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जेल में बंदी को कुचल गया ट्रक
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 14 May 2017 01:33 AM IST
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- फोटो : graphic
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उपकारागार के बाहर शनिवार सुबह बड़ी घटना हो गई। जेल परिसर में बन रहे बाथरूम और किचेन के निर्माण के लिए ईंट उतारकर लौट रहे ट्रक ने एक बंदी को टक्कर मार दी। आनन-फानन में बंदी को सोहन सिंह जीना बेस अस्पताल ले जाया गया जहां उसने दम तोड़ दिया।
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इससे पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। पुलिस के अफसर जेल परिसर की ओर दौड़े। बाद में जेलर की तहरीर पर ट्रक ड्राइवर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया। जेल परिसर में उत्तराखंड अवस्थापना विकास निगम की तरफ से बाथरूम और किचेन का निर्माण किया जा रहा है।
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शनिवार सुबह साढ़े दस बजे ट्रक (एचआर 37ए 4040) ईंट उतारकर निकल रहा था। पत्नी हत्या के आरोप में 15 दिसंबर 2014 से बंद खटीमा (ऊधमसिंहनगर) के चारूबेटा निवासी दीनदयाल (40) अचानक ट्रक के पिछले टायर की चपेट में आ गया।
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उसके चिल्लाने पर वहां मौजूद लोग और बैरक से बंदी दौड़कर वहां पहुंचे तो देखा दीनदयाल छटपटा रहा था। आनन-फानन में बंदीरक्षक उसे लेकर सोहन सिंह जीना बेस अस्पताल पहुंचे। वहां वह शौचालय गया तो वहीं गिर गया। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
बंदी की मौत से पुलिस में हड़कंप मच गया। कोतवाली एसएसआई मनोहर सिंह दसौनी जेल पहुंचे और वहां मौजूद लोगों से पूछताछ की। बाद में ट्रक चालक ओम प्रकाश निवासी सिसौना खजूरिया (रामपुर) को हिरासत में ले लिया। जेलर संजीव ह्यांकी की तहरीर पर उसके खिलाफ धारा 379 और 304 ए के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
बंदी के ट्रक के पास आने को लेकर उठे सवाल
बंदी की मौत के बाद जेल प्रशासन की लापरवाही पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जेल में बंद बंदी दीनदयाल के साथ आए बंदीरक्षक का कहना था कि उसे पहले सांस की बीमारी थी। सवाल यह उठता है कि जेल में 800 विचाराधीन और सजायाफ्ता कैदी बंद हैं।
इनमें दीनदयाल ही ट्रक के पास क्यों आया। अन्य बंदी निर्माण स्थल से काफी दूर थे। बंदी के बाएं कंधे और दाहिने हाथ पर लगी चोट को लेकर भी अस्पताल में सवाल उठाए जा रहे थे कि बंदी टायर की चपेट में आया था या किसी अन्य प्रकार से घायल हुआ है क्योंकि बंदी के गर्दन और सिर पर किसी प्रकार की चोट नहीं थी।
सिर्फ बाएं कंधे और दाहिने हाथ पर चोट दिखाई दे रही थी। दीनदयाल किस तनाव से गुजर रहा था, क्या आत्महत्या करने के इरादे से बंदी ट्रक के पास आया था। इस बारे में जेल अधिकारी भी साफ-साफ जवाब नहीं दे रहे हैं। जेलर संजीव ह्यांकी का कहना है कि जेल अधीक्षक मनोज आर्या देहरादून में है जबकि डिप्टी जेलर कोठारी अवकाश पर हैं।
जेलर और ट्रक चालक का बयान समान
जेलर संजीव सिंह ह्यांकी ने बताया कि कैदी अचानक ट्रक के पास आ गया और टकरा गया था। चालक ओम प्रकाश का कहना है कि वर्ह ईंट उतारने के बाद सुरक्षित बाहर निकल रहा था। ज्यादा रफ्तार भी नहीं थी लेकिन कोने में बैठा बंदी अचानक पहिये के पास आएगा, यह उसने सोचा नहीं था।
अस्पताल के डॉक्टर भी बिफरे
घायल बंदी को बंदीरक्षक अस्पताल लेकर आए लेकिन उनके पास कोई कागजात मौजूद नहीं था। पूछने पर बंदीरक्षक विचाराधीन बंदी का पता भी नहीं बताए। आधी अधूरी जानकारी देने पर बेस अस्पताल के डॉक्टर बिफर गए। दोपहर एक बजे के बाद बंदीरक्षक जेल से कागजात लेकर आया।
घटना के समय जेल में डॉक्टर नहीं थे
बंदी के घायल होने के बाद जेल में प्राथमिक उपचार नहीं किया गया था। इस बारे में जेलर ने बताया कि जेल में स्थायी डॉक्टर मौजूद नहीं था। घटना के बाद डॉक्टर को जेल में बुलाया गया था। इलाज के लिए बंदी को तत्काल बेस अस्पताल भेजा गया था। डॉक्टर जेल से कॉल होेने पर ही अंदर जाते हैं।