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भीमताल में जमकर बरसे ओले
ब्यूरो/अमर उजाला, भ्ाीमताल
Updated Mon, 06 Apr 2015 01:47 AM IST
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रविवार सुबह साफ आसमान एवं चटख धूप खिली देख लोगों और किसानों ने बेमौसमी बारिश से राहत महसूस की, लेकिन दोपहर बाद नगर और आसपास के क्षेत्रों में न केवल मूसलाधार बारिश हुई, बल्कि जबरदस्त ओलावृष्टि से बची-खुुची फसलें भी बर्बाद हो गई। ओलावृष्टि के बाद ठंड भी एकाएक बढ़ गई है।
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रविवार शाम करीब सवा छह बजे आकाशीय बिजली की जोरदार कड़क के साथ आधा घंटे तक क्षेत्र में जमकर ओलावृष्टि हुई और सड़क से लेकर घरों की छतों तक ओलों की सफेद चादर बिछ गई। जंगलियागांव के सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम सिंह कुल्याल ने बताया कि ओलावृष्टि से सिमाला, जंगलियागांव, मलुवाताल, बूढ़ाधूरा, हरिनगर क्षेत्र में गेहूं, जौ, मटर, आलू, आड़ू, पुलम और नाशपाती की 50 फीसदी से अधिक फसल नष्ट हो गई है।
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नौकुचियाताल के पूर्व प्रधान विशन सिंह पोखरिया ने बताया कि क्षेत्र में हुई ओलावृष्टि से गेहूं, जौ और मटर की पौध खेतों में गिर गई है। क्षेत्रीय युवक समिति ओखलकांडा के सचिव राजीव कुमार के मुताबिक साल, झड़गांव और गरगड़ी में ओलावृष्टि से गेहूं एवं अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा है। वहीं दूसरी ओर मल्लीताल बाजार क्षेत्र में ओलावृष्टि का कम असर रहा।
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इतनी तीव्रता से ओलावृष्टि आज तक नहीं देखी : नेगी
क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता 70 वर्षीय गोविंद सिंह नेगी कहते हैं कि रविवार शाम जिस तीव्रता से ओलावृष्टि हुई, इतनी तीव्रता उन्होंने जीवन में अब तक नहीं देखी। उन्होंने बताया कि ओलावृष्टि की तीव्रता इतनी तेज थी कि चंद मिनटों में ही डांठ और इसके आसपास के क्षेत्रों में सड़कें, छत आदि सभी ओलों से पट गए। नेगी ने बताया कि उनके मकान की छत ओलों से पूरी तरह पट गई थी, ओले और पानी की निकासी के लिए उन्हें डाउन पाइप तोड़ना पड़ा।