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झील से मलबा निकालने में गोलमाल की आशंका
अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल
Updated Sun, 19 Jun 2016 12:35 AM IST
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नगर के विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने शनिवार को मंडलायुक्त को ज्ञापन देकर पिछले दिनों नैनीझील से मलबा निकालने के काम की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। आरोप है कि मलबा निकालने के काम में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं। इधर दूसरी ओर पर्यावरणविद डा. अजय रावत ने तल्लीताल में झील किनारे पाथवे बनाने के मामले में झील विकास प्राधिकरण और लोनिवि को कानूनी नोटिस जारी कर इसे अतिक्रमण करार दिया है।
सरोवर नगरी के विभिन्न सामाजिक संगठनों, व्यापार मंडल, विभिन्न पार्टियों से जुड़े लोगों, अधिवक्ताओं और राज्य आंदोलनकारियों के शिष्टमंडल ने आयुक्त एएस नयाल को ज्ञापन देकर कहा है कि पिछले दिनों जिला प्रशासन के निर्देश पर लोनिवि ने नैनीझील से मलबा निकालने के नाम पर लाखों रुपये ठिकाने लगा दिए हैं। लोगों का कहना है कि उक्त अवधि में झील से जितना मलबा निकाला जाना चाहिए था उतना नहीं निकाला गया। उन्होंने इस पूरे मामले में घोटाले के आशंका व्यक्त करते हुए इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
इधर पर्यावरणविद डा. अजय रावत ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से झील विकास प्राधिकरण और लोनिवि को कानूनी नोटिस जारी कर डांठ में बनाए जा रहे पाथवे को अतिक्रमण करार दिया है। डा. रावत का कहना है कि हाईकोर्ट ने पूर्व में आदेश जारी किए थे कि झील से तीस मीटर की परिधि में किसी भी तरह का निर्माण कार्य नहीं कराया जा सकता है। उनका कहना है कि कार्यदायी संस्था द्वारा उक्त कार्य बगैर झील विकास प्राधिकरण की स्वीकृति के कराया जा रहा था। उन्होंने इस मामले में भी कार्रवाई की मांग की है।
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सरोवर नगरी के विभिन्न सामाजिक संगठनों, व्यापार मंडल, विभिन्न पार्टियों से जुड़े लोगों, अधिवक्ताओं और राज्य आंदोलनकारियों के शिष्टमंडल ने आयुक्त एएस नयाल को ज्ञापन देकर कहा है कि पिछले दिनों जिला प्रशासन के निर्देश पर लोनिवि ने नैनीझील से मलबा निकालने के नाम पर लाखों रुपये ठिकाने लगा दिए हैं। लोगों का कहना है कि उक्त अवधि में झील से जितना मलबा निकाला जाना चाहिए था उतना नहीं निकाला गया। उन्होंने इस पूरे मामले में घोटाले के आशंका व्यक्त करते हुए इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
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इधर पर्यावरणविद डा. अजय रावत ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से झील विकास प्राधिकरण और लोनिवि को कानूनी नोटिस जारी कर डांठ में बनाए जा रहे पाथवे को अतिक्रमण करार दिया है। डा. रावत का कहना है कि हाईकोर्ट ने पूर्व में आदेश जारी किए थे कि झील से तीस मीटर की परिधि में किसी भी तरह का निर्माण कार्य नहीं कराया जा सकता है। उनका कहना है कि कार्यदायी संस्था द्वारा उक्त कार्य बगैर झील विकास प्राधिकरण की स्वीकृति के कराया जा रहा था। उन्होंने इस मामले में भी कार्रवाई की मांग की है।
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