फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   eggs and kheer being surved to birds and beer

पक्षी खा रहे हैं अंडे, भालू को परोसी जा रही है खीर

Fri, 05 Jan 2018 02:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो नैनीताल। 
अमर उजाला ब्यूरो नैनीताल।  Updated Fri, 05 Jan 2018 02:08 AM IST
विज्ञापन
eggs and kheer being surved to birds and beer
नैनीताल जू में शहद का स्वाद लेता भालू। - फोटो : Amar ujala
ठंड में एकाएक इजाफा होने से गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणि उद्यान में पशु पक्षियों के आहार और बाड़े के अंदर बदलाव किया गया है। भालूओं को उनके प्रिय शहद और गुड़ के साथ ही खीर भी खिलायी जा रही है। पक्षियों को अंडे दिए जा रहे हैं। रेड पांडा ठंड से बचाने के लिए हल्दूघास में बैठकर गर्मी ले रहा है।
विज्ञापन


 समुद्र सतह से 2020 मीटर की ऊंचाई पर 11.60 एकड़  में फैले प्राणि उद्यान में इस समय 235 वन्य प्राणि हैं। इनमें 180 पक्षी (फीजेंट्स) हैं। सभी को अलग-अलग बाड़ों में रखा गया है। ठंड में लगातार बढ़ोत्तरी से प्राणि उद्यान प्रबंधन ने वन्य प्राणियों के आहार में भी परिवर्तन कर दिया है।
विज्ञापन


सामान्य आहार के रूप में पक्षियों को एग्रोफीड़, हरी सब्जियां, लहसुन, प्याज, निनरल साल्ट आदि वस्तुएं नियमित रूप से दी जा रही थीं। सामान्य आहार के साथ पक्षियों को उबले अंडे का चूरा चारे में मिलाकर खिलाया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हिमालयन भालुओं को सुबह के नाश्ते और दिन में खीर, सब्जी और फल दिए जा रहे हैं जबकि रात में जौ की रोटियां, दूध के साथ ही गुड़ और शहद दिया जा रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि शहद, गुड़ और अंडे की तासीर गर्म होती है और इसके सेवन से शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा भी मिलती है।

रेड पांडा के रात्रि के विश्राम वाले स्थल पर हल्दू घास बिछाई गई है। सामान्य आहार के साथ उसे भी गुड़ और शहद मिल रहा है। बाघ और मकाऊं के बाड़े में गर्मी के लिए ब्लोअर भी लगाया गया है। जू के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. योगेश भारद्वाज ने बताया कि सभी वन्य प्राणियों के आहार में मिनरल साल्ट दिया जा रहा है जिसमें आयरन, फास्फेट, मल्टी विटामिन आदि सभी तत्व विद्यमान होते हैं। 

बाड़ों में डाल दिए तिरपाल
चिड़ियाघर में आने वाले देशी-विदेशी सैलानी जाड़ों के मौसम में भी पशु-पक्षियों का आसानी से दीदार कर सके इसे ध्यान में रखते हुए उनके बाड़ों के अगले भाग में जालियां लगी रहती हैं लेकिन ठंड बढ़ने पर यह जालियां पशु-पक्षियों के लिए मुसीबत बन जाती हैं। ऐसे में इन दिनों खासकर पक्षियों के बाड़ों में तिरपाल का सहारा लिया जा रहा है।

प्राणि उद्यान के आरओ प्रकाश चंद्र जोशी के अनुसार शाम को पांच बजे बाद जाली को तिरपाल से बंद कर दिया जाता है जबकि सुबह 10 बजे इस तिरपाल को अलग कर दिया जाता है ताकि धूप बाड़ों के भीतर आसानी से आ सके। 


जाड़ों के मौसम में पशु-पक्षियों के आहार और आवास में भी परिवर्तन करना ही पड़ता है। मार्च तक यह व्यवस्था रहेगी। वैसे जू में मौजूद अधिकतर पशु-पक्षी उच्च स्थलीय प्रकृति के ही हैं लिहाजा उन पर ठंड का असर कम ही होता है। अन्य प्रजातियों के पक्षियों को ठंड से बचाना जरूरी होता है, क्योंकि वे अधिक ठंड सहन नहीं कर सकते हैं।
-धर्म सिंह मीणा, निदेशक चिड़ियाघर 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed