{"_id":"61d9dc7d7c76ec58ec4079b6","slug":"dismissed-cases-filed-in-municipal-areas-will-be-subject-to-the-final-decision-of-the-court-haldwani-news-hld4503952172","type":"story","status":"publish","title_hn":"निकाय क्षेत्रों में दाखिल खारिज मामले कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निकाय क्षेत्रों में दाखिल खारिज मामले कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगे
विज्ञापन
नैनीताल। राज्य के निकाय क्षेत्रों खासकर नगर निगम क्षेत्रों में दाखिल खारिज के मामले हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगे। हाईकोर्ट ने इससे संबंधित पारित आदेश को लेकर सरकार के स्पष्टीकरण प्रार्थनापत्र को स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। 16 दिसंबर 2020 को हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद देहरादून से अतिक्रमण हटाने के आदेश पारित किए थे। अतिक्रमण की कार्रवाई की जद में अपनी भूमि आने पर याचिकाकर्ता संजय गुप्ता ने एसडीएम कोर्ट में प्रार्थनापत्र दाखिल कर भूमि से संबंधित फील्ड बुक में डिमार्केशन की अपील की। इसके बाद कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। डीएम कोर्ट ने भी उसका प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
इसमें कहा गया कि नगर निगम क्षेत्रों में राजस्व अफसरों द्वारा दाखिल खारिज म्यूटेशन नहीं किया जा रहा है। इसके बाद सरकार ने हाईकोर्ट में अपने आदेश के स्पष्टीकरण को लेकर अर्जी दाखिल की। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने सरकार के प्रार्थनापत्र को स्वीकार कर याचिकाकर्ता को इस संबंध में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि दाखिल खारिज के मामले कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। 16 दिसंबर 2020 को हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद देहरादून से अतिक्रमण हटाने के आदेश पारित किए थे। अतिक्रमण की कार्रवाई की जद में अपनी भूमि आने पर याचिकाकर्ता संजय गुप्ता ने एसडीएम कोर्ट में प्रार्थनापत्र दाखिल कर भूमि से संबंधित फील्ड बुक में डिमार्केशन की अपील की। इसके बाद कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। डीएम कोर्ट ने भी उसका प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
विज्ञापन
इसमें कहा गया कि नगर निगम क्षेत्रों में राजस्व अफसरों द्वारा दाखिल खारिज म्यूटेशन नहीं किया जा रहा है। इसके बाद सरकार ने हाईकोर्ट में अपने आदेश के स्पष्टीकरण को लेकर अर्जी दाखिल की। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने सरकार के प्रार्थनापत्र को स्वीकार कर याचिकाकर्ता को इस संबंध में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि दाखिल खारिज के मामले कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगे।
विज्ञापन