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फर्स्ट डिवीजन उत्तीर्ण छात्रों को भी एमकॉम में दाखिला नहीं
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हल्द्वानी। एमबीपीजी कॉलेज से बीकॉम फर्स्ट डिवीजन से उत्तीर्ण करने वाले छात्र-छात्राओं को कॉलेज में ही एमकॉम प्रथम सेमेस्टर में दाखिला नहीं मिल पा रहा है। एमकॉम में दाखिले के बाद अब केवल 21 सीटें बची हैं और इन सीटों पर प्रवेश के लिए इतनी मारामारी है कि प्रवेश के लिए 400 आवेदन फार्म जमा हो गए हैं। इस वजह से तीसरी मेरिट लिस्ट घोषित करने में वाणिज्य विभाग के पसीने छूट रहे हैं।
एमबीपीजी कॉलेज में इस वर्ष बीकॉम फाइनल सेमेस्टर में 700 से अधिक छात्र-छात्राओं ने परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इनमें से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की फर्स्ट डिवीजन आई है। एमकॉम में सीटें कम होने की वजह से फर्स्ट डिवीजन उत्तीर्ण विद्यार्थियों को भी दाखिले के लिए पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। एमकॉम में कुल 80 सीटें हैं, इसमें शासन के निर्देश पर दस प्रतिशत सीटें वृद्धि से आठ और सामान्य वर्ग के कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए 10 प्रतिशत सीटें बढ़ाने से आठ सीटें बढ़ने से इसमें कुल 96 सीटें हो गई। इसमें से दाखिले होने के बाद केवल 21 सीटें बची हैं मगर आवेदन अत्यधिक आने से विभाग के प्रोफेसर परेशान हैं।
छात्रों की पीड़ा
संजय शर्मा का कहना है कि उन्होंने 61.5 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की है। आवेदन जमा करने के बाद भ्ज्ञी प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। प्राध्यापक कह दे रहे हैं कि यूओयू से एमकॉम कर लो। रोहित भट्ट ने कहा कि दाखिला ही नहीं मिल पा रहा है। पूनम रौतेला के अनुसार बीकॉम 60 प्रतिशत अंकों से पास करने के बाद भी अपने ही कॉलेज में एमकॉम में दाखिला नहीं मिल पा रहा है।
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कोट
सभी विद्यार्थियों को दाखिला संभव नहीं है। तीसरी मेरिट बनाई जा रही है मगर सामान्य वर्ग में 69 प्रतिशत वाले विद्यार्थियों के आने से इससे नीचे अंकों वाले छात्रों को कहां दाखिला मिला पाएगा। प्राचार्य को पूरी वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया गया है।
- डॉ. सीएस जोशी, वाणिज्य विभागाध्यक्ष
किस वर्ग की कितनी सीटें
वर्ग कुल सीटें रिक्त सीटें
सामान्य - 55 02
एससी - 17 07
ओबीसी - 12 01
एसटी - 04 0
ईडब्ल्यूएस - 08 08
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एमबीपीजी कॉलेज में इस वर्ष बीकॉम फाइनल सेमेस्टर में 700 से अधिक छात्र-छात्राओं ने परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इनमें से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की फर्स्ट डिवीजन आई है। एमकॉम में सीटें कम होने की वजह से फर्स्ट डिवीजन उत्तीर्ण विद्यार्थियों को भी दाखिले के लिए पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। एमकॉम में कुल 80 सीटें हैं, इसमें शासन के निर्देश पर दस प्रतिशत सीटें वृद्धि से आठ और सामान्य वर्ग के कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए 10 प्रतिशत सीटें बढ़ाने से आठ सीटें बढ़ने से इसमें कुल 96 सीटें हो गई। इसमें से दाखिले होने के बाद केवल 21 सीटें बची हैं मगर आवेदन अत्यधिक आने से विभाग के प्रोफेसर परेशान हैं।
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छात्रों की पीड़ा
संजय शर्मा का कहना है कि उन्होंने 61.5 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की है। आवेदन जमा करने के बाद भ्ज्ञी प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। प्राध्यापक कह दे रहे हैं कि यूओयू से एमकॉम कर लो। रोहित भट्ट ने कहा कि दाखिला ही नहीं मिल पा रहा है। पूनम रौतेला के अनुसार बीकॉम 60 प्रतिशत अंकों से पास करने के बाद भी अपने ही कॉलेज में एमकॉम में दाखिला नहीं मिल पा रहा है।
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सभी विद्यार्थियों को दाखिला संभव नहीं है। तीसरी मेरिट बनाई जा रही है मगर सामान्य वर्ग में 69 प्रतिशत वाले विद्यार्थियों के आने से इससे नीचे अंकों वाले छात्रों को कहां दाखिला मिला पाएगा। प्राचार्य को पूरी वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया गया है।
- डॉ. सीएस जोशी, वाणिज्य विभागाध्यक्ष
किस वर्ग की कितनी सीटें
वर्ग कुल सीटें रिक्त सीटें
सामान्य - 55 02
एससी - 17 07
ओबीसी - 12 01
एसटी - 04 0
ईडब्ल्यूएस - 08 08