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Jim Corbett National Park: 88 साल पूरे...हैप्पी बर्थ-डे जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, तीन बार बदला गया था नाम

Thu, 08 Aug 2024 08:57 AM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: हीरा मेहरा Updated Thu, 08 Aug 2024 08:57 AM IST
सार

जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क की आज ही के दिन स्थापना हुई थी। 1936 में हेली नेशनल पार्क के नाम से स्थापना हुई थी, जिसे आज 88 साल पूर्ण हो चुके है। इस दौरान तीन बार का पार्क का नाम बदला गया था।

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Happy Birthday Jim Corbett National Park
Jim Corbett National Park - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 

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दुनिया भर में मशहूर जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क की आज ही के दिन स्थापना हुई थी। 1936 में हेली नेशनल पार्क के नाम से स्थापना हुई थी, जिसे आज 88 साल पूर्ण हो चुके है। इस दौरान तीन बार का पार्क का नाम बदला गया था। यहां दुनियाभर से हर साल बड़ी तादात में पर्यटक जंगल सफारी करने पहुंचते हैं। पिछले कुछ वर्षों यहां बाघों की संख्या भी काफी बढ़ी है और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ी है।

1934 में तत्कालीन गर्वनर सर विलियम हेली ने इस क्षेत्र को वन्यजीवों के लिए संरक्षित किए जाने की वकालत की थी। जिम एडवर्ड कार्बेट को इसकी सीमाओं का निर्धारण किए जाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। आठ अगस्त 1936 को हेली नेशनल पार्क नाम से यह भारत के पहले राष्ट्रीय उद्यान के रूप में अस्तित्व में आया। उसके बाद से धीरे-धीरे यह क्षेत्र रामनगर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनता गया। आज हजारों पर्यटन कारोबारियों व दुकानदारों की आजीविका कार्बेट के पर्यटन पर टिकी है।

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तीन बार बदला गया नाम
तीन बार पार्क का नामकरण हुआ। सीटीआर निदेशक डा. साकेत बडोला ने बताया वर्ष 1936 में इसका नाम हेली नेशनल पार्क था। इसके बाद रामगंगा नेशनल पार्क रखा। तीसरी बार 1955 में फिर नाम बदलकर कार्बेट नेशनल पार्क रख दिया। पहले कार्बेट पार्क का क्षेत्रफल 323.75 वर्ग किमी था। 1966 में इसका क्षेत्रफल बढ़ाकर 520.82 वर्ग किमी किया। कार्बेट पार्क के 520.82 वर्ग किमी क्षेत्र में ही पर्यटन होता है। पार्क में इस समय 262 बाघ, 1226 हाथी, 145 मगरमच्छ, 95 घडिय़ाल, 143 ऊदबिलाव और हिरन के अलावा भालू, सांभर, तेंदुआ आदि के अलावा सरीसृप और छह सौ से अधिक प्रजातियों के पक्षी भी मौजूद है।

जिम कार्बेट के थे मशहूर शिकारी
जेम्स ए. जिम कार्बेट आयरिश मूल के भारतीय लेखक, पर्यावरणविद, फोटोग्राफर और शिकारी थे। उन्होंने मानवीय अधिकारों के लिए संघर्ष किया व संरक्षित वनों और वन्यजीवों को बचाने का प्रयास भी। उन्होंने नैनीताल के पास कालाढूंगी में आवास बनाया था। जिम ने उत्तराखंड में अनेक आदमखोर बाघों को मार कर ग्रामीणों को उनके दहशत से मुक्ति दिलाई थी। जिनमें रुद्रप्रयाग का आदमखोर और चम्पावत में 436 लोगों का शिकार करने वाली आदमखोर बाघिन भी शामिल है।

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