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पहले कुछ पाने की दरकार पर सड़कों पर उतरते थे लोग
ब्यूरो /अमर उजाला, लालकुआं (नैनीताल)।
Updated Thu, 15 Oct 2015 01:22 AM IST
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बिंदुखत्ता की सड़कों पर पहले भी जल सैलाब देखा गया था और आज
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भी। मगर एक अंतर साफ था पहले लोग मौलिक सुविधाएं देने के लिए सड़कों पर
उतरते थे तो आज एक फैसले के खिलाफ एकजुट दिखे।
बिंदुखत्ता की सरजमीं जन संघर्षों के लिए जानी जाती है। चार दशकों से पुराना इतिहास इस बात का गवाह है कि अपने मूल अधिकारों के लिए यहां की जनता ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एक मंच पर एकत्रित होती रही है।
सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य व अन्य मांगों को मनवाने में जनता अपने संघर्षों के दम पर कामयाब भी रही। आज अंतर मात्र इनता था कि इस बार भी भारी जन सैलाब सड़कों पर उमड़ा था।
जनता भी वही थी लेकिन कहानी जुदा थी। अबकी जनता किसी अधिकार को पाने के लिए नही बल्कि जबरन थोपी गई नगरपालिका को वापस लेने की मांग कर रही थी।
बिंदुखत्ता की सरजमीं जन संघर्षों के लिए जानी जाती है। चार दशकों से पुराना इतिहास इस बात का गवाह है कि अपने मूल अधिकारों के लिए यहां की जनता ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एक मंच पर एकत्रित होती रही है।
सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य व अन्य मांगों को मनवाने में जनता अपने संघर्षों के दम पर कामयाब भी रही। आज अंतर मात्र इनता था कि इस बार भी भारी जन सैलाब सड़कों पर उमड़ा था।
जनता भी वही थी लेकिन कहानी जुदा थी। अबकी जनता किसी अधिकार को पाने के लिए नही बल्कि जबरन थोपी गई नगरपालिका को वापस लेने की मांग कर रही थी।