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प्लास्टिक के पाइपों से चल रही पेयजल योजना
ब्यूरो/अमर उजाला, भवाली
Updated Thu, 30 Apr 2015 02:16 AM IST
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सालाना करोड़ों रुपए खर्च करने वाले जल संस्थान की उदासीनता के चलते रामगढ़ ब्लाक के श्यामखेत और इसके आसपास के क्षेत्रों में प्लास्टिक के पाइपों से पेयजल आपूर्ति की जा रही है। ऐसे में आए दिन पाइप टूटने से पेयजल आपूर्ति ठप होते रहती है। ग्रामीणों की मांग के बाद भी विभाग प्लास्टिक के पाइपों के स्थान पर जीआई पाइप नहीं लगा सका है।
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यहां से लगभग आठ किलोमीटर दूर कुलेटी गधेरे में पानी का वर्षों पुराना स्रोत है। हल्द्वानी-अल्मोड़ा पैदल मार्ग में स्थित इस स्रोत के बारे में बुजुर्ग बताते हैं कि लगभग चार पांच दशक पहले जब मल्ला श्यामखेत क्षेत्र के तीन दर्जन से अधिक परिवारों के सामने पेयजल संकट की स्थिति पैदा हुई तो क्षेत्र के लोगों ने कुलेटी स्रोत से मल्ला श्यामखेत को पेयजल आपूर्ति की योजना बनाने की मांग की।
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कई साल तक संघर्ष करने के बाद सरकार ने इस योजना को मंजूरी दी। डेढ़ दशक पहले वन विभाग ने महेशखान क्षेत्र में नर्सरी स्थापित की तो इसी योजना से नर्सरी में सिंचाई के लिए पानी लिया। ग्रामीण बताते हैं कि योजना बनने के बाद से अब तक स्रोत से गांव तक जीआई पाइप नहीं लगाए गए हैं। उनके स्थान पर विभाग प्लास्टिक के पाइपों से ही पेयजल आपूर्ति कर रहा है।
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ग्राम प्रधान संजय जोशी बताते हैं कि प्लास्टिक के पाइप आए दिन अलग-अलग स्थानों पर टूटते रहते हैं, जिससे पेयजल आपूर्ति ठप होती रहती है। प्लास्टिक के पाइपों के स्थान पर जीआई पाइप लगाने की मांग विभाग से की गई है, लेकिन विभाग ने अब तक इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की है। इस संबंध में जल संस्थान के अधिशासी अभियंता जगदीप चौधरी से संपर्क किया गया लेकिन उनसेे संपर्क नहीं हो सका।