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आंखें पढ़तीं सियासत, जुबां बंद है
विजेंद्र श्रीवास्तव
Updated Fri, 10 Feb 2017 12:49 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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रेलगाड़ी जब रफ्तार भरती है, तो उसी के साथ ही डिब्बों में मौजूद लोगों में मेलजोल के अलावा मुद्दों पर बातचीत और कई बार बहस का नजारा आम होता है। अगर वक्त चुनाव का हो तो ट्रेन में सरकार तक बन जाती है। रेलयात्रा में चुनाव चर्चा का जायजा बृहस्पतिवार को दिल्ली-काठगोदाम की यात्रा में नए सिरे से मिला।
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ट्रेन में अजीब सी खामोशी, लेकिन लोगों की नजर लगातार सोशल मीडिया से लेकर अखबारों में बन-बिगड़ रही सियासत के सिरों को पकड़ने और समझने में लगी हुई थी, उनकी आंखें तो सियासत को पढ़ रही हैं, पर जुबां चुप है।
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अमर उजाला प्रतिनिधि ने बृहस्पतिवार सुबह शताब्दी एक्सप्रेस (दिल्ली से कोठगोदाम) से सफर किया। यात्री अखबार, इंटरनेट और सोशल मीडिया पर सूचनाओं को खंगाल रहे हैं। एक अंग्रेजी अखबार में अमित शाह की खबर को पढ़ रहे और दिल्ली से रुद्रपुर जा रहे राजीव सिंह कहते हैं कि निराशा का माहौल है।
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सब तरफ से लोगों को निराशा लगी है। बात शुरू हुई तो कहने लगे उत्तराखंड से सटे बिजनौर के रहने वाले हैं। उन्होंने पहले अपने जिले की सीटों की हार-जीत का अनुमान बताया। फिर यूपी से सटे उत्तराखंड की तरफ बातों का सिलसिला घूमा। कहते हैं कि पहले बीजेपी आगे थी।
अब मुकाबला कड़ा हो गया है। इस बार तराई में जंग रोचक होने जा रही है। इसी बीच एक यात्री ने मोबाइल पर सदन की रिकॉर्डिंग ऑन कर दी। वहां का हाल जानने को लेकर सभी शांत होकर एकाग्र हो जाते हैं। सदन की थोड़ी हलचल सुनने के बीच ही स्टेशन आ गया।
एक यात्री जो हमारी बातचीत सुन रहे थे, कहते हैं जब वोटर चुप है तो समझें कि कुछ उसने उसी तरह सोचा है, जिस तरह बसपा का वोटर रिएक्ट करता है। वह चुप होकर वोट करता है और फिर अपने काम में जुट जाता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही होगा।
चुनाव की चर्चा महज ट्रेन के भीतर तक नहीं है। पटरी के किनारे की दीवारें भी समाज, राजनीति, संस्कृति की बातों का संदेश दे रही हैं। चुनाव आयोग की सख्ती ही होगी कि राजनैतिक संदेशों को कहीं-कहीं पर ऊपर से पोत दिया गया है।
और कहीं पर वे हकीमों के इलाज का दावों में दबे-दबे से हैं। मुरादाबाद, रामपुर जैसे इलाके में दीवारें खामोश हैं। लालकुआं में मलिन बस्तियों नगीना कॉलोनी, राजीव नगर में ही झंडे लहराते नजर आए। तब लगा कि कुछ उत्साह है और चुनाव हो रहा है। हल्द्वानी में जामा मस्जिद के पास कांग्रेस के झंडे लग रहे हैं, उन्हें लगाने वाला ठेकेदार अपने कारकून से उसकी ‘ऊंचाई’ बढ़ाने को कह रहा है।