो करोड़ और फर्नीचर, उपकरण आदि के लिए करीब सवा दो करोड़ का प्रस्ताव भी फाइलों में कैद है।
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तीन मंजिला इमारत में वन्यजीव जमाते हैं डेरा
हल्द्वानी। हरिपुरपांडे नवाड़ स्थित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में करीब एक दशक पहले करोड़ों की लागत से तीन मंजिला इमारत का निर्माण किया गया। इस इमारत में करीब 40 कमरे हैं। इसका उपयोग एएनएम ट्रेनिंग सेंटर के लिए किया जाना था लेकिन इसका उपयोग नहीं हो सका है। बीते दिनों इस एएनएम ट्रेनिंग सेंटर में तेंदुआ घुस गया था जिसे निकालने के लिए वन विभाग की टीम ने ऑपरेशन भी चलाया था। यह बिल्डिंग धीरे-धीरे खंडहर होने की स्थिति में है। इस बिल्डिंग के आसपास अन्य भवन भी बदहाल हैं।
लैब का समान जुटाया, लैब टेक्नीशियन का पता नहीं
हल्द्वानी। स्वास्थ्य महकमे ने बनभूलपुरा स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जांच की सुविधा जुटाने की योजना बनाई थी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने जांच की सुविधा शुरू करने की योजना बनाई। जांच उपकरण आदि भी खरीद लिए थे लेकिन आज तक जांच शुरू नहीं हो सकी। लैब टेक्नीशियन की कमी के चलते मामला फंसा हुआ है। स्वास्थ्य अधिकारियों का दावा है कि यहां से निजी पैथोलॉजी के माध्यम से जांच का काम किया जाता है।
कोट
- एएनएम ट्रेनिंग सेंटर के भवन के उपयोग के लिए पहले मेडिकल कॉलेज को देने की योजना थी। इस भवन का कैसे उपयोग किया जा सकता था, उसे देखा जाएगा। बद्रीपुरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जांच सुविधा शुरू करने के लिए लैब टेक्निशियन तैनाती की मांग की गई है। लैब टेक्निशियन आने के बाद जांच सुविधा शुरू कर दी जाएगी।
-डॉ. भागीरथी जोशी, सीएमओ नैनीताल
कोट
अभी भवन का थर्ड पार्टी निरीक्षण होना है। प्रयास है कि जल्द ही सभी औपचारिकता को पूरी करने के बाद आयुष अस्पताल को शुरू कर दिया जाए।
-डॉ. एमएस गुंज्याल, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी, नैनीताल