रामनगर में पर्यटकों की बहार: दिल्ली से हर साल लाखों लोग पहुंचते हैं कॉर्बेट, ट्रेन बढ़ें तो और बढ़ेगा रोजगार
दिल्ली से हर साल लाखों पर्यटक रामनगर के कॉर्बेट पार्क में जंगल सफारी के लिए आते हैं। जंगल सफारी करने वाले यात्री निजी वाहन से रामनगर आते हैं। दिल्ली से केवल एक ही ट्रेन रामनगर आती है लेकिन यहां से दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन नहीं है।
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नैनीताल के बाद पर्यटकों की पसंदीदा कॉर्बेट सिटी यानी रामनगर में बड़े शहरों के लिए ट्रेन सुविधा नहीं होने से पर्यटकों और स्थानीय लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। सालभर पर्यटकों की आवाजाही के बावजूद यहां से केवल सात ट्रेन चलती हैं। विडंबना ये है कि इनमें भी देश-प्रदेश की राजधानी के लिए सीधी ट्रेन सेवा नहीं है।
दिल्ली से हर साल लाखों पर्यटक रामनगर के कॉर्बेट पार्क में जंगल सफारी के लिए आते हैं। जंगल सफारी करने वाले यात्री निजी वाहन से रामनगर आते हैं। दिल्ली से केवल एक ही ट्रेन रामनगर आती है लेकिन यहां से दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन नहीं है। प्रदेश की राजधानी देहरादून के लिए भी रामनगर से ट्रेन नहीं चलती है जबकि यहां से दून जाने वाले यात्रियों की संख्या भी काफी है। ऐसे में मजबूरन यहां आने वाले पर्यटक और अन्य यात्रियों को हल्द्वानी, रुद्रपुर या मुरादाबाद जाना पड़ता है। पार्क वार्डन अमित ग्वासीकोटी ने बताया कि कॉर्बेट पार्क में जंगल सफारी के लिए वित्तीय वर्ष 2021-22 में 2.78 लाख और 2022-23 में अनुमानित 3.60 लाख पर्यटकों ने जंगल सफारी की थी।
इन ट्रेन का संचालन होता है रामनगर से
रामनगर से चंडीगढ़ (केवल सोमवार), रामनगर से मुरादाबाद (प्रतिदिन), रामनगर से बांद्रा टर्मिनल (केवल शुक्रवार), रामनगर से काशीपुर (प्रतिदिन), रामनगर से आगरा फोर्ट (सोम, बृहस्पतिवार, शनि), रामनगर से जैसलमेर (प्रतिदिन) संचालन होता है।
धार्मिक पर्यटन भी बढ़ रहा
रामनगर में गर्जिया देवी मंदिर और करीब तीन किलोमीटर पहले स्थित हनुमान धाम के दर्शनों के लिए लाखों पर्यटक आते हैं। गर्जिया मंदिर और हनुमान धाम के प्रति बढ़ती आस्था से यहां धार्मिक पर्यटन लगातार बढ़ रहा है लेकिन पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ाने के लिए खास प्रयास नहीं किए गए।
कभी बड़ी रेल लाइन के लिए हुआ था आंदोलन
ब्रिटिश शासन काल में लालकुआं से जब छोटी रेल लाइन बिछाई गई तब 1906 में भाप वाले इंजन से सीटी बजाती ट्रेन पहली बार रामनगर पहुंची तो लोगों का हुजूम ट्रेन देखने के लिए उपड़ पड़ा। रामनगर की तब आबादी महज 4038 थी। ज्यादातर काशीपुर से आने वाले व्यापारी ही यहां कारोबार करते थे। 60 के दशक में कत्थे का कारोबार चरम पर था जो ट्रेन से मुरादाबाद, बरेली, दिल्ली तक सप्लाई होता था।
1988 के दौरान काशीपुर में बड़ी रेल लाइन प्रस्तावित हुई थी लेकिन रामनगर उसमें शामिल नहीं था। इसे लेकर तीन महीने तक आंदोलन भी चला। आंदोलन के दौरान रामनगर के बाजार कई बार बंद हुए। तीन जून 1988 को तत्कालीन रेल राज्य मंत्री माधवराव सिंधिया के साथ तत्कालीन वित्त एवं वाणिज्य मंत्री नारायण दत्त तिवारी रामनगर पहुंचे और बड़ी लाइन रेल सेवा को उद्घाटन किया। इसके बाद रामनगर की जनता ने आंदोलन को समाप्त किया।