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उलकापात के आतिशी नजारे 12 की रात दिखेंगे
Updated Mon, 07 Aug 2017 02:28 AM IST
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नैनीताल। इसी माह 12 तारीख को उल्कापिंडों की ऐसी बरसात होगी, जिसे नंगी आंखों से देखा जा सकेगा। हालांकि पिछले साल के मुकाबले उल्काओं की चमक हल्की रहेगी, क्योंकि उल्कापिंड कम संख्या में दिखेंगे।
नंगी आंखों से देखे जा सकने के कारण चार उल्कापात का अधिक महत्व है। दिशा के आधार पर इनका नामाकरण किया गया है। इनमें 12 अगस्त को पेर्सीड, 21 अक्तूबर को ओरियोनिड, 16 नवंबर को लियोनिड और 15 दिसंबर को कोजेमिनिड उल्कापात शामिल हैं। एरीज के वैज्ञानिक डॉ. वहाबुद्दीन के अनुसार उल्काएं कांस्टीलेशन (तारों का समूह) की दिशा से आती हैं, जो स्विफ्ट टटल नामकधूमकेतु द्वारा अंतरिक्ष में छोड़ा गया मलबा है। पृथ्वी की कक्षा में आने पर घर्षण से जलकर चमकते हैं। इनकी गति लगभग 72 हजार किमी प्रति घंटा होने से ये तेजी से धरती की ओर गिरते हैं और पृथ्वी की सतह पर आने तक नष्ट हो जाते हैं।
डॉ. वहाबुद्दीन के अनुसार 12 अगस्त की रात चांद लगभग तीन-चौथाई होगा। अत: इसकी रोशनी में कम चमक वाले उल्का नजर नहीं आएंगे। उल्कापात की गति दर 50 से 60 तक प्रति घंटा होने की संभावना है। चांद की रोशनी के कारण इनकी चमक भी ज्यादा नहीं होगी। वह भी तब दिखेंगे जब आकाश साफ हो, जबकि वर्तमान में इसकी संभावना कम ही है।
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बता दें कि पिछले साल 12 अगस्त को ही 150 से 160 प्रति घंटे की रफ्तार से उल्कापात हुआ था। हालांकि पेर्सीड उल्कापात में कई पिंड एक मीटर व्यास तक के भी होते हैं औैर इनके घर्षण से होने वाली चमक ज्यूपिटर और वीनस से ज्यादा नजर आती है। इसके चलते वैज्ञानिक इन्हें फायर बॉल्स भी कहते हैं।
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नंगी आंखों से देखे जा सकने के कारण चार उल्कापात का अधिक महत्व है। दिशा के आधार पर इनका नामाकरण किया गया है। इनमें 12 अगस्त को पेर्सीड, 21 अक्तूबर को ओरियोनिड, 16 नवंबर को लियोनिड और 15 दिसंबर को कोजेमिनिड उल्कापात शामिल हैं। एरीज के वैज्ञानिक डॉ. वहाबुद्दीन के अनुसार उल्काएं कांस्टीलेशन (तारों का समूह) की दिशा से आती हैं, जो स्विफ्ट टटल नामकधूमकेतु द्वारा अंतरिक्ष में छोड़ा गया मलबा है। पृथ्वी की कक्षा में आने पर घर्षण से जलकर चमकते हैं। इनकी गति लगभग 72 हजार किमी प्रति घंटा होने से ये तेजी से धरती की ओर गिरते हैं और पृथ्वी की सतह पर आने तक नष्ट हो जाते हैं।
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डॉ. वहाबुद्दीन के अनुसार 12 अगस्त की रात चांद लगभग तीन-चौथाई होगा। अत: इसकी रोशनी में कम चमक वाले उल्का नजर नहीं आएंगे। उल्कापात की गति दर 50 से 60 तक प्रति घंटा होने की संभावना है। चांद की रोशनी के कारण इनकी चमक भी ज्यादा नहीं होगी। वह भी तब दिखेंगे जब आकाश साफ हो, जबकि वर्तमान में इसकी संभावना कम ही है।
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बता दें कि पिछले साल 12 अगस्त को ही 150 से 160 प्रति घंटे की रफ्तार से उल्कापात हुआ था। हालांकि पेर्सीड उल्कापात में कई पिंड एक मीटर व्यास तक के भी होते हैं औैर इनके घर्षण से होने वाली चमक ज्यूपिटर और वीनस से ज्यादा नजर आती है। इसके चलते वैज्ञानिक इन्हें फायर बॉल्स भी कहते हैं।