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पहली बार सोलर फेंसिग के अंदर हाथी को निगरानी में रखा

Sun, 19 Feb 2017 12:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो रामनगर
अमर उजाला ब्यूरो रामनगर Updated Sun, 19 Feb 2017 12:56 AM IST
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First Solar Fensig elephant inside under observation
बुंदेलखंड में कम हो रही हाथियों की संख्या

रामनगर वन प्रभाग के कोटा रेंज में विगत दिनों मिले घायल हाथी का शनिवार को नैनीताल जू के डॉक्टरो की टीम ने उपचार किया। हाथी को एक सप्ताह के लिए निगरानी में रखने के लिए सोलर फैंसिंग की गई जो प्रदेश का पहला हाथी रेस्क्यू आपरेशन है।

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शुक्रवार को गश्त के दौरान रामनगर वन प्रभाग के कोटा रेंज क्षेत्र के भंडारपानी वन क्षेत्र में वन कर्मियों द्वारा एक हाथी जिसकी उम्र लगभग 12-13 वर्ष है को घायल अवस्था में देखा गया। जिसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी गयी व मौके पर पहुंची प्रभागीय वनाधिकारी नेहा वर्मा ने मौके का निरीक्षण किया और रेस्क्यू के लिये योजना बनाई। शनिवार की सुबह ऑपरेशन शुरू किया इसमें नैनीताल जू से पशुचिकित्साधिकारी की टीम मौके पर पहुंची।
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हाथी के उपचार के लिये पास के जंगल में खुला क्षेत्र चयनित कर हाथी के लिए कृत्रिम वास स्थल तैयार किया गया, जिसमें वाटर हॉल बनाकर उसमें टैंकर द्वारा पानी की व्यवस्था की गई। उसके बाद हाथी को गन्ना चारे से आकर्षित करते हुए उक्त क्षेत्र में पहुंचाया गया।
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डॉ. योगेंद्र भारद्वाज ने हाथी को ट्रैंकुलाइज कर उसका उपचार किया। उपचार के दौरान ही उक्त वन क्षेत्र को सोलर फैसिंग द्वारा कवर कर दिया गया। घायल हाथी के खाने के लिए गन्ना, आटा, गुड़, नमक व हाथी के जंगली प्रिय भोजन बरगद, झींगन आदि के पत्ते उपलब्ध कराए गए।  

कोटा रेंज के रेंज अधिकारी ललित जोशी ने बताया कि इस ऑपरेशन में प्रदेश में पहली बार हाथी रेस्क्यू करने के लिए सोलर फैसिंग का उपयोग किया गया। घायल हाथी को उपचार के लिए एक सप्ताह के लिए इस फैसिंग में रखा जाएगा व स्वस्थ होते ही उसे वापस जंगल में छोड़ दिया जायेगा।

इस अवधि में चार वन कर्मी और एक महावत रखे गए हैं, जो प्रतिदिन घायल हाथी के उपचार का कार्य देखेंगे। सोलर फैसिंग की व्यवस्था में अनिल बेलवाल द्वारा विशेष सहयोग प्रदान किया गया।


ढाई घंटे में आया हाथी को होश

दिन में डेढ़ बजे डॉक्टर योगेंद्र भारद्वाज ने हाथी को ट्रैंकुलाइज किया जैसे ही हाथी बेहोश होने लगा तुरंत दो जेसीबी के सहारे खड़ा रखा गया। हाथी का उपचार करीब 45 मिनट तक चला इसके तुरंत बाद ही 150 मीटर की परिधि में सोलर फेंसिग लगाई गई, दो वाटर हॉल बनाये गये जो एक दलदलनुुमा तो एक साफ पानी के लिए है।
 

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