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देश को आजादी दिलाने में सालम क्षेत्र के क्रांतिकारियों ने जान की तक परवाह नहीं की

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 09 Aug 2020 10:57 PM IST
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Freedom fighter of Salam
अल्मोड़ा के सालम (जैंती) के शहीद स्थल धामद्यो में स्थित शहीद स्मारक। - फोटो : ALMORA
अल्मोड़ा। केरल से कारगिल घाटी तक, गोवाहाटी से चौपाटी तक हम खुली हवा में सांस ले रहे हैं तो इसके पीछे वे लोग हैं जिन्होंने देश की आजादी की खातिर हंसते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी। ऐसे ही अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों की बदौलत आजादी के इस पर्व को हमने वर्ष 1947 में पहली बार महसूस किया था। आजादी की लड़ाई में अल्मोड़ा जिले के सालम क्षेत्र के क्रांतिकारियों का भी अहम योगदान रहा है। अंग्रेजों से लोहा लेते हुए सालम के दो क्रांतिकारियों ने अपनी शहादत दी थी।
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने जब ‘करो या मरो’ का आह्वान करते ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ का नारा बुलंद किया तब सालम की जनता भी आजादी के आंदोलन में कूद पड़ी थी। देश की आजादी में सालम की सन 1942 की रक्तरंजित अगस्त क्रांति का महत्व स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। 25 अगस्त 1942 को सालम (जैंती) के धामद्यो में अंग्रेजी सेना और क्रांतिकारियों के बीच हुए युद्ध में नर सिंह धानक तथा टीका सिंह कन्याल शहीद हो गए। नौ अगस्त 1942 को महात्मा गांधी ने मुंबई में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया तो यहां सालम में भी एक हफ्ते बाद आंदोलन ने जोर पकड़ लिया। इससे पहले ही अंग्रेजी सेना ने महान क्रांतिकारी दुर्गादत्त शास्त्री को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पंडित रेवाधर पांडे तथा नयन सिंह बिष्ट (वर्मा) को घर में नजरबंद कर दिया गया। ऐसे में आंदोलन का नेतृत्व राम सिंह आजाद और प्रताप सिंह बोरा के हाथों में आ गया। सालम के क्रांतिकारी नौ अगस्त 1942 की रात नौगांव (बिरखम) में क्रांतिकारियों को पटवारी ने गिरफ्तार कर लिया। क्रांतिकारियों को छुड़ाने के लिए जनता की पटवारियों से झड़प हो गई। इस बीच गोलीबारी में शेर सिंह घायल हो गए। इस घटना के बाद नाराज जनता ने जैंती में एक डाकखाने को आग के हवाले कर दिया। इससे गुस्साए डिप्टी कलेक्टर ने हथियारों से लैस सिपाहियों की टुकड़ी सालम भेजी, जहां सिपाहियों ने बंदूक की नोक पर जनता पर बेइंतिहा जुल्म किए। 25 अगस्त 1942 को क्रांतिकारी जैंती तहसील के धामद्यो में एकत्रित हुए थे इसी बीच अंग्रेजी सेना मौके पर पहुंची और कई प्रलोभन दिए लेकिन क्रांतिकारियों ने उनकी मांग ठुकराकर भारत माता का जयघोष करते हुए अंग्रेजी सेना पर पथराव कर दिया। इस पर कमांडर ने सेना को गोली चलाने का आदेश दे दिया। इस गोलीबारी में नर सिंह धानक मौके पर शहीद हो गए, जबकि दूसरे क्रांतिकारी टीका सिंह कन्याल ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। कई क्रांतिकारियों को जेलों में बंद कर दिया गया। अंग्रेजी सेना ने घरों में रखा सामान जला दिया। कई लोगों की कुर्की कर दी है।
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