{"_id":"59f4e9684f1c1b72548b99ce","slug":"91509222760-nainital-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"छात्र छात्राओं को नशा ले डूबेगा","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
छात्र छात्राओं को नशा ले डूबेगा
Updated Sun, 29 Oct 2017 02:02 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हल्द्वानी। शहर में युवाओं में नशे की बढ़ती लत एक बेहद चिंताजनक तस्वीर को भी सामने रख रही है। यह तस्वीर बेमानी होती जा रही शिक्षा व्यवस्था, कानून और समाज के अंकुश के तिरोहित होने और युवाओं में दिशाहीनता के और गहरे होने की है। अब हल्द्वानी के बुद्धिजीवियों को ही जवानी को बचाने के लिए आगे आना होगा।
शनिवार को पुलिस ने नशा कर रहे जिन युवाओं को गिरफ्त में लिया, वे सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत हैं। ये युवा उम्र की उस दहलीज पर भी हैं जहां वे अपना भला बुरा समझने की कुव्वत रखते हैं। घर से संपन्न और कई परीक्षाओं को पास करने के बाद वे उच्च शिक्षण संस्थाओं तक पहुंचे हैं। इसके बाद भी इन युवाओं का नशा करना पुलिस के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है। पिछले कुछ दिनों की घटनाओं पर नजर डालें तो नशे की आदत और कारोबार में युवाओं के और गहरे धंसने की पुष्टि ही हो रही है। युवाओं में बढ़ रहे इस रोग से पहला सवाल शिक्षा व्यवस्था पर ही खड़ा हो रहा है। एक इशारा शिक्षा के मूल्य विहीन हो जाने का है। जीवन मूल्यों को मात्र नैतिक शिक्षा की एक किताब के जरिए सिखाने वाली यह शिक्षा व्यवस्था युवाओं को नशे की गर्त में धकेलने से नहीं रोक पा रही है। नशे का यह मर्ज इस ओर भी इशारा कर रहा है कि समाज और कानून का अंकुश युवाओं पर कम होता जा रहा है। नशे के गर्त में जा रहे युवाओं को न पुलिस का खास डर दिखता है और न ही बड़े बुजुर्गों की झिड़कियों की उन्हें खास परवाह उन्हें रहती है। युवाओं की यह पीढ़ी करीब-करीब हिप्पी संस्कृति की ओर बढ़ती दिख रही है।
विज्ञापन
शनिवार को पुलिस ने नशा कर रहे जिन युवाओं को गिरफ्त में लिया, वे सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत हैं। ये युवा उम्र की उस दहलीज पर भी हैं जहां वे अपना भला बुरा समझने की कुव्वत रखते हैं। घर से संपन्न और कई परीक्षाओं को पास करने के बाद वे उच्च शिक्षण संस्थाओं तक पहुंचे हैं। इसके बाद भी इन युवाओं का नशा करना पुलिस के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है। पिछले कुछ दिनों की घटनाओं पर नजर डालें तो नशे की आदत और कारोबार में युवाओं के और गहरे धंसने की पुष्टि ही हो रही है। युवाओं में बढ़ रहे इस रोग से पहला सवाल शिक्षा व्यवस्था पर ही खड़ा हो रहा है। एक इशारा शिक्षा के मूल्य विहीन हो जाने का है। जीवन मूल्यों को मात्र नैतिक शिक्षा की एक किताब के जरिए सिखाने वाली यह शिक्षा व्यवस्था युवाओं को नशे की गर्त में धकेलने से नहीं रोक पा रही है। नशे का यह मर्ज इस ओर भी इशारा कर रहा है कि समाज और कानून का अंकुश युवाओं पर कम होता जा रहा है। नशे के गर्त में जा रहे युवाओं को न पुलिस का खास डर दिखता है और न ही बड़े बुजुर्गों की झिड़कियों की उन्हें खास परवाह उन्हें रहती है। युवाओं की यह पीढ़ी करीब-करीब हिप्पी संस्कृति की ओर बढ़ती दिख रही है।
विज्ञापन