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छात्रों से न लें बढ़ी हुई फीस : हाईकोर्ट
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नैनीताल। हिमालयन आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज देहरादून के छात्रों की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कॉलेज प्रबंधन को आदेश दिया है कि छात्रों से बढ़ी हुई फीस न ली जाए, उन्हें क्लास में बैठने दिया जाए और छात्रों को बैक पेपर भरने दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि यदि कॉलेज प्रबंधन ऐसा नहीं करता है तो उसे अगली तिथि को कोर्ट में व्यगतिगत तौर पर पेश होना होगा।
पूर्व में एकलपीठ ने आदेश पारित कर बढ़ी हुई फीस वापस करने को कहा था। न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार छात्र मनीष कुमार और अन्य ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर कहा था कि प्रदेश के आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज द्वारा उनसे सत्र 2018-2019 के लिए बढ़ी हुई फीस ली जा रही है, जबकि बढ़ी हुई फीस नए शैक्षिणिक सत्र 2020-21,2021-22 से लागू होनी है।
याचिकाकर्ता का कहना था कि फीस नहीं देने पर उनको कॉलेज में पढ़ने नहीं दिया जा रहा है, जिससे उनका पाठ्यक्रम लेट हो रहा है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनका बीएएमएस का कोर्स साढ़े चार वर्ष का होता है और कालेज द्वारा उनसे पांच साल की फीस जमा करवाई जा रही है। फीस निर्धारण के संबंध में 29 अप्रैल 2019 को जस्टिस कुलदीप सिंह की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई थी। 2018-19 बैच के छात्रों के लिए 80 हजार रुपये फीस निर्धारित की गई थी और 2020 -21 बैच के छात्रो के लिए 2.15 लाख रुपये फीस निर्धारित की गई थी। बढ़ी हुई फीस से लगभग चार हजार छात्रों के भविष्य पर प्रभावित हो रहा है।
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पूर्व में एकलपीठ ने आदेश पारित कर बढ़ी हुई फीस वापस करने को कहा था। न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार छात्र मनीष कुमार और अन्य ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर कहा था कि प्रदेश के आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज द्वारा उनसे सत्र 2018-2019 के लिए बढ़ी हुई फीस ली जा रही है, जबकि बढ़ी हुई फीस नए शैक्षिणिक सत्र 2020-21,2021-22 से लागू होनी है।
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याचिकाकर्ता का कहना था कि फीस नहीं देने पर उनको कॉलेज में पढ़ने नहीं दिया जा रहा है, जिससे उनका पाठ्यक्रम लेट हो रहा है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनका बीएएमएस का कोर्स साढ़े चार वर्ष का होता है और कालेज द्वारा उनसे पांच साल की फीस जमा करवाई जा रही है। फीस निर्धारण के संबंध में 29 अप्रैल 2019 को जस्टिस कुलदीप सिंह की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई थी। 2018-19 बैच के छात्रों के लिए 80 हजार रुपये फीस निर्धारित की गई थी और 2020 -21 बैच के छात्रो के लिए 2.15 लाख रुपये फीस निर्धारित की गई थी। बढ़ी हुई फीस से लगभग चार हजार छात्रों के भविष्य पर प्रभावित हो रहा है।
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