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विकास से ज्यादा अनियमितताओं का ‘ब्लाक’
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Wed, 11 Mar 2015 01:42 AM IST
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जिलाधिकारी दीपक रावत ने मंगलवार शाम अचानक ब्लाक कार्यालय में छापा मारा। डीएम ने दो घंटे तक ब्लाक की सारी योजनाओं से जुड़े रिकार्ड देखे। फाइलें चेक की। बीडीओ निर्मला जोशी सहित अन्य कर्मचारियों से जानकारी ली, जिसमें भारी अनियमितताएं पाईं गई। चार कर्मचारी ड्यूटी से नदारद मिले, जिनका वेतन रोकने के आदेश डीएम ने दिए। साथ ही पेमेंट को लेकर की जा रही अनियमितताओं पर एक अकाउंटेंट के तबादले और जांच के आदेश भी दिए।
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शाम करीब साढ़े चार बजे डीएम अचानक ब्लाक आफिस पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने उपस्थिति रजिस्टर देखा, जिसमें एडीओ सांख्यिकी शालिनी तिवारी, एडीओ पंचायत मान सिंह बोरा, जेई राकेश पटेल और प्रशासनिक अधिकारी मोहिनी आर्या नदारद मिले। चारों के वेतन रोकने के निर्देश बीडीओ को दिए। इसके बाद डीएम ने बीडीओ से ब्लाक की तमाम योजनाओं की फाइलें और आय-व्यय का लेखा-जोखा देखा। राज्य वित्त, तेरहवें वित्त, विधायक निधि, एनआरएच, मनरेगा, नरेगा एवं सांसद निधि के तहत होने वाले कार्यों की प्रगति भी जानी।
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बिना फोटो और बोर्ड के हो रहे पेमेंट
डीएम ने जब निर्माण कार्यों की फाइलें देखी तो हैरान रह गए। ज्यादातर कामों के लिए पेमेंट बिना काम के फोटो और बोर्ड देखे ही कर दिया गया था, जबकि नियमत: निर्माण कार्य के फोटो और उस पर निर्माण के बाद लगे बोर्ड से पुष्टि के बाद ही पेमेंट की जाती है। इस तरह की पेमेंट के लिए डीएम ने अकाउंटेंट सुरेंद्र सिंह बिष्ट को सख्त निर्देश दिए कि एक सप्ताह में अगर सभी कार्यों की फोटो और बोर्ड उनके दफ्तर में आकर नहीं दिखाए तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। उनका एक पटल से दूसरे पटल पर तत्काल तबादला करने के निर्देश भी बीडीओ को दिए। दूसरे अकाउंटेंट जीबी पालीवाल के संबंध में भी यही निर्देश दिए गए।
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बिना बीडीओ के साइन के हो रहा मेजरमेंट
डीएम ने जब दोनों अकाउंटेंटों के पास कार्यों की मेजरमेंट बुक (एमबी) देखी तो पाया कि बुक में कार्यों के मेजरमेंट को बिना बीडीओ के हस्ताक्षर के पास किया गया था। कार्य शुरू होने और खत्म होने की तिथि भी अंकित नहीं थी। डीआरडीए के एई कमल वर्मा के हस्ताक्षरों पर डेट न होने को भी डीएम ने गड़बड़ी मानते हुए स्पष्टीकरण मांगा है।
एक भी मजदूर नहीं मिला अनपढ़
ब्लाक योजनाओं में जितने भी मजदूर काम करते हैं, उसमें कोई भी अनपढ़ नहीं मिला। सभी मजदूरों ने मस्टरोल में अपना पेमेंट साइन कर लिया हुआ था। किसी ने भी अंगूठा नहीं लगाया था। डीएम के अनुसार प्रथमदृष्टया मामला फर्जी तरीके से हस्ताक्षर कर फर्जी पेमेंट का लग रहा है।
सीमेंट खरीद में भी घोटाला
डीएम ने जेई हेमंत जोशी से सीमेंट के दाम पूछे तो उन्होंने पहले 295 रुपए प्रति बोरा बताया। जब डीएम ने फाइल देखी तो उसमें सीमेंट की खरीद 355 रुपए दिखाई गई थी। सीमेंट भी बिना कोटेशन के ग्राम विकास अधिकारी बसंत बल्लभ जोशी ने खरीदी थी। इस पर ग्राम विकास अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
डीपीआरओ का वेतन रोका गया
बीडीओ ने डीएम को बताया कि एडीओ पंचायत मानसिंह बोरा डीपीआरओ जितेंद्र कुमार के दफ्तर गए हैं। इसकी पुष्टि करने को डीएम ने डीपीआरओ को फोन किया, लेकिन उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिला। इस पर डीपीआरओ का एक माह का वेतन रोकने के निर्देश दिया।
न मैडम ट्रेजरी से लौटीं न तो साहब डीपीआरओ दफ्तर से
जब डीएम ने बीडीओ निर्मला जोशी से एडीएम पंचायत मान सिंह बोरा और प्रशासनिक अधिकारी मोहिनी आर्या के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि मोहिनी आर्या बिल जमा करवाने डेढ़ बजे ट्रेजरी गई थीं, जबकि मान सिंह सरकारी काम से भीमताल डीपीआरओ दफ्तर गए हैं। लेकिन छह बजे तक दोनों कर्मी कार्यालय नहीं लौटे। इस पर डीएम ने जांच के निर्देश दिए हैं।