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Uttarakhand Forest Fire: सुलगते जंगल...एक्शन प्लान बनाने में जुटा वन विभाग; जानें क्या कहते हैं अधिकारी

Mon, 29 Apr 2024 01:17 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: हीरा मेहरा Updated Mon, 29 Apr 2024 01:17 PM IST
सार

उत्तराखंड के जंगलों में आग धधक रही है। कुमाऊं से लेकर गढ़वाल तक जंगलों में आग फैली हुई है। जंगलात के अनुसार सुप्रीम कोर्ट से अनुमति के बाद फायर लाइन पर उगे पेड़ हटाने के लिए एक्शन प्लान बनाया जा रहा है।

 

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Forest Department busy in preparing action plan after getting permission from Supreme Court in nainital
आग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 

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ब्रिटिश हुकूमत के दौर से जंगल की आग पर काबू पाने के कई प्रभावी तरीके अपनाए जाते थे। इसमें वनाग्नि रोकने के लिए 100 फुट लंबी फायर लाइन बनाई गई। पर सही से देखरेख और सफाई न होने से इन फायर लाइन में पेड़ उग आए हैं। जंगलात के अनुसार सुप्रीम कोर्ट से अनुमति के बाद फायर लाइन पर उगे पेड़ हटाने के लिए एक्शन प्लान बनाया जा रहा है।

जंगल में आग को नियंत्रित करने के लिए कंट्रोल बर्निंग करना, फायर लाइन बनाना, मॉडल और क्रू स्टेशन को तैयार करने समेत अन्य कदम उठाए जाते हैं। इसमें जंगल के बीच से फायर लाइन (कई फीट चौड़ा मार्ग जैसा) बनाई जाती है। इससे अगर किसी तरफ से जंगल में आग लगी हो तो आगे पेड़ न होने से वह फैल नहीं सके। इन फायर लाइन का इस्तेमाल गश्त करने समेत अन्य कामों में भी किया जाता था। करीब 40 साल पहाड़ में एक हजार मीटर की ऊंचाई पर पेड़ों के कटान पर रोक लगा दी गई। बाद में इन फायर लाइन की देखरेख और सफाई न होने से वहां पेड़ उग आए। ऐसे में कई जगहों पर उनकी उपयोगिता खत्म हो गई है।

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क्या कहते हैं अधिकारी
अपर मुख्य वन संरक्षक वनाग्नि नियंत्रण निशांत वर्मा कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मिल चुकी है। अब फायर लाइन में जहां वृक्ष हैं उन्हें हटाने का कार्य होगा। इसके लिए एक्शन प्लान बनाया जा रहा है। मुख्य वन संरक्षक कार्ययोजना संजीव चतुर्वेदी कहते हैं कि जिन वन प्रभागों की कार्ययोजना तैयार की जा रही है, उसमें फायर लाइन से जुड़ी दस साल की समीक्षा करने को कहा गया है। यह देखने को कहा गया है कि जहां पर फायर लाइन हैं, वहां पर आग लगने की कितनी घटनाएं हुई है, यह वर्तमान में कितनी उपयोगी हैं। किन नए क्षेत्रों में फायर अलर्ट अधिक आए हैं? वहां पर नई फायर लाइन स्थापित की जरूरत तो नहीं है, इन सभी पहलू की समीक्षा करकर वार्किंग प्लान में सुझाव दिया जाएगा।

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